रानीवाड़ा, जालोर: स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल, रानीवाड़ा में आज शिक्षा के एक नए अध्याय की शुरुआत हुई, जहाँ एक ऐतिहासिक एस डी एम सी (स्कूल विकास और प्रबंधन समिति) का गठन किया गया। यह बैठक सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि एक ऐसी पहल थी जो साबित करती है कि शिक्षा एक सामूहिक जिम्मेदारी है। स्कूल प्रबंधन, अभिभावक और समुदाय ने मिलकर छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की राह बनाई। यह एक ऐसा कदम है जो बताता है कि जब सब मिलकर काम करते हैं, तो कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती।
शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य:
विद्यालय के प्रधानाचार्य महेंद्र कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक की शुरुआत सचिव भूरसिंह मीना के अभिनंदन के साथ हुई, जिन्होंने सभी अभिभावकों को अपने विचार और सुझाव रखने के लिए आमंत्रित किया। बैठक का सबसे बड़ा उद्देश्य छात्रों के शैक्षिक और सह-शैक्षिक विकास पर खुलकर बात करना था। प्रधानाचार्य ने इस बात पर जोर दिया कि सिर्फ किताबों का ज्ञान ही काफी नहीं है, बल्कि छात्रों का समग्र विकास जरूरी है। खेल, कला, संगीत और अन्य गतिविधियों के जरिए उनमें छिपी प्रतिभाओं को बाहर लाना ही असली शिक्षा है।


अभिभावकों के 'दमदार' सुझाव:
बैठक में अभिभावकों ने अपनी बेबाक राय रखी। प्रवीण कुमार ने कहा कि विद्यालय और घर पर बोलचाल में अंग्रेजी भाषा का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग किया जाना चाहिए। वहीं, पुरेश पटेल ने कहा कि खेलकूद में बच्चे बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं और मॉडल स्कूल का नाम रोशन कर जिले में अपनी धाक जमा रखी है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षकों के साथ-साथ अभिभावकों को भी शैक्षिक गुणवत्ता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। पुरेश पटेल ने महिला अध्यापिका की कमी को एक गंभीर विषय बताया और इसके लिए जनप्रतिनिधियों और विधायक के माध्यम से सरकार तक बात पहुंचाने की बात कही।

गुमान सिंह राव ने कहा कि रानीवाड़ा के लोग भाग्यशाली हैं कि पूरे जालोर जिले में सीबीएसई पैटर्न की अंग्रेजी माध्यम, स्मार्ट क्लासरूम और अच्छी सुविधाओं वाली गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क शिक्षा सिर्फ मॉडल स्कूल में मिल रही है। उन्होंने क्षेत्र के जनप्रतिनिधि को धन्यवाद दिया, जिन्होंने रानीवाड़ा में इस स्कूल की नींव रखी। उन्होंने अध्यापकों की कमी पर भी चिंता जताते हुए कहा कि पूर्व की तरह समय-समय पर साक्षात्कार आयोजित किए जाने चाहिए ताकि मॉडल स्कूलों को शिक्षकों की कमी का सामना न करना पड़े।
अध्यापक अभिभावक परिषद के अध्यक्ष करनाराम देवासी ने कहा कि मोबाइल से दूरी बनाए रखनी चाहिए और इसके लिए अभिभावकों को भी बच्चों के सामने मोबाइल का कम से कम उपयोग करना चाहिए। धनराज मीणा ने सुझाव दिया कि जिला और राज्य स्तरीय खिलाड़ियों के साथ महिला अध्यापिका को भी साथ भेजा जाना चाहिए।

एक बेहतर समाज का निर्माण:
प्रधानाचार्य महेंद्र कुमार ने सभी सुझावों पर संतुष्टि जाहिर करते हुए कहा कि यह विद्यालय अंग्रेजी माध्यम का स्कूल है और विद्यार्थियों को नियमित रूप से विद्यालय भेजकर और घर पर पढ़ने के लिए प्रेरित करके ही बेहतर शैक्षिक वातावरण बनाया जा सकता है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि बच्चों के साथ उनके शिक्षकों और विद्यालय के बारे में बातचीत करें ताकि उनमें शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके।
सचिव भूरसिंह मीणा ने सर्वसम्मति से गठित हुई नई एसडीएमसी के सदस्यों के नाम की घोषणा की, जिसमें गंगाराम, करनाराम, पिंकी देवी लखारा, इंदिरा सेन, राजेंद्र कुमार सुथार, गोविंद रावल, सुखदेव सिंह, श्रवण कुमार, विजय राज जैन, रेखा देवी, दिनेश कुमार, विज्ञान प्रतिनिधि रमेश कुमार पांचाल, सामाजिक विज्ञान प्रतिनिधि मुकेश कुमार गुर्जर, विधायक प्रतिनिधि गुमान सिंह राव और अंबालाल चितारा शामिल हैं।

बैठक के अंत में, राज्य स्तर पर चयनित खिलाड़ियों का जोरदार स्वागत किया गया और उन्हें माला पहनाकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर नेतराम मीणा, बगदाराम सौलंकी, लक्ष्मण राम चौहान, रोहित कुमार, चेतन दान, योगेश कुमार, निशार खान, हंजारी मल, कृष्ण कुमार पुरोहित, भंवर सिंह धानोल, नंदकिशोर जीनगर, जयंती लाल, मुकेश कुमार मीणा, खेमाराम, गोविंद कुमार, हुसैन खान, हरीश कुमार, हरि प्रकाश, जितेंद्र कुमार, राजेंद्र कुमार, अजवाराम, भगवान सिंह, पोपटलाल, हरजीराम, नंदकिशोर जीनगर, सिकंदर अली, महेंद्र बशीर खान, लालाराम, इंदिरा, गीता देवी, पिंकी देवी और कई अन्य अभिभावक मौजूद रहे।
यह खबर सर्कल न्यूज़ नेटवर्क द्वारा प्रकाशित की गई है।







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