रानीवाड़ा बाईपास पर डॉ. गणपत लाल चौधरी ने लक्ष्मी देवी के घर दी दस्तक; ममता कार्ड खंगाला, नियमित दवा, खान-पान व पूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित कराने के लिए आशा कार्यकर्ता को किया पाबंद
क्षेत्र में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने और सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार (4 अगस्त 2026) को खण्ड मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (BCMO) डॉ. गणपत लाल चौधरी ने रानीवाड़ा बाईपास स्थित पीराराम लोहारू की ढाणी का दौरा कर 'हाई रिस्क प्रेग्नेंसी' (उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था) श्रेणी में चिह्नित गर्भवती महिला लक्ष्मी देवी के निवास पर होम विजिट की।
विजिट के दौरान डॉ. चौधरी ने महिला के 'ममता कार्ड' की गहन जांच की। उन्होंने अब तक हुए टीकाकरण की स्थिति, प्रसव पूर्व (ANC) जांचों के रिकॉर्ड और अन्य आवश्यक लैब टेस्ट की रिपोर्ट देखी। महिला को गर्भावस्था के दौरान समय पर दवाइयां लेने, संतुलित व पौष्टिक खान-पान अपनाने तथा संस्थागत प्रसव (अस्पताल में डिलीवरी) कराने के प्रति जागरूक किया गया।
लापरवाही न बरतने के सख्त निर्देश
डॉ. चौधरी ने मौके पर मौजूद स्थानीय आशा कार्यकर्ता को पाबंद किया कि वे महिला की नियमित विजिट (Home Visit) करें और स्वास्थ्य में जरा सा भी बदलाव दिखने पर तुरंत उच्च केंद्र को सूचित करें। इस दौरान उपस्थित परिजनों को भी पूर्ण टीकाकरण और सही देखभाल का महत्व समझाते हुए प्रेरित किया गया। निरीक्षण टीम में गोविन्द परिहार (बीएचएस) और इकरामुद्दीन (बीएसएस) के साथ आशा कार्यकर्ता सरस्वती भी उपस्थित रहीं।
1. गर्भवती हाई रिस्क (High Risk Pregnancy) क्या होता है?
जब किसी गर्भवती महिला या उसके होने वाले बच्चे को सामान्य की तुलना में स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं का खतरा अधिक होता है, तो उसे 'हाई रिस्क प्रेग्नेंसी' माना जाता है। इसके मुख्य कारण हो सकते हैं:
- हीमोग्लोबिन की भारी कमी (गंभीर एनीमिया)
- उच्च रक्तचाप (High BP) या डायबिटीज (शर्करा)
- महिला की आयु बहुत कम (18 वर्ष से कम) या अधिक (35 वर्ष से अधिक) होना
- पहले हुए प्रसव में कोई गंभीर जटिलता रही हो या जुड़वां बच्चे हों
2. क्या यह कोई अभियान है?
जी हां, हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान और देखभाल के लिए केंद्र व राज्य सरकार द्वारा विशेष अभियान चलाए जाते हैं:
- प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA): इसके तहत हर माह की 9 तारीख (और विस्तारित सत्रों) को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं, विशेषकर हाई रिस्क महिलाओं की निशुल्क जांच, 'रेड स्टीकर' से पहचान और फॉलो-अप किया जाता है।
- राजस्थान में विशेष अभियान (जैसे 'आंचल अभियान'): राज्य के विभिन्न जिलों में गर्भवती महिलाओं में खून की कमी दूर करने, हाई रिस्क मामलों की ट्रैकिंग करने और सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने के लिए विशेष मातृत्व स्वास्थ्य अभियान चलाए जाते हैं।







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