मारवाड़ और मेवाड़ के तस्करों का मध्यप्रदेश में मददगार, आंतरी माता मंदिर में प्रसाद के लालच में आया पुलिस के शिकंजे में
जोधपुर। सात साल से फरार और 40 हजार के इनामी, मारवाड़ के तस्करों का मध्यप्रदेश में मुख्य मददगार अपराधी कन्हैयालाल आखिरकार ‘ऑपरेशन लीलटांस’ का शिकार हो गया। समाज को जहर परोसता यह शातिर तस्कर खुद माता के मंदिर में प्रसाद पाने की आस में पकड़ा गया। इस बड़ी कामयाबी से पुलिस महकमे में खुशी का माहौल है।
पुलिस महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि साइक्लोनर टीम को मारवाड़ क्षेत्र के तस्करों के खिलाफ लगातार मिल रही सफलता के बीच एक बड़ी कड़ी को तोड़ने में कामयाबी मिली है। यह कड़ी मारवाड़ और मेवाड़ के तस्करों को मध्यप्रदेश में मुख्य रूप से मदद पहुंचा रही थी। साइक्लोनर टीम ने मादक द्रव्यों की तस्करी की मध्यप्रदेश की मुख्य कड़ी आरोपी कन्हैयालाल (40), पुत्र मनोहरलाल, निवासी घसुंडी बामणी, पुलिस थाना नीमच कैंट, जिला नीमच को दबोच लिया है। कन्हैयालाल की गिरफ्तारी पर 40 हजार रुपये का इनाम घोषित था।

कैसे बुनी गई ‘ऑपरेशन लीलटांस’ की कहानी?
साइक्लोनर टीम को अब तक पकड़े गए मारवाड़ के मादक द्रव्यों के मुख्य सरगनाओं से लगातार मध्यप्रदेश के एक सरगना के लिंक मिल रहे थे। मेवाड़ क्षेत्र से एक के बाद एक कई बड़े मादक द्रव्य सप्लायरों की गिरफ्तारी के बाद भी साइक्लोनर टीम को एक मुख्य लिंक मिल रहा था, जिसकी तलाश में टीम लंबे समय से जुटी थी। साइक्लोनर टीम लंबे समय से इस सुराग पर काम करते हुए मेवाड़ क्षेत्र में तस्करों के गढ़ तक पहुंचने की फिराक में थी। छोटे से सुराग से पूरी सुरंग बनाते हुए साइक्लोनर टीम ने आरोपी की पूरी कुंडली खोज निकाली।
कन्हैया के काले कारनामे: ‘पंडितजी’ कैसे बना तस्करों का चहेता
कर्मकांडी परिवार से आने वाला कन्हैयालाल पूजा-पाठ छोड़ अवैध अफीम और डोडा पोस्त की तस्करी को अपना पेशा बना चुका था। आठवीं पास होने के बावजूद उसका व्यवहार ऐसा था कि एक बार जिस तस्कर से हाथ मिला लिया, पुलिस आए या एनसीबी, नफा हो या नुकसान, पूरी जोखिम ‘पंडितजी’ की। इसी व्यवहार के चलते वह मारवाड़ के तस्करों का चहेता बन गया था।
कन्हैयालाल के पिता ने दूध की डेयरी खुलवाई थी, लेकिन उसकी रुचि डेयरी के दूध में नहीं, अफीम के काले दूध में थी। बचपन के दोस्त राकेश के जरिए वह मेवाड़ क्षेत्र के कुख्यात मादक द्रव्य तस्कर कमल राणा के कारनामे सुनकर ही बड़ा धंधेबाज होने के ख्वाब देखने लगा था। शुरुआत में वह तस्करों को पुलिस नाकाबंदी की सूचना देता था, फिर किसानों से अवैध मादक द्रव्य लेकर तस्करों को उपलब्ध करवाने का मुख्य गठजोड़ बन गया। अपने गुप्त ठिकानों पर किसानों से खरीदा गया अवैध डोडा पोस्त और अफीम छुपाकर वह मारवाड़ क्षेत्र के तस्करों को उपलब्ध कराता था। साइक्लोनर सेल द्वारा पकड़े गए अधिकांश अपराधियों ने मध्यप्रदेश के कन्हैयालाल का नाम बताया था।
कन्हैयालाल वर्ष 2018 में बाड़मेर के कुख्यात तस्कर कंवराराम को फॉर्च्यूनर गाड़ी में 250 किलो अवैध डोडा पोस्त भरवाने में शामिल था। यह गाड़ी पुलिस थाना बगाना, जिला नीमच में पकड़ी गई थी और कन्हैयालाल इस प्रकरण में भी वांछित था। वर्ष 2022 में उसने बाड़मेर निवासी तेजाराम को ट्रक में 26.50 क्विंटल अवैध डोडा पोस्त भरवाया था। यह ट्रक पुलिस थाना पिंडवाड़ा, जिला सिरोही में पकड़ा गया था। इस प्रकरण में वांछित होने पर ही उसकी गिरफ्तारी पर 40 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
साइक्लोनर टीम का खौफ: सात साल की फरारी का अंत
कन्हैयालाल ने गिरफ्तारी के बाद बताया कि वह पिछले सात साल से फरार था। इस दौरान उसे घर आने-जाने या अपने अवैध धंधे चलाने में कोई समस्या नहीं हुई। लेकिन साइक्लोनर टीम के गठन के बाद अपराधियों की लगातार धरपकड़ से वह इतना सतर्क और भयभीत हो गया कि उसने अपने घर आना-जाना तक छोड़ दिया था। मारवाड़ क्षेत्र के सभी तस्कर उसे साइक्लोनर टीम से बचने की सलाह देते रहते थे।
