रानीवाड़ा, (सर्कल न्यूज़ नेटवर्क)। अदम्य निष्ठा और संघ के प्रति समर्पण के प्रतीक, श्री क्षत्रिय युवक संघ के तृतीय संघप्रमुख श्रद्धेय नारायणसिंह रेड़ा की जयंती एवं पारिवारिक स्नेहमिलन समारोह आज खोडेश्वर महादेव मंदिर, जाविया में गरिमामय ढंग से आयोजित हुआ। यह अवसर केवल एक जयंती नहीं, अपितु संघ के आदर्शों और पारिवारिक सौहार्द की पुनरावृत्ति का पावन पर्व था।

संघ का अटूट संकल्प और पूज्य श्री का योगदान
समुद्र सिंह जाविया ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रत्येक वर्ष 30 जुलाई को पूज्य श्री की जयंती का कार्यक्रम विभिन्न प्रांतों में अलग-अलग स्थानों पर आयोजित होता है। इसी कड़ी में इस वर्ष जसवन्तपुरा मंडल के खोडेश्वर जी मंदिर को यह गौरव प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का संचालन कर रहे रेवन्तसिंह जाखड़ी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और संघ तथा पूज्य श्री के महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला।
संघ परिचय फुलसिंह जाखड़ी द्वारा विस्तृत रूप से प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने संघ की कार्यप्रणाली, वर्षभर लगने वाले शिविरों और शाखाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की।

संघ: एक पारिवारिक संकल्प
| श्री क्षत्रिय युवक संघ: एक दृष्टि |
| स्थापना: पूज्य श्री तनसिंह जी द्वारा |
| लक्ष्य: क्षत्रिय समाज में चरित्र निर्माण, संस्कारों का सिंचन और राष्ट्रीय भावना का विकास। |
| कार्यप्रणाली: नियमित शाखाएँ, प्रशिक्षण शिविर, सामाजिक सेवाएँ और पारिवारिक मिलन कार्यक्रम। |
| विशेषता: संघ को भौगोलिक सीमाओं से परे एक विशाल परिवार के रूप में संगठित करना। |
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प्रांत प्रमुख प्रवीणसिंह सुरावा ने श्रद्धेय नारायणसिंह रेड़ा के अतुलनीय समर्पण का स्मरण करते हुए कहा कि पूज्य श्री ने संघ को ही अपना सर्वस्व मान लिया था। संघ का कार्य सदैव उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहा। प्रवीणसिंह ने उन्हें पूज्य तनसिंह जी के 'हनुमान' की उपमा देते हुए बताया कि उनके कार्यकाल में यद्यपि संघ का भौतिक विस्तार अपेक्षाकृत कम हुआ, किंतु आंतरिक घनिष्ठता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई।
उन्होंने राजस्थान और गुजरात की भौगोलिक सीमाओं को तोड़कर संघ को एक विशाल पारिवारिक स्वरूप प्रदान किया। यही कारण है कि प्रत्येक वर्ष पूज्य श्री की जयंती को पारिवारिक स्नेहमिलन के रूप में मनाया जाता है। प्रवीणसिंह ने बताया कि पूज्य श्री ने दस वर्ष तक पूज्य तनसिंह जी के सानिध्य में और उसके पश्चात् दस वर्ष तक स्वतंत्र रूप से संघ का कुशल संचालन किया।
सामाजिक समरसता का अनुपम संगम
इस पावन अवसर पर रानीवाड़ा प्रांत के चारों मंडलों से बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएँ और बालिकाएँ उपस्थित रहीं। इनमें तेज सिंह, ईश्वर सिंह करड़ा, माधु सिंह, श्रवण सिंह, गणपतसिंह, सुरेंद्र सिंह भीखसिंह रतनपुर, प्रतापसिंह, गजेंद्र सिंह जाविया, महिपालसिंह वाडाभवजी, भगवतसिंह देरावरसिंह, राणसिंह उचमत, गणपतसिंह पुर, बहादुरसिंह, नरपतसिंह, महिपालसिंह पहाड़पुरा, वीरमसिंह सुरावा, मुकनसिंह, भरतसिंह चेकला, मनोहर सिंह बस्तवा, भगवतसिंह जाखड़ी, जसवन्तसिंह तेजावास जैसे प्रमुख लोग उपस्थित थे।
इसके अतिरिक्त, जाविया, चेकला, रतनपुर, जाखड़ी, सुरावा, सेवाड़ा, पहाड़पुरा आदि गाँवों से भी अनेकों महिलाएँ और बालिकाएँ इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बनीं, जिन्होंने संघ के प्रति अपनी अटूट आस्था का प्रदर्शन किया। यह आयोजन समाज में एकता, संस्कृति और संस्कारों के प्रति जागरूकता का संदेश देता है।







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