गुजरात से राजस्थान जाने वाले यात्रियों की बढ़ी मुसीबत: 1 लाख तक के भारी-भरકમ जुर्माने से भड़के बस मालिक; भुखमरी और आत्महत्या तक की नौबत
સુરત (गुजरात)। सूरत में बसे लाखों राजस्थानियों के लिए एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। राजस्थान परिवहन विभाग (RTO) की कथित तानाशाही और अवैध वसूली के विरोध में सूरत के लग्जरी बस संचालकों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का बिगुल फूंक दिया है। सूरत के एपीएमसी (APMC) ग्राउंड में सैकड़ों बसों को खड़ा कर संचालकों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक राजस्थान सरकार अपनी कड़ाई कम नहीं करती, तब तक एक भी बस सीमा पार नहीं करेगी।
एक लाख तक का दंड: ‘गुजरात पासिंग’ बसों को बनाया जा रहा निशाना बस संचालकों का आरोप है कि राजस्थान सीमा में प्रवेश करते ही आरटीओ अधिकारी केवल गुजरात नंबर की गाड़ियों को रोककर छोटी-छोटी बातों पर 50 हजार से 1 लाख रुपये तक का जुर्माना ठोक रहे हैं। संचालकों का कहना है कि महंगे डीजल, भारी टैक्स और बैंक की किस्तों के बीच इतना बड़ा जुर्माना भरना मुमकिन नहीं है।

‘हमने सब नियम माने, फिर भी प्रताड़ना क्यों?’ श्री शिवनाथजी ट्रेવल्स के हरिसिंग राजपूत ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, “सरकार ने जो कहा हमने वो किया। कैरियर हटा दिए, इमरजेंसी विंडो खोल दी, हथौड़ी और अग्नિशामक यंत्र लगा दिए। हम रोड टैक्स और डबल टैक्स भर रहे हैं, फिर भी हमें चोरों की तरह पकड़ा जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि अब फांसी खाने की नौबत आ गई है।”
2026 के नए नियम और पुरानी गाड़ियों का संकट बस मालिकों का कहना है कि उनकी गाड़ियाँ 2015-17 के नियमों के तहत बनी हैं और आरटीओ ने ही उन्हें पास किया था। अब 2026 के नए नियमों का हवाला देकर पुरानी गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन और फिटनेस रोका जा रहा है। संचालकों ने मांग की है कि जब तक नई गाड़ियाँ नहीं आतीं, तब तक पुरानी वैध गाड़ियों को चलने दिया जाए।
प्रमुख मांगें और चेतावनी:
- राजस्थान आरटीओ की अवैध वसूली और भारी चालान तुरंत बंद हों।
- पुरानी गाड़ियों का फिटनेस और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू की जाए।
- अन्य राज्यों (एमपी, महाराष्ट्र, कर्नाटक) के ऑपरेटर भी इस लड़ाई में साथ आएं।
- मांगें पूरी नहीं हुई तो संचालक बसों को सड़क पर खड़ा कर ‘भूख हड़ताल’ शुरू करेंगे।
मुसाफिरों की बढ़ी परेशानी: शादी के सीजन में फंसे लोग जोधपुर निवासी मुसाफिर બજરંગસિંહ રાજપુરોહિત ने बताया, “मारवाड़ के 8-10 जिलों जैसे जोधपुर, बाड़मेर, पाली और जालोर के लिए बस ही मुख्य साधन है। ट्रेनों में लंबी वेटिंग है और अब बसें बंद होने से आम आदमी पूरी तरह फंस गया है। शादियों का सीजन है और लोग वतन से कर्मभूमि तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।”
सूरत एपीएमसी ग्राउंड बना ‘बसों का डिपो’ वर्तमान में सूरत से राजस्थान जाने वाली लगभग 300 से 350 बसें और बाहर के अन्य राज्यों की 200 बसें इस हड़ताल के कारण बंद हैं। सूरत का एपीएमसी ग्राउंड बसों से खचाखच भर गया है। ऑपरेटरों का कहना है कि अगर सरकार की आंखें नहीं खुलीं, तो यह आंदोलन पूरे देश के बस ऑपरेटरों का ‘चक्काजाम’ बन जाएगा।



