जालोर। विश्व बालश्रम निषेध दिवस के मौके पर जालोर में एक मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया, जब एक स्वीट्स रेस्टोरेंट में नाबालिग से जबरन मजदूरी करवाई जा रही थी।
पुलिस महानिरीक्षक विकासकुमार, जोधपुर रेंज द्वारा बालश्रम और बंधुआ मजदूरी के खिलाफ चलाए जा रहे "अभियान उमंग-A" के अंतर्गत, जिला पुलिस अधीक्षक ज्ञानचंद यादव के निर्देशन में मानव तस्करी विरोधी यूनिट ने यह कार्रवाई की।
टीम प्रभारी इन्द्राज सिंह के नेतृत्व में की गई गश्त के दौरान, जालोर कस्बे के तिलक द्वार क्षेत्र स्थित राजभोग स्वीट्स रेस्टोरेंट में कार्यरत एक नाबालिग बालक – भोमाराम पुत्र गोकलाराम, निवासी रोडवा खुर्द (थाना मंडली, जिला बालोतरा) को मुक्त करवाया गया। पूछताछ में बालक ने बताया कि होटल मालिक ने उसकी मर्जी के खिलाफ उसे बालश्रम में लगाया था।
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि होटल मालिक तेजाराम पुत्र रामूराम (निवासी रोडवा खुर्द, बालोतरा) द्वारा नाबालिग से न केवल मजदूरी करवाई जा रही थी, बल्कि बच्चों की देखरेख और सुरक्षा के लिए कोई अनुमति या लाइसेंस भी प्राप्त नहीं था।
इस गैरकानूनी कृत्य पर आरोपी के विरुद्ध धारा 146 बीएनएस, 79 किशोर न्याय अधिनियम 2015, व 3/14 बाल श्रम निषेध अधिनियम 1986 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। बालक को मुक्त कर संरक्षण में लेकर जिला बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
मानव तस्करी विरोधी सेल की टीम में सरिता मकान, मीना मकान और चालक टोयाराम की भूमिका भी उल्लेखनीय रही।
जालोर संवाददाता
“हर बचपन सुरक्षित हो, यही है असली विकास की नींव।”







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