न्यायिक मजिस्ट्रेट मदनसिंह चौधरी की अध्यक्षता में गठित बैंच ने किया प्रकरणों का निस्तारण; बैंक ऋण और विद्युत विभाग से जुड़े मामलों का मौके पर हुआ समाधान।
लोक अदालत की भावना से मिली राहत
रानीवाड़ा। राजस्थान विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में जिला विधिक सेवा समिति, जालोर के अध्यक्ष एवं जिला व सेशन न्यायाधीश कमल छंगाणी के निर्देशानुसार शनिवार को तालुका विधिक सेवा समिति, रानीवाड़ा द्वारा न्यायालय परिसर में 'प्रथम राष्ट्रीय लोक अदालत' का आयोजन किया गया। इस अवसर पर लोक अदालत की भावना से प्रेरित होकर पक्षकारों ने लंबे समय से चले आ रहे विवादों को आपसी समझाइश से समाप्त किया।

समझाइश से समाधान की प्रक्रिया बैंच के अध्यक्ष एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट मदनसिंह चौधरी ने लोक अदालत में आए फरीकों को इस मंच के लाभों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि लोक अदालत के माध्यम से होने वाले निस्तारण से न केवल समय और धन की बचत होती है, बल्कि आपसी कटुता भी समाप्त होती है। लंबित राजीनामा योग्य फौजदारी, सिविल और प्री-लिटिगेशन प्रकरणों के निस्तारण हेतु विशेष बैंच का गठन किया गया था।

इन अधिकारियों ने निभाई मुख्य भूमिका प्रकरणों की सुनवाई और समझाइश के लिए गठित बैंच में अध्यक्ष मदनसिंह चौधरी (RJS) के साथ सदस्य के रूप में उपखंड अधिकारी सुनील कुमार और अधिवक्ता जानू प्रशांत शामिल रहे। इस टीम ने बैंक ऋण संबंधी प्री-लिटिगेशन मामलों और अन्य दीवानी-फौजदारी प्रकरणों में पक्षकारों के बीच सफल मध्यस्थता करवाई।
विभागीय सहयोग और सक्रियता लोक अदालत के दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। इसमें विद्युत विभाग के अधिशाषी अभियंता भरत देवड़ा, एएओ प्रदीप चौहान, बीएसएनएल के हंसराज मीणा, राजस्थान ग्रामीण बैंक के शाखा प्रबंधक सुरज भान सिंह, योगेश कुमार मीणा, नाथूराम सैन, मुकेश कुमार, चंदुलाल भील और फौजाराम परिहार शामिल रहे। न्यायिक कार्यों में कर्मचारी जावेद खान, हरेश कुमार, रीतिका चौहान और करणसिंह ने सहयोग प्रदान किया।







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