गांधीनगर लोकल क्राइम ब्रांच (LCB) की टीम को एक बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने पिछले 22 साल से आंख मिचौली खेल रहे एक शातिर अंतरराज्यीय भगोड़े को मोरबी के मालिया इलाके से गिरफ्तार कर लिया है। पकड़ा गया आरोपी असली नोटों के बदले एक के तीन गुना नकली नोट देने का लालच देकर लोगों से ठगी करता था और दो दशकों से अपनी पहचान छुपाकर पुलिस को चकमा दे रहा था।

नोट तिगुने करने का झांसा देकर फरार हुआ था शातिर ठग
यह पूरा मामला करीब 22 साल पुराना है, जब गांधीनगर जिले के कलोल तालुका पुलिस स्टेशन में नकली नोटों का एक गंभीर मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले का मुख्य आरोपी मंगलाराम पुत्र वरीगाराम, निवासी- जोगाउ, जिला- जालोर (राजस्थान), अपने ही रिश्तेदारों के साथ मिलकर एक गैंग चलाता था। यह गैंग सीधे-साधे लोगों को असली रुपयों के बदले तीन गुना नकली करेंसी देने का झांसा देकर ठगता था। साल 2004 में जब कलोल तालुका पुलिस ने इस जालसाजी का भंडाफोड़ किया, तो आरोपी मंगलाराम रातों-रात अपने मूल वतन राजस्थान के जालोर जिले के जोगाउ गांव भाग गया। इसके बाद वह पुलिस से बचने के लिए अलग-अलग राज्यों में लगातार ठिकाने और अपनी पहचान बदल-बदल कर छुप रहा था।
गांधीनगर पुलिस का चक्रव्यूह और मोरबी के ढाबे पर छपेमारी
गुजरात पुलिस द्वारा फरार अपराधियों की धरपकड़ के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत, इंचार्ज पुलिस अधीक्षक आयुष जैन के मार्गदर्शन में एलसीबी पीआई के.जे. राठोड और उनकी टीम लगातार पुराने मामलों की कड़ियां जोड़ रही थी। इसी दौरान पुलिस टीम को तकनीकी सर्विलांस और मुखबिरों के जरिए एक बेहद सटीक सूचना मिली कि 22 साल से फरार चल रहा आरोपी मंगलाराम इस समय मोरबी के मालिया इलाके में 'समराथल भादू होटल' के पास छिपा हुआ है।
धर-दबोचा गया 22 साल का भगोड़ा, कलोल पुलिस को सौंपा
सटीक इनपुट मिलते ही गांधीनगर लोकल क्राइम ब्रांच की टीम ने बिना वक्त गंवाए मोरबी में छापेमारी की। पुलिस ने घेराबंदी करके आरोपी मंगलाराम वरीगाराम बिश्नोई को रंगे हाथों दबोच लिया। गिरफ्तारी की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद एलसीबी ने आरोपी को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए कलोल तालुका पुलिस स्टेशन को सौंप दिया है। कलोल पुलिस अब आरोपी को रिमांड पर लेकर नकली नोटों के पुराने नेटवर्क और उसके सहयोगियों के बारे में गहन पूछताछ कर रही है।







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