जोधपुर / सूरत, राजस्थान: पुलिस महानिरीक्षक विकास कुमार के नेतृत्व में जोधपुर रेंज की विशेष ‘साइक्लोनर’ टीम ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए राजस्थान और मध्य प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले 35,000 रुपये के इनामी वांछित अपराधी मगाराम पुत्र खेताराम (44), निवासी नगर, शिवपुरा नेहरों का बास, पुलिस थाना आर.जी.टी., बाड़मेर को गिरफ्तार कर लिया है। ‘ऑपरेशन ड्रगमग’ के तहत साइक्लोनर टीम ट्रक का खलासी बनकर सूरत तक पहुंची और इस शातिर तस्कर की “ड्रग्स की नाव डगमग” कर दी।

तस्कर ने ऐसे डाला पुलिस को चकमा, लेकिन नहीं बच सका साइक्लोनर से
पुलिस महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि मगाराम पिछले 9 सालों से नशे की दुनिया का “रिंग मास्टर” बना हुआ था। वह मध्य प्रदेश से मारवाड़ तक अवैध मादक द्रव्यों की सप्लाई का एक बड़ा गोरखधंधा चला रहा था। उसके खिलाफ राजस्थान और मध्य प्रदेश में आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं और वह कई बार जेल भी जा चुका है। मगाराम छह साल पुराने तस्करी के एक मामले में भी वांछित था।

रसद के गेहूं घोटाले से शुरू हुआ आपराधिक करियर
मगाराम का आपराधिक करियर ड्राइविंग के दौरान जोधपुर में रसद विभाग के गेहूं सप्लाई में धांधली से शुरू हुआ। सरकारी गेहूं बेचने और उसमें मिलावट करने के आरोप में उस पर मामला दर्ज हुआ और उसे जेल भी जाना पड़ा। दो दिन जेल में रहने के बाद जमानत पर बाहर आया तो आर्थिक तंगी ने उसे फिर गलत रास्ते पर धकेला। अपने दोस्त श्रीराम उर्फ संजय ढाका के कहने पर वह तस्करी की दुनिया में कूद पड़ा।
नीमच-बाड़मेर के पारंपरिक नशामार्ग का महारथी
शुरुआत में छोटे पैमाने पर डोडा पोस्त बेचने वाला मगाराम जल्द ही श्रीराम के साथ मिलकर इस अवैध धंधे का “रिंग मास्टर” बन गया। वह महीने में चार से पांच चक्कर लगाकर मारवाड़ तक नशे की बड़ी खेप पहुंचाता था। साल 2018 में उसे मध्य प्रदेश में 2 क्विंटल अवैध डोडा पोस्त के साथ पकड़ा गया और एक साल जेल में रहा। जेल से बाहर आते ही उसने फिर से श्रीराम के साथ मिलकर अपना धंधा शुरू कर दिया।
2019 में, वह अपनी इसुजू गाड़ी में 6 क्विंटल डोडा पोस्त ले जाते समय पचपदरा पुलिस थाना में घिरता देख गाड़ी छोड़कर भाग गया। गाड़ी से अवैध हथियार और मादक द्रव्य मिलने से एन.डी.पी.एस. और अवैध हथियारों का मामला दर्ज हुआ। उस समय वह बच निकलने में कामयाब रहा, क्योंकि गाड़ी का चालक होने की बात उसने स्वीकार नहीं की। बाद में श्रीराम उर्फ संजय ढाका की गिरफ्तारी के बाद उसने खुलासा किया कि चालक मगाराम था, जिसके बाद मगाराम वांछित हो गया। 2023 में उसे स्कॉर्पियो गाड़ी से डोडा पोस्त सप्लाई करते हुए आर.जी.टी. थाना में पकड़ा गया और फिर जमानत पर बाहर आ गया।
आठ बेटियों के बाद पुत्र प्राप्ति और ‘दिखावे का’ धर्म
