जालोर। प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा पेश किए गए तीसरे बजट को लेकर सियासत गर्मा गई है। पूर्व जन अभियोग निराकरण समिति अध्यक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पुखराज पाराशर ने इस बजट को जालोर की जनता के साथ 'क्रूर मजाक' करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बजट विजन से पूरी तरह खाली है और इसमें केवल कागजी घोड़े दौड़ाए गए हैं।
जालोर के साथ 'सौतेला व्यवहार': बड़े प्रोजेक्ट्स ठंडे बस्ते में
पाराशर ने बजट की आलोचना करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती गहलोत सरकार ने जालोर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा था, लेकिन वर्तमान सरकार ने जिले की अनदेखी की है।
- अधूरे सपने: जालोर की मेडिकल कॉलेज, जवाई नदी पुनर्जीवन योजना और ट्रांसपोर्ट नगर जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर कोई ठोस प्रगति नहीं दिख रही है।
- कनेक्टिविटी पर प्रहार: रोहट-सांचौर फोरलेन मेगा हाईवे का जो सपना जनता को दिखाया गया था, वह इस बजट में भी अधूरा ही नजर आ रहा है।
- पेयजल संकट: जिले की सबसे बड़ी जरूरत सिंचाई और पेयजल योजनाओं को ठंडे बस्ते में डालकर जनता के हितों से समझौता किया गया है।
"मौलिक सोच का अभाव, केवल नाम बदलने की राजनीति"
पाराशर ने बजट को 'कॉपी-पेस्ट' बताते हुए कहा कि सरकार सवा दो साल बाद भी अपनी कोई नई सोच धरातल पर नहीं ला पाई है।
- नाम का फेरबदल: बजट में कई जगह पूर्ववर्ती गहलोत सरकार की शानदार योजनाओं के केवल नाम बदलकर उन्हें नए रूप में पेश किया गया है।
- राहत छीनने की तैयारी: गहलोत सरकार ने 100 यूनिट मुफ्त बिजली और 500 रुपये में सिलेंडर देकर जो राहत दी थी, उसे वर्तमान सरकार धीरे-धीरे खत्म करने की राह पर है।
युवाओं और कर्मचारियों के साथ 'छलावा'
कर्मचारियों और बेरोजगारों के मुद्दों पर भी पाराशर ने सरकार को जमकर आड़े हाथों लिया:
"8वें वेतन आयोग के नाम पर केवल कमेटी बनाना प्रदेश के लाखों कर्मचारियों के साथ धोखा है। युवाओं को रोजगार के नाम पर केवल आश्वासन मिले हैं, धरातल पर कुछ नहीं।"
विपक्ष का तीखा प्रहार: "जनता विज्ञापन नहीं, अधिकार मांगती है"
पाराशर ने अंत में कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार को याद रखना चाहिए कि जनता विज्ञापनों की चमक से नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और विकास से संतुष्ट होती है। उन्होंने इस बजट को विकास विरोधी और जालोर की उम्मीदों पर पानी फेरने वाला दस्तावेज बताया।







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