DRI का बड़ा एक्शन: गांधीधाम का मास्टरमाइंड परवेज कादरी गिरफ्तार; महंगी विदेशी सिगरेट की जगह सस्ती भारतीय सिगरेट भरकर एक्सपोर्ट दिखाने की थी चाल
सर्कल न्यूज़ नेटवर्क भुज/गांधीधाम/कोलकाता। राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) की गांधीधाम इकाई ने गुजरात से लेकर पश्चिम बंगाल तक फैले सिगरेट तस्करी के एक अंतरराज्यीय रैकेट का पर्दाफाश किया है। तस्करों ने मुंद्रा पोर्ट से आयातित 12 करोड़ रुपये की महंगी विदेशी सिगरेट को भारत के बाहर निर्यात दिखाने के बजाय चालाकी से भारतीय बाजार में खपा दिया और सरकार को करोड़ों रुपये की कस्टम ड्यूटी का चूना लगाया।
DRI का ऑपरेशन: कैसे खुला राज? डीआरआई (DRI) को पुख्ता सूचना मिली थी कि गांधीधाम मूल के आयातक परवेज कादरी ने मलेशिया से मुंद्रा पोर्ट पर विदेशी ब्रांड्स—जैसे गुडांग गरम (Gudang Garam), एसे गोल्ड (Esse Gold) और एसे लाइट—की करीब 60 लाख सिगरेट स्टिक मंगवाई हैं, जिनकी बाजार कीमत 12 करोड़ रुपये है। इस खेप को नियमानुसार निर्यात के लिए कोलकाता के 'फाल्टा स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन' (SEZ) स्थित 'वेस्ट बैंगलोर वेयरहाउसिंग' ले जाया गया था।

तस्करों का 'मास्टरप्लान':
- चरण 1: महंगी विदेशी सिगरेट को SEZ से बाहर निकालकर अवैध रूप से भारतीय बाजार में बेच दिया गया, क्योंकि इन पर 110% से अधिक कस्टम ड्यूटी लगती है।
- चरण 2: कागजों में निर्यात (Export) दिखाने के लिए, असली माल की जगह 7.5 करोड़ रुपये कीमत की 56.20 लाख सस्ती भारतीय सिगरेट का जखीरा तैयार किया गया, जिसे बांग्लादेश भेजा जाना था।
डीआरआई की रेड और गिरफ्तारी इससे पहले कि तस्कर अपनी योजना के दूसरे चरण को अंजाम दे पाते, डीआरआई ने कोलकाता के SEZ स्थित वेयरहाउस पर छापा मार दिया। हालांकि, तब तक असली विदेशी सिगरेट वहां से गायब हो चुकी थीं, लेकिन उनकी जगह निर्यात के लिए रखी गई सस्ती भारतीय सिगरेट का जखीरा टीम के हाथ लग गया। इस पूरे खेल में सरकार को करीब 5.32 करोड़ रुपये की कस्टम ड्यूटी का नुकसान हुआ है।
एजेंसी को लंबे समय से चकमा दे रहे मास्टरमाइंड परवेज कादरी को आखिरकार डीआरआई ने दबोच लिया है। उसे आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए कोलकाता ले जाया गया है।
कई कंपनियां सिर्फ कागजों पर! डीआरआई की प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि इस रैकेट में शामिल कई सप्लायर कंपनियां केवल कागजों पर ही अस्तित्व में थीं। फिलहाल, एजेंसी इस मामले में ट्रांसपोर्टर्स की भूमिका, SEZ के सुरक्षाकर्मियों की मिलीभगत और अन्य संदिग्धों से पूछताछ कर रही है। कोटपा (COTPA) 2003 के नियमों के उल्लंघन और कस्टम ड्यूटी चोरी के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच जारी है।
ऐसे होता था खेल
तस्करों का 'मोडस ऑपरेंडी' (Modus Operandi) बेहद शातिर था। मुंद्रा पोर्ट से आई विदेशी सिगरेट को 'ट्रांसशिपमेंट' के नाम पर कोलकाता SEZ ले जाया जाता था, जहाँ से उसे निर्यात किया जाना था। लेकिन SEZ के अंदर ही खेल करके असली माल को बाहर निकालकर बाजार में खपा दिया जाता था, ताकि भारी-भरकम कस्टम ड्यूटी बचाई जा सके।







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