मगाराम की आठ बेटियां थीं, जिसके बाद सोशल मीडिया से उसे दत्तात्रेय धाम के बारे में जानकारी मिली। माता का उपासक बनकर उसने पुत्र की कामना की। धाम के महंतजी और परिवार के दबाव में उसने अवैध धंधे से तौबा करने का दिखावा किया और ट्रक ड्राइविंग का पेशा अपनाया। माता की उपासना से उसे एक पुत्र भी प्राप्त हुआ। हालांकि, वह कहने को तो धंधे से दूर हो गया था, लेकिन परदे के पीछे से वह “रिंग मास्टर” बना रहा। पुलिस ने कई बार उसके घर पर दबिश दी, लेकिन ट्रक ड्राइवर होने के कारण वह कभी-कभार ही घर आता था। उसकी गिरफ्तारी न हो पाने के कारण रेंज कार्यालय ने उस पर 35 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था।
अनजान बैंक अकाउंट और ‘मिर्ची बड़ा’ ने बिछाया जाल
लंबे समय तक सुराग न मिलने पर साइक्लोनर टीम ने अपने मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया। एक मुखबिर से रोचक सूचना मिली कि मगाराम आजकल ऑनलाइन पेमेंट का तरीका सीख गया है और मिर्ची बड़ा खाकर भी ऑनलाइन पेमेंट करता है। परिवार के सभी बैंक खातों की जांच से भी कोई सुराग नहीं मिला, तो साइक्लोनर टीम ने दूसरा तरीका अपनाया। मगाराम के टायर की दुकान वाले दोस्त और दत्तात्रेय मंदिर के आसपास के व्यवसायियों की गहन छानबीन के बाद एक फर्जी और अनजान संदिग्ध अकाउंट का पता चला। इसी अकाउंट से कई सारे पेट्रोल पंपों से भुगतान हो रहा था, जिससे अंदाजा लगा कि मगाराम ट्रक लेकर गुजरात जाता है। शातिर मगाराम भुगतान करते ही फोन और नेट बंद कर देता था। आखिरकार, एक ऐसे ही पेट्रोल पंप भुगतान से मगाराम के गुजरात की ओर ट्रक लेकर जाने की तकनीकी सूचना प्राप्त हुई।
ट्रक का खलासी बन साइक्लोनर टीम पहुंची, सूरत में हुई गिरफ्तारी
आखिरी पेट्रोल पंप के विवरण से मिली ट्रक की सूचना का पीछा करती हुई साइक्लोनर टीम गुजरात के सूरत के कडोदरा गांव तक पहुंच गई। मगाराम वहां एक प्रतिष्ठान पर गाय का चारा उतारकर राजस्थान वापसी के लिए खाली ट्रक में माल भरवाने में व्यस्त था। ट्रक की पहचान होते ही साइक्लोनर टीम वहां रुके ट्रकों में से किसी ट्रक का खलासी बनकर आसपास घूमती रही। आखिरकार, एक होटल में पैसे देकर रोटी खाता दिख गया मगाराम। टीम ने मुफ्त की रोटी का जुगाड़ कर लिया। मगाराम ने पहले तो बड़े विश्वास के साथ अपना फर्जी नाम-पता बताया, लेकिन पूछताछ की सख्ती के सामने उसकी एक न चली और उसने सारा भेद उगल दिया।
ऑपरेशन ‘ड्रगमग’ और टीम का योगदान
इस ऑपरेशन को “ड्रगमग” नाम दिया गया, जो ‘ड्रग’ धंधे से जुड़े मगाराम के ‘ड्रग’ और ‘मग’ शब्द से लिया गया है। साथ ही, पुराने घिसे-पिटे ट्रकों में ड्रग भरकर डगमग करते ट्रक को कुशलता से चलाने के कारण भी यह नाम सार्थक रहा।
इस कार्रवाई में रेंज स्तरीय साइक्लोनर टीम के उपनिरीक्षक कन्हैयालाल, नेमाराम, प्रमीत चौहान, देवाराम विश्नोई, हेड कांस्टेबल गजराज सिंह, महेंद्र कुमार, महिपाल सिंह, कांस्टेबल अशोक कुमार, राकेश, मनीष परमार, अशोक परिहार, मांगीलाल, और भागीरथ शामिल रहे। इस ऑपरेशन में कांस्टेबल मांगीलाल की विशेष भूमिका रही।
पुलिस महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि इस कार्रवाई में शामिल सभी टीमों को विशेष कार्यक्रम के दौरान जोधपुर रेंज कार्यालय में सम्मानित किया जाएगