रेवदर (सिरोही)। सीमावर्ती जिलों जैसलमेर, सिरोही और जोधपुर से आई तीन गर्भवती महिलाओं को जिस हाल में बड़े शहरों के विशेषज्ञों ने सिजेरियन ऑपरेशन की सलाह देकर वापस भेज दिया, उन्हीं मामलों में रेवदर के भारती हॉस्पिटल एंड सोनोग्राफी सेंटर की टीम ने चुनौती को स्वीकार कर सामान्य प्रसव करवा कर चिकित्सा क्षेत्र में एक मिसाल कायम की। महज़ एक ही दिन में तीन अलग-अलग जिलों से आई महिलाओं को सामान्य डिलीवरी के जरिए स्वस्थ संतान की सौगात देकर अस्पताल ने न सिर्फ जज़्बा दिखाया बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी उन्नत स्त्री रोग उपचार की संभावनाएं उजागर की हैं।

घंटियाली (जैसलमेर) से आई गुड्डी कुंवर को जोधपुर के विशेषज्ञों ने दिया था ऑपरेशन का सुझाव
घंटियाली निवासी गुड्डी कुंवर पत्नी सांग सिंह भाटी को पोखरण के एक वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ ने जोधपुर रैफर किया था। जोधपुर पहुंचने पर भी डॉक्टरों ने सिजेरियन को ही विकल्प बताया, परिजनों को ऑपरेशन से बचना था। ऐसे में किसी रिश्तेदार की सलाह पर गुड्डी को रेवदर स्थित भारती हॉस्पिटल लाया गया। यहां चिकित्सकों ने स्थिति का मूल्यांकन कर कुछ ही समय में बिना किसी ऑपरेशन के सामान्य प्रसव करवा दिया।

सिरोही की सुंदर चौधरी को बताया गया था एमरजेंसी केस, रेवदर में हुआ सामान्य प्रसव
सिरोही जिले की भारजा निवासी सुंदर प्रभुराम चौधरी को आबूरोड के एक बड़े निजी अस्पताल में दिखाया गया था। जांच में बीपी हाई, एमनियोटिक फ्लूइड कम और प्लेसेंटा से खून की सप्लाई बाधित बताई गई, जिसे चिकित्सकों ने तत्काल सिजेरियन केस घोषित किया। परिजनों की अनिच्छा को देखते हुए एक एलआईसी अधिकारी के सुझाव पर वे रेवदर के भारती हॉस्पिटल पहुंचे, जहां अनुभवी डॉक्टरों की टीम ने बिना चीरा-टांका के सामान्य डिलीवरी करवाकर मरीज व परिवार को बड़ी राहत दी।
पहले से सिजेरियन केस जोधपुर की अरुणा दाधीच का भी हुआ सामान्य प्रसव
जोधपुर जिले के खेजड़ली की अरुणा पारसाराम दाधीच की पहली डिलीवरी फलौदी में सिजेरियन से हो चुकी थी। इस बार गर्भ में उल्टा बच्चा होने के कारण जोधपुर और फलौदी के डॉक्टरों ने सिजेरियन अनिवार्य बताया। थक-हारकर जब परिवार रेवदर के भारती हॉस्पिटल पहुंचा तो वहां के डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए सामान्य प्रसव की प्रक्रिया अपनाई और सफल डिलीवरी करवाई।

गांवों से शहरों की भागदौड़ में बदलाव का संकेत
भारती हॉस्पिटल रेवदर ने इन तीनों मामलों में यह सिद्ध किया है कि यदि विशेषज्ञता और मानवीय दृष्टिकोण हो तो जटिल से जटिल प्रसव भी बिना सर्जरी के संभव हैं। सीमावर्ती इलाकों की यह उपलब्धि न केवल चिकित्सा क्षेत्र का आत्मविश्वास बढ़ाती है बल्कि ग्रामीण महिलाओं को ऑपरेशन की अनावश्यक दौड़ से भी बचाती है।



