🏁 तस्करों का गुरु, नेटवर्क का किंगपिन 🗃️ 15 साल का आपराधिक इतिहास 🚛 ट्रकों पर घूमता था जैसे टूरिस्ट, असलियत में था तस्कर बादशाह 🧠 फेक कॉल, फर्जी नंबर, असली धंधा 🎯 ट्रिगर हैप्पी चिमाराम 🧳 घर-परिवार से नाता तोड़ा, नशे से रिश्ता जोड़ा 🌪️ साइक्लोनर टीम की सर्जिकल स्ट्राइक 🕵️♂️ IGP विकास कुमार की मास्टरमाइंड प्लानिंग 🔫 ड्राइविंग स्किल से बना तस्करी का किंग 🚨 ऑपरेशन झंकार की जीत
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जोधपुर।
नशे की तस्करी का दुर्दांत सरगना, आधुनिक पिस्टल से लैस, ड्राइविंग में माहिर, पुलिस से छह साल तक आंख मिचोली खेलने वाला एक लाख रुपये का इनामी अपराधी चिमाराम आखिरकार साइक्लोनर टीम की गिरफ्त में आ गया।
IGP विकास कुमार के निर्देशन में जोधपुर रेंज की साइक्लोनर टीम ने लंबा ऑपरेशन ‘झंकार’ पूरा कर चिमाराम को दबोचा।

पांचवीं में छोड़ी पढ़ाई, तस्करी में बना उस्ताद
बाड़मेर जिले के लीलसर गांव निवासी चिमाराम पुत्र जेराराम जाट ने पांचवीं के बाद स्कूल छोड़ दिया। शुरू में ट्रैक्टर चलाने लगा, लेकिन उसका ध्यान खेती से ज्यादा स्टंट पर रहता था। फिर पानी का टैंकर चलाया, वहीं से उसकी ड्राइविंग कला पर नजर पड़ी कुख्यात तस्कर बिरदाराम सियोल की। यही से अपराध की ओर कदम बढ़े और चिमाराम ड्राइविंग के सहारे नशे के नेटवर्क का बादशाह बन गया।
- 🟠 चिमाराम के गुरु और दुश्मन
- बिरदाराम – दुर्घटना में मौत
- खरथाराम – आत्महत्या
- हरीश जाखड़ – गैंगवार में मारा गया
- ओमप्रकाश – मुठभेड़ में ढेर
- कोशलाराम – जेल में
ड्राइवरी से तस्करी का किंग
तस्कर उसे एक ट्रिप के ₹20 हजार से ₹1 लाख तक देते थे। गाड़ी में न तो नशा रखता, न मोबाइल फोन। केवल ड्राइव कर ‘एस्कॉर्ट’ करता और पुलिस को भ्रमित करता। गाड़ी पर बैठते ही पीछा करना असंभव हो जाता। चिमाराम का नेटवर्क इतना मजबूत था कि नशे की असली गाड़ियाँ पीछे से आराम से निकल जातीं।

पुलिस पर फायरिंग और अपराधों की लंबी सूची
- 2015 में धोरीमन्ना, 2016 में बाड़मेर सदर, 2018 में नागाणा, 2019 में सुमेरपुर व शिव क्षेत्र में पुलिस पर फायरिंग
- हत्या का प्रयास, डकैती, अपहरण, आर्म्स एक्ट और NDPS एक्ट सहित अब तक 15 प्रकरण
- तीन बार जेल जा चुका, लेकिन हर बार और अधिक दुस्साहसी बनकर लौटा
- 🟠 ‘ट्रिगर हैप्पी’ तस्कर
- जो रोका, उस पर दाग दी गोली
- पुलिस पर कई बार फायरिंग
- हमेशा साथ रखता था पिस्टल
छह साल से फरार, सात बार छका, आठवीं बार दबोचा गया
IGP विकास कुमार द्वारा गठित साइक्लोनर टीम ने सात बार दबिश दी, हर बार चिमाराम फरार हो गया। कभी गृहप्रवेश, कभी बच्चे के जन्म, कभी त्योहार – हर अवसर पर पुलिस की नजर थी, पर चिमाराम चकमा दे जाता। गुजरात, नागपुर, नीमच, सांचोर तक छान मारा, लेकिन उसका कोई ठिकाना न था।

फर्जी सप्लायर बन बिछाया जाल
साइक्लोनर टीम ने नीमच-मंदसौर क्षेत्र के सप्लायर के गुर्गों के संपर्क में जाकर प्लान बनाया। इंटरनेट कॉल के जरिए बेंगलोर से हुआ चिमाराम का संपर्क। तय हुआ दो दिन बाद MP-राजस्थान सीमा पर होटल में मुलाकात।
टीम ने ट्रक को ट्रैक किया, होटल में घेराबंदी कर चिमाराम को दबोच लिया।
- 🟠 तस्करी की नई तकनीक
- बिना मोबाइल
- बिना SIM
- इंटरनेट कॉल
- ट्रक में छिपकर सफर
तस्करों में लगती थी बोली
चिमाराम की ड्राइविंग के लिए बाड़मेर, पाली, जैसलमेर, जोधपुर के तस्करों में होड़ रहती। बिरदाराम, श्रीराम बिश्नोई, कौशलाराम, खरथाराम से लेकर भेराराम तक उससे जुड़ते रहे। कई गैंग के खत्म होने के बाद भी वह सक्रिय बना रहा।
मारवाड़ से मेवाड़ तक नशे का ताज
चिमाराम ने मध्यप्रदेश से मेवाड़ व मारवाड़ तक नशे का नेटवर्क फैला रखा था। वर्षों तक ट्रकों में घूमता रहा, हर गिरफ्तारी के प्रयास से बाल-बाल बचता रहा।
- 🟠 छलावे की दुनिया में चक्रवात की तरह घूमता रहा
- न ट्रेस होता
- न लोकेशन मिलती
- ट्रकों में सवार होकर करता देश भर की यात्रा
गिरफ्तारी में शामिल विशेष टीम
- साइक्लोनर टीम: कन्हैयालाल, नेमाराम, प्रमीत चौहान, देवाराम विश्नोई
- हैड कांस्टेबल: गजराज, महेन्द्र, महिपाल
- कांस्टेबल: मनीष, राकेश, अशोक, अशोक परिहार
- स्ट्रॉन्ग टीम: मांगीलाल, भागीरथ, देवाराम, किशोर, गोपाल जाणी
- मांगीलाल व भागीरथ की विशेष भूमिका रही
सम्मान और अपील
IGP विकास कुमार ने बताया कि ऑपरेशन में शामिल टीमों को जोधपुर रेंज कार्यालय में सम्मानित किया जाएगा।
साथ ही आमजन से अपील की गई है कि अपराधियों या किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना रेंज पुलिस नियंत्रण कक्ष 0291-2650811 या WhatsApp नंबर 9530441828 पर दें। पहचान गुप्त रखी जाएगी।



