करड़ा,06 जुलाई 2025: जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत हर घर नल कनेक्शन योजना, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, करड़ा गांव और करड़ा आरआई सर्कल के तहत आने वाले गांवों में अपनी मंशा पूरी करने में नाकाम साबित हो रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि योजना के तहत हुए सर्वे में भारी अनियमितताएं बरती गईं, जिसके चलते करड़ा गांव के 65% घर और ढाणियों को पाइपलाइन से वंचित रखा गया है।
केवल 35% घरों में ही पानी की आपूर्ति हो रही है, जिससे गांव में भयंकर जल संकट की स्थिति बनी हुई है। करड़ा गांव के निवासियों, जिनमें कोलाराम, प्रकाश, माधाराम, ईश्वर सिंह, मुला, नारणाराम, भरत कुमार, महताराम भील, गीता देवी, पुरताराम, मफी रेवी, बचनाराम, पुखराज और अन्य शामिल हैं, ने एक संयुक्त आवेदन में प्रभारी अधिकारी, पं. दीनदयाल उपाध्याय संबल पखवाड़ा शिविर, को संबोधित करते हुए इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया है।
ग्रामीणों का कहना है कि जेजेएम के तहत करड़ा और करड़ा आरआई सर्कल के सभी गांवों में किया गया सर्वे आधा-अधूरा था, जिसके कारण अधिकांश घरों और ढाणियों को योजना के दायरे से बाहर रखा गया।
ग्रामीणों का आरोप:
सर्वे में हुई लापरवाही आवेदन में बताया गया कि करड़ा गांव में केवल 35% घरों का ही सर्वे किया गया, जबकि 65% घर और ढाणियां अभी भी पाइपलाइन से नहीं जुड़े हैं। इसी तरह, करड़ा आरआई सर्कल के अन्य गांवों में भी सर्वे की प्रक्रिया में खामियां रहीं, जिसके चलते वहां भी केवल 35% घरों में ही पानी की आपूर्ति हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि इस आधे-अधूरे सर्वे के कारण उन्हें पीने के पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे खासकर महिलाओं और बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पुनः सर्वे और स्थाई समाधान की मांग
ग्रामीणों ने प्रभारी अधिकारी से विनम्र अनुरोध किया है कि करड़ा गांव और करड़ा आरआई सर्कल के सभी गांवों में पुनः सर्वे करवाया जाए। उन्होंने मांग की है कि प्रत्येक गली, मोहल्ले और ढाणी को शामिल करते हुए एक पारदर्शी और पूर्ण सर्वे किया जाए, ताकि हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा सके। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि जल जीवन मिशन के तहत शुरू की गई यह योजना तब तक अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो सकती, जब तक कि सभी घरों को पाइपलाइन से जोड़ा नहीं जाता।
जल जीवन मिशन की स्थिति पर सवाल
जल जीवन मिशन, जिसे 2019 में शुरू किया गया था, का लक्ष्य 2024 तक ग्रामीण भारत के प्रत्येक घर में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना था। हालांकि, करड़ा गांव और आसपास के क्षेत्रों में योजना के कार्यान्वयन में हो रही देरी और लापरवाही ने इस महत्वाकांक्षी योजना की प्रगति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
ग्रामीणों की आवाज:
"हमें सिर्फ वादे नहीं, पानी चाहिए" करड़ा गांव के निवासी कोलाराम ने कहा, "हमने कई बार अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन हर बार हमें सिर्फ आश्वासन मिलता है। पानी की समस्या इतनी गंभीर है कि हमें दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है।" वहीं, गीता देवी ने बताया, "हमारी ढाणियों को सर्वे में शामिल ही नहीं किया गया। सरकार की इस योजना का क्या फायदा, अगर आधे गांव को पानी ही न मिले?" हेल्पलाइन और शिकायत का रास्ता ग्रामीणों ने अपने आवेदन में साझा किया है, ताकि अधिकारी उनसे सीधे संपर्क कर सकें।
आगे क्या?
करड़ा गांव और करड़ा आरआई सर्कल के ग्रामीण अब प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं। उनका कहना है कि पुनः सर्वे और पाइपलाइन विस्तार के बिना इस क्षेत्र की जल समस्या का स्थाई समाधान संभव नहीं है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
जल जीवन मिशन जैसी योजनाएं ग्रामीण भारत के लिए वरदान साबित हो सकती हैं, बशर्ते उनका कार्यान्वयन पारदर्शी और प्रभावी हो। करड़ा गांव की स्थिति यह दर्शाती है कि योजनाओं की सफलता केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सुनिश्चित होनी चाहिए। प्रशासन को चाहिए कि वह ग्रामीणों की शिकायतों को गंभीरता से ले और तत्काल कदम उठाए।







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