शताब्दी वर्ष में 'व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण' का महासंकल्प; स्वयंसेवकों के कदमताल से गूंजा आदर्श विद्या मंदिर का प्रांगण
सुबह 4 से रात 10:10 बजे की कठोर दिनचर्या से तपे शिक्षार्थी, मंच पर नियमबद्धता की अनूठी मिसाल—अतिथियों के लिए सजीं सिर्फ 5 कुर्सियां, सांसद-विधायक सब बैठे नीचे
भीनमाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जोधपुर प्रांत के संघ शिक्षा वर्ग-2026 का प्रकट समापन समारोह शुक्रवार, 05 जून (द्वितीय ज्येष्ठ कृष्ण पंचमी) को रानीवाड़ा मार्ग स्थित आदर्श विद्या मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान में अत्यंत गरिमामय और राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत माहौल में संपन्न हुआ। संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित इस वर्ग के समापन समारोह में स्वयंसेवकों के अनुशासन, समता, योग, व्यायाम और घोष (बैंड) के गगनभेदी स्वरों ने उपस्थित जनसमुदाय में राष्ट्रभाव का अभूतपूर्व ज्वार पैदा कर दिया।
इस ऐतिहासिक अवसर पर समूचा परिसर भगवा ध्वज की छांव में 'संघे शक्ति कलियुगे' और 'व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण' के संकल्पों से गुंजायमान रहा।

तपोभूमि सा सानिध्य और सैन्य शौर्य का संगम
समारोह में मंच को श्री ललिता त्रिपुर सुंदरी शिवासन भाखरी (जालमपुरा) के श्रद्धेय संत श्री सुमन सुलभ ब्रह्मचारीजी महाराज का दिव्य सानिध्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेना मेडल से सम्मानित जांबाज सैनिक कर्नल श्री शंभूसिंहजी देवड़ा रहे, जिन्होंने स्वयंसेवकों में सैन्य अनुशासन और राष्ट्र रक्षा का जज्बा भरा। मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य श्री हनुमानसिंहजी सहित रामधनजी बिश्नोई सर्वाधिकारी और डॉक्टर किशनलाल जी जोशी, भीनमाल जिला संघचालक ने उपस्थित स्वयंसेवकों और प्रबुद्ध समाज को पाथेय प्रदान किया।

नियमों की अनूठी मिसाल: अनुशासन की पराकाष्ठा का जीवंत उदाहरण कार्यक्रम के मंच पर देखने को मिला। संघ के कड़े और समतावादी नियमों के अनुसार मंच पर मात्र 5 कुर्सियां ही लगाई गई थीं, जिन पर संत, मुख्य अतिथि, मुख्य वक्ता और वर्ग के पदाधिकारी आसीन थे। राजनीति और समाज के कई बड़े चेहरे और वीआईपी नीचे दर्शकों के लिए लगी साधारण कुर्सियों पर पूरी सहजता और सेवाभाव के साथ बैठे नजर आए।

आपातकाल और कोविड को छोड़ कभी नहीं थमी वर्ग की परंपरा: मुख्य वक्ता
मुख्य वक्ता श्री हनुमानसिंहजी ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में संघ शिक्षा वर्ग के गौरवशाली इतिहास को रेखांकित करते हुए कहा—
"संघ के काम को अगर वास्तव में समझना है, तो संघ में आकर देखिए और यहां रहकर अनुभव कीजिए। वर्ष 1927 में पूजनीय डॉक्टर साहब ने पहले शिक्षा वर्ग (कैंप) की शुरुआत की थी। तब से लेकर आज तक, देश में सिर्फ आपातकाल (इमरजेंसी) और कोविड महामारी के संकट काल को छोड़कर यह वैचारिक और शारीरिक प्रशिक्षण का महाकुंभ कभी नहीं रुका।"

