संयुक्त खाते की जंजीरें टूटीं, किसानों के चेहरे पर लौटी मुस्कान
रानीवाड़ा (जालोर)। कहते हैं कि सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटना किसी तपस्या से कम नहीं होता, खासकर जब मामला पुश्तैनी जमीन के बंटवारे का हो। वर्षों से चली आ रही फाइलों की धूल और पटवारी के दफ्तरों के अनगिनत फेरों से त्रस्त रानीवाड़ा के मालवाड़ा ग्राम पंचायत के किसानों को आखिरकार राहत की सांस नसीब हुई है। हाल ही में आयोजित 'ग्रामीण सेवा शिविर' ने वह कर दिखाया, जिसे पूरा होने में शायद अभी कई और साल लग जाते।

क्या थी असली समस्या?
ग्रामीण इलाकों में अक्सर जमीनें 'संयुक्त खातों' (Shared Khata) में दर्ज होती हैं। इसमें एक ही जमीन के टुकड़े पर परिवार के कई सदस्यों का नाम होता है। इस समस्या के कारण न तो कोई किसान अपनी जमीन पर अकेले बैंक से लोन ले सकता था, न ही सरकारी योजनाओं जैसे 'पीएम किसान सम्मान निधि' या 'फसल बीमा' का पूरा लाभ मिल पा रहा था। छोटी-छोटी गलतियों के लिए भी उन्हें पूरे परिवार के दस्तावेजों की जरूरत पड़ती थी। भीमसिंह जैसे दर्जनों किसान बरसों से तहसील और पंचायत के बीच फुटबॉल बने हुए थे।
शिविर बना 'न्याय का मंच'
प्रशासन द्वारा आयोजित इस विशेष ग्रामीण सेवा शिविर में जैसे ही भीमसिंह और उनके साथी काश्तकारों का मामला सामने आया, प्रशासन ने तत्परता दिखाई। मौके पर ही राजस्व अधिकारियों और संबंधित पटवारियों की टीम ने कागजी औपचारिकताएं पूरी कीं। बिना किसी लंबी सुनवाई के, सालों से लंबित पड़ी 'खसरा-खतौनी' की गुत्थी को सुलझाते हुए जमीन का विधिवत बंटवारा कर दिया गया।

अब नहीं लगाने पड़ेंगे दफ्तरों के चक्कर
मौके पर ही किसानों को उनकी अलग-अलग जमाबंदी के दस्तावेज सौंपे गए। अपने हाथों में अपनी जमीन की 'स्वतंत्र पहचान' लिए किसान भीमसिंह भावुक हो गए। उन्होंने बताया, "हमारा तो जैसे बोझ उतर गया। अब बैंक से खेती के लिए लोन लेना हो या सरकारी अनुदान, अब हमें किसी का मोहताज नहीं होना पड़ेगा। वर्षों का काम एक ही दिन में हो गया, यह किसी चमत्कार से कम नहीं है।"
प्रशासनिक सक्रियता की बानगी
इस समाधान के बाद ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। राजस्व अधिकारियों ने कहा कि सरकार की मंशा ही यही है कि 'प्रशासन गांवों के संग' चलकर जनता की समस्याओं का निपटारा करे। मालवाड़ा के इस शिविर ने साबित कर दिया है कि यदि नीयत साफ हो और तंत्र सक्रिय, तो जटिल से जटिल समस्या का समाधान भी चुटकियों में संभव है।
यह शिविर केवल जमीन बंटवारे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सैकड़ों किसानों के भविष्य को आर्थिक मजबूती और सुरक्षा का नया आधार प्रदान किया है।







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