रानीवाड़ा। खेल में प्रतिभा और मेहनत के बजाय भेदभाव और मनमानी का आरोप सामने आया है। रानीवाड़ा के दांतवाड़ा स्कूल के होनहार खिलाड़ी जगदीश कुमार का चयन जानबूझकर रोक दिया गया, जबकि वह राज्य स्तरीय वॉलीबॉल टीम के लिए चुने जाने के योग्य थे। प्रशिक्षण के बाद अंतिम चयन में उनके साथ हुए इस अन्याय को लेकर उनके पिता ने सीधे तौर पर चयन समिति पर सवाल उठाए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
दांतवाड़ा स्थित पीएमश्री स्कूल की टीम ने जिला स्तरीय प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए उपविजेता का खिताब जीता था। टीम के तीन प्रमुख खिलाड़ी जगदीश कुमार, हितेश कुमार और विजेष कुमार को राज्य स्तरीय प्रशिक्षण के लिए हापु की ढाणी बुलाया गया था। पांच दिन तक चली इस ट्रेनिंग में तीनों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। लेकिन, जब अंतिम चयन की घोषणा हुई, तो जगदीश का नाम सूची से गायब था, जबकि उसके साथी खिलाड़ियों का चयन हो गया। गौर करने वाली बात यह रही कि जगदीश देवासी मैन ऑफ मैंच और बेस्ट प्लेयर रहा।

प्रशिक्षक ठाकराराम ने जगदीश का चयन न करने का कारण बताया कि वह दो दिन नहीं खेला, इसलिए दूसरे खिलाड़ी विजेश का चयन किया गया। हालांकि, जगदीश के पिता ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनका बेटा पूरे पांच दिन प्रशिक्षण में मौजूद था और उसने शानदार प्रदर्शन भी किया था। उनका कहना है कि यह मनमानी और भेदभाव का मामला है, जिसमें जगदीश की मेहनत को नजरअंदाज किया गया है।
इस अन्याय से आहत होकर जगदीश और उनके पिता लीलाराम ने पीएमश्री स्कूल दांतवाड़ा आईदानाराम और जालोर पहुंचकर डीईओ जालोर भंवरलाल परमार को एक परिवाद पेश किया है, जिसमें उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग की है। डीईओ जालोर, परमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा है कि उन्हें परिवाद मिल गया है और जांच के बाद दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर खेल चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब तक मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक जगदीश जैसे कई उभरते खिलाड़ियों के मन में यह आशंका बनी रहेगी कि कहीं उनकी मेहनत पर भेदभाव की काली छाया न पड़ जाए। यह देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितना सख्त रुख अपनाता है ताकि भविष्य में किसी भी खिलाड़ी के साथ ऐसा अन्याय न हो।







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