संगीतमय भजनों पर झूमे श्रद्धालु; वक्ताओं ने कहा- भक्ति ही जीवन का असली श्रृंगार और संबल
भीनमाल। देवसंस्कृति जनजागरण अभियान के अंतर्गत स्थानीय मालवीय नगर में रामचरित मानस के पंचम सोपान सुन्दरकाण्ड का संगीतमय सामूहिक वाचन श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर वातावरण को पूर्णत: भक्तिमय बना दिया।
भक्ति से मिलता है आत्मबल संगीतमय सुंदरकाण्ड पाठ के दौरान भजनों और चौपाइयों की मधुर प्रस्तुति से पूरा परिसर राममय हो गया। इस दौरान प्रबुद्ध वक्ताओं ने संबोधित करते हुए कहा कि:
- भक्त के जीवन में दुःख आते हैं, किंतु भक्ति उन्हें सहन करने की अपार शक्ति प्रदान करती है।
- भक्ति मनुष्य के आत्मबल, धैर्य और सकारात्मकता को सुदृढ़ बनाती है।
- प्रभु श्रीराम द्वारा माता शबरी को दिए गए उपदेशों का उल्लेख करते हुए भक्ति को जीवन के लिए अनिवार्य बताया गया।
हनुमानजी के पराक्रम का वर्णन कार्यक्रम में महावीर हनुमान के साहस, बल और पराक्रम को भक्ति का प्रताप बताते हुए कहा गया कि परसेवा एवं लोक कल्याण की भावना के लिए सुदृढ़ भक्ति-आश्रय आवश्यक है। सुन्दरकाण्ड के माध्यम से श्रद्धालुओं को सेवा, समर्पण और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया।
इनकी रही गरिमामय उपस्थिति आयोजन में महेश व्यास, हरिकृष्ण द्विवेदी, अर्जुनसिंह, मुकेश व्यास व चतुर्भुज राठी सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।