जाल कैसे बिछाया: आस्था और पावर बाइक का खेल
साइक्लोनर टीम ने करीब चार महीने तक शोध किया और लगभग 15 दिनों तक आरोपी के क्षेत्र में ही कुंडली मारकर बैठी रही। आरोपी की हर गतिविधि पर बाज की नजर थी। कन्हैयालाल को डर था कि मारवाड़ क्षेत्र में जाने पर साइक्लोनर टीम उसे दबोच सकती है, इसलिए उसने मारवाड़ आना छोड़ दिया था।
आरोपी की गिरफ्तारी के लिए साइक्लोनर टीम ने उसकी पूरी कुंडली खंगाली। जानकारी मिली कि वह आंतरी माता का भक्त है और चांदी का मोटा कड़ा हाथ में पहने रखता है। आरोपी को पुलिस टीम के आने की भनक थी, पर साइक्लोनर टीम नीमच तक पहुंच जाएगी, ऐसा उसे अंदाजा नहीं था। साइक्लोनर टीम पिछले सात दिनों से नीमच जिले में आरोपी के गढ़ में डेरा जमाए बैठी थी। 15 दिनों तक आरोपी अपने क्षेत्र में खुद को सुरक्षित समझते हुए बाहर नहीं निकला।
फिर साइक्लोनर टीम ने कन्हैयालाल को पकड़ने के लिए तीन अलग-अलग टीमें बनाकर घेराबंदी की। इसी दौरान गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आरोपी के आंतरी माता का भक्त होने के चलते मंदिर दर्शन करने आने और उसके बाद अपनी बहन से मिलने जाने की सूचना मिली। साइक्लोनर टीम आरोपी के पीछे-पीछे आंतरी माता मंदिर के आसपास पहुंची तो उसे भनक लग गई।
कन्हैयालाल फरारी के दौरान पावर बाइक का इस्तेमाल करता था और इसी के दम पर 2018 से पुलिस की पकड़ में आने से पहले फरार हो जाता था। आंतरी माता मंदिर में दर्शन करने जाने के दौरान बाहरी व्यक्ति की भनक लगते ही आरोपी पावर बाइक लेकर फरार होने की फिराक में था। शातिर कन्हैयालाल को घेरेबंदी का अंदेशा लग गया। वह अपनी पावर बाइक से भागने ही वाला था कि साइक्लोनर टीम के कांस्टेबल मांगीलाल, जो खुद भी बाइक पर थे, ने उसे रुकवा लिया। हालांकि, कन्हैयालाल अपनी बाइक पटककर खेतों में फरार हो गया। लेकिन कांस्टेबल मांगीलाल ने करीब 1 किलोमीटर पीछा कर उसे पकड़ लिया। इतने में दूसरी टीम भी वहां पहुंच गई और तस्कर कन्हैयालाल पुलिस के शिकंजे में आ गया।
‘ऑपरेशन लीलटांस’ नाम क्यों?
इस ऑपरेशन का नामकरण आरोपी के हमनाम कवि कन्हैयालाल सेठिया पर किया गया है। राजस्थानी भाषा के विख्यात साहित्यकार कन्हैयालाल सेठिया की साहित्य अकादमी से पुरस्कृत रचना का नाम ‘लीलटांस’ है। लीलटांस पक्षी की गर्दन विष के प्रभाव से नीली रहती है और यह कभी जमीन पर पैर नहीं रखता। इसी तरह कन्हैयालाल भी अपने सपने लेकर आसमान में उड़ता रहता था और समाज में जहर बांटने का काम करता था। इसीलिए हमनाम कवि की रचना ‘लीलटांस’ के आधार पर इस अभियान का नाम ‘ऑपरेशन लीलटांस’ रखा गया।
पुलिस टीम को शाबाशी, आमजन से अपील
इस सफल अभियान में रेंज स्तरीय साइक्लोनर टीम के उप-निरीक्षक कन्हैयालाल, नेमाराम, प्रमीत चौहान, देवाराम विश्नोई, हेड कांस्टेबल गजराज सिंह, महेंद्र कुमार, महिपाल सिंह, कांस्टेबल अशोक कुमार, राकेश, मनीष परमार, राकेश, अशोक परिहार, मांगीलाल और भागीरथ शामिल रहे। इस ऑपरेशन की सफलता में एक आम नागरिक का भी सराहनीय सहयोग रहा है, जिसे एक विशेष कार्यक्रम में सम्मानित किया जाएगा। कांस्टेबल मांगीलाल की इस ऑपरेशन में विशेष भूमिका रही।
पुलिस महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि इस कार्रवाई में शामिल समस्त टीमों को जोधपुर रेंज कार्यालय में विशेष कार्यक्रम के दौरान सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने आमजन से अपील की है कि किसी भी अपराधी या अन्य सूचना, जो अपराधी से संबंधित है, उसे रेंज पुलिस नियंत्रण कक्ष (संजय) नंबर 0291-2650811 और व्हाट्सएप नंबर 9530441828 पर दी जा सकती है। सूचना देने वाले व्यक्ति की गोपनीयता का पूरा ख्याल रखा जाएगा।



