दीन दयाल उपाध्याय अन्त्योदय संबल पखवाडा 2025" – जालेरा खुर्द, रानीवाड़ा की प्रेरक सफलता कहानी
राजस्थान सरकार की “दीन दयाल उपाध्याय अन्त्योदय संबल पखवाड़ा 2025” और 'रास्ता खोलो अभियान' ने प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में नई उम्मीद जगाई है। दशकों से लंबित समस्याओं का समाधान, सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ और प्रशासन की संवेदनशीलता—यह सब अब हकीकत बन रहा है। रानीवाड़ा तहसील के जालेरा खुर्द गांव की यह कहानी न सिर्फ प्रशासनिक इच्छाशक्ति का उदाहरण है, बल्कि ग्रामीणों के धैर्य, संघर्ष और सरकार के प्रति आभार का भी प्रतीक है। 15 वर्षों तक बंद रहा रास्ता खुलने से गांव में जो खुशी और राहत की लहर दौड़ी, वह हर उस ग्रामीण की आवाज है, जो वर्षों से अपने अधिकार के लिए दर-दर भटक रहा था।

जालेरा खुर्द गांव में एक मुख्य सार्वजनिक रास्ता, जो राजस्व रिकॉर्ड में 'गै०मु० रास्ता' के रूप में दर्ज था, पड़ोसी खातेदारों द्वारा पिछले 15 वर्षों से जबरन बंद कर दिया गया था। इस रास्ते के बंद होने से आगे के कई खातेदार और किसान अपने खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे थे, जिससे उनकी आजीविका और कृषि कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे थे।
- ग्रामीणों की पीड़ा:
लगातार 15 वर्षों तक ग्रामीणों को बारिश के मौसम में खेतों तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई बार प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन समाधान नहीं हुआ। रास्ता बंद होने से बच्चों की पढ़ाई, महिलाओं की आवाजाही और आपातकालीन स्थिति में भी गांव के लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। - सरकारी पहल और प्रशासनिक कार्रवाई:
“दीन दयाल उपाध्याय अन्त्योदय संबल पखवाड़ा 2025” के तहत 27 जून को जालेरा खुर्द में शिविर आयोजित किया गया। ग्रामीणों ने तहसीलदार रानीवाड़ा के समक्ष प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। राजस्थान काश्तकारी अधिनियम की धारा 251 के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया। प्रशासन ने दोनों पक्षों को सुनवाई का पूरा अवसर दिया और पुलिस की सहायता से राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज रास्ते को आमजन की उपस्थिति में खुलवाया गया। - अधिकारियों की भूमिका:
तहसीलदार हनवंतसिंह देवड़ा, ऑफिस कानूनगो ओमप्रकाश विश्नोई, पटवारी रविकुमार (जालेरा खुर्द), और पटवारी रामकरण मीणा (रतनपुर) की राजस्व टीम ने पुलिस के सहयोग से रास्ता खुलवाने की कार्रवाई पूरी की। इस दौरान ग्रामीणों की उपस्थिति ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी और विश्वासपूर्ण बनाया। - ग्रामीणों की खुशी और आभार:
रास्ता खुलते ही गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने राज्य सरकार, प्रशासन और अधिकारियों का आभार जताया। अब किसान अपने खेतों तक आसानी से पहुंच सकेंगे, बच्चों की पढ़ाई और महिलाओं की आवाजाही सुगम होगी, और गांव में विकास की नई राह खुलेगी।
सरकारी अभियान की व्यापकता और प्रभाव
- “दीन दयाल उपाध्याय अन्त्योदय संबल पखवाड़ा” के दौरान पूरे राजस्थान में रोजाना शिविर लगाकर लंबित मामलों का निस्तारण किया जा रहा है1।
- 'रास्ता खोलो अभियान' के तहत पिछले 7 महीनों में प्रदेशभर में 1,182 से अधिक बंद रास्ते खुलवाए जा चुके हैं, जिनमें कई रास्ते 40-50 साल से बंद थे23।
- प्रशासनिक स्तर पर उपखंड अधिकारी अभियान के प्रभारी बनकर साप्ताहिक समीक्षा कर रहे हैं, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो रही है3।
सीख और संदेश
- यह कहानी बताती है कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति, सही नीति और आमजन की सहभागिता से वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान संभव है।
- “दीन दयाल उपाध्याय अन्त्योदय संबल पखवाड़ा” और 'रास्ता खोलो अभियान' ने ग्रामीणों में सरकार और प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ाया है।
- यह सफलता कहानी पूरे राजस्थान के ग्रामीण इलाकों के लिए प्रेरणा है कि अधिकारों के लिए आवाज उठाएं, सरकार आपके साथ है।
जालेरा खुर्द की यह घटना न सिर्फ प्रशासनिक सफलता है, बल्कि सामाजिक बदलाव की मिसाल भी है। यह कहानी बताती है—जहां इच्छाशक्ति, संवेदनशीलता और जनभागीदारी हो, वहां वर्षों पुरानी समस्याएं भी हल हो सकती हैं।
दूसरी और खेत मालिक के पुत्र मसराराम रेबारी ने बताया की यह हमारा खातेदारी हक़ वाला खेत है, जो खरीदा हुआ है और गैर मुमकिन रास्ता नहीं है| हालाँकि, प्रशसन का कहना है की रास्ता गैर मुमकिन ही है| इसलिए नियमानुसार ही खोला गया है|







पाठक टिप्पणियां (Comments)
0 टिप्पणियां