उन्होंने देशव्यापी आंकड़े साझा करते हुए बताया कि वर्तमान में पूरे देश में 77 स्थानों पर और अकेले राजस्थान में 14 जगहों पर संघ शिक्षा वर्ग चल रहे हैं, जिनमें करीब 20 हजार स्वयंसेवक कड़ा प्रशिक्षण ले रहे हैं। अकेले राजस्थान में इस समय 11 हजार से अधिक दैनिक शाखाएं लग रही हैं, जो व्यक्ति निर्माण की अविरल फैक्ट्रियां हैं।
लक्ष्य: हर गांव में संस्कार पाठशाला और समाज का जागरण
मुख्य वक्ता ने शताब्दी वर्ष के लक्ष्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संघ का उद्देश्य हर व्यक्ति को स्वयंसेवक बनाना नहीं, बल्कि पूरे हिंदू समाज को जागृत करना है। उन्होंने प्रत्येक गांव में संस्कार पाठशाला, व्यायामशाला स्थापित करने और हर वर्ष ग्राम स्तर पर उत्सव मनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। शताब्दी वर्ष के दौरान व्यापक गृह संपर्क अभियान के तहत हर विचारधारा के व्यक्ति तक पहुंच बनाई गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी व्यक्ति तन, मन और धन से राष्ट्र हित के लिए समर्पित है, वही वास्तव में संघ का कार्य कर रहा है।
उन्होंने वर्ग से प्रशिक्षण पाकर लौट रहे शिक्षार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी दैनिक दिनचर्या में उच्च चरित्र का परिचय दें। यहां सीखी गई दक्षता, संगठन कौशल और ज्ञान को अपने क्षेत्र के नागरिकों के साथ साझा करें तथा अधिक जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें।
सुबह 4 से रात 10:10 तक की कठिन तपस्या
संघ शिक्षा वर्ग केवल एक शिविर नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के शिल्पकारों को गढ़ने वाली कार्यशाला है। शिक्षार्थियों ने भीषण गर्मी के बावजूद सुबह 4:00 बजे जागरण से लेकर रात्रि 10:10 बजे दीप-निर्वाण तक की अत्यंत कठोर, समयबद्ध और अनुशासित दिनचर्या का पालन किया। इस अभ्यास वर्ग के दौरान स्वयंसेवकों को शारीरिक सुदृढ़ता के लिए लाठी, नियुद्ध (जूडो-कराटे), समता, योग और व्यायाम का अभ्यास कराया गया, तो वहीं बौद्धिक सत्रों में राष्ट्र, संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और स्वावलंबन के वैचारिक संस्कार बोए गए।
प्रकट कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत ध्वजारोहण और संघ की प्रार्थना "नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे" के साथ हुई। इसके बाद शिक्षार्थियों ने सामूहिक रूप से योगासन, अद्भुत शारीरिक विन्यास और घोष की धुन पर कदमताल का प्रदर्शन कर भीनमालवासियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
गौरवमयी उपस्थिति से गरिमांवित हुआ भीनमाल
शताब्दी वर्ष के इस भव्य प्रकट उत्सव के साक्षी बनने के लिए क्षेत्र के कई गणमान्य जनप्रतिनिधि, सामाजिक पदाधिकारी और राष्ट्रभक्त नागरिक उपस्थित रहे।
साधारण स्वयंसेवकों की भांति नीचे बैठक व्यवस्था में बैठकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने वालों में प्रमुख रूप से:
- लुम्बाराम चौधरी (सांसद, जालोर-सिरोही)
- जसराज राजपुरोहित (भाजपा जिलाध्यक्ष)
- छगन सिंह राजपुरोहित (विधायक, आहोर)
- नारायण सिंह देवल (पूर्व विधायक, रानीवाड़ा)
- दानाराम चौधरी (वरिष्ठ नेता)
- श्रवण सिंह राव (पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष)
- मुकेश खंडेलवाल (जिला उपाध्यक्ष)
- सांवल सिंह लोल
- जोरावर सिंह राव
- गिरधारी देवासी
- ओमप्रकाश
- शंकर सिंह सहित सैकड़ों प्रबुद्ध नागरिक, मातृशक्ति और स्वयंसेवक उपस्थित थे।
यह संपूर्ण समारोह भारत के उज्ज्वल और वैभवशाली भविष्य के निर्माण में समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी भूमिका तय करने की प्रेरणा दे गया।







पाठक टिप्पणियां (Comments)
0 टिप्पणियां