सर्कल न्यूज नेटवर्क, जालोर। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल सुरक्षा को मजबूत करने और जल क्षेत्र में सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने की दिशा में आज एक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी आर पाटिल की गरिमामयी उपस्थिति में दशकों पुराना नर्मदा अवॉर्ड का लंबित भुगतान विवाद हमेशा- हमेशा के लिए सुलझ गया। इस बेहद महत्वपूर्ण और बड़े फैसले पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने एक साथ बैठकर समझौते पर हस्ताक्षर किए। दशकों पुराने इस विवाद का समाधान अब ‘वन-टाइम सेटलमेंट’ यानी एकमुश्त निपटान के रूप में कर दिया गया है, जिससे चारों राज्यों के आपसी रिश्ते मजबूत होने के साथ-साथ विकास की रफ्तार को नए पंख लगेंगे।
डबल इंजन सरकार से सुलझ रहे दशकों पुराने विवाद इस ऐतिहासिक समझौते के मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में देश के अलग-अलग राज्यों में डबल इंजन की सरकारें बनने का यह सबसे बड़ा लाभ हुआ है कि हम सभी में एक-दूसरे को समझने की क्षमता और सरोकार बढ़े हैं, जिससे राजनीतिक मुद्दे पूरी तरह गौण हो गए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पानी का उपयोग चाहे देश के किसी भी हिस्से में हो, उससे लाभान्वित होने वाला हर व्यक्ति एक भारतीय ही है। गृह मंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि किसी भी अंतर-राज्यीय विवाद से सिर्फ राष्ट्रीय नुकसान होता है, इसलिए पड़ोसी राज्यों को समृद्ध बनाने की सोच के साथ कदम बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि हाल ही में हरियाणा और राजस्थान के बीच का पुराना जल विवाद भी सुलझाया गया है और ये सभी कदम सहकारी संघवाद के स्वर्णिम उदाहरण हैं।
मरूधरा को मिला बड़ा संबल: किसानों की चमकेगी किस्मत इस समझौते और सरदार सरोवर परियोजना की सफलता का सबसे बड़ा और सीधा असर हमारी मरूधरा राजस्थान पर देखने को मिल रहा है। इस संबंध में गृह मंत्री अमित शाह ने राजस्थान का विशेष जिक्र करते हुए कहा कि रेगिस्तानी इलाके राजस्थान को मिला लाभ दिखने में भले ही छोटा लगे, लेकिन हकीकत यह है कि जिस बंजर भूमि तक मां नर्मदा का नीर पहुंचा है, वहां आज भूमि का मूल्य और अन्नदाता किसान की किस्मत दोनों पूरी तरह बदल चुकी है। इस समझौते से राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों विशेषकर जालोर, सांचौर और बाड़मेर के उन हजारों किसानों को बहुत बड़ा संबल मिलेगा, जिनकी सिंचाई और पीने के पानी की उम्मीदें इस परियोजना से जुड़ी हैं। बकाया भुगतानों के इस स्थाई निपटारे से अब क्षेत्र में पानी की सुचारू आपूर्ति और नहरों के सुदृढ़ीकरण के कार्यों में और तेजी आएगी, जिससे आने वाले समय में मरूधरा के खेतों में और अधिक हरियाली और खुशहाली नजर आएगी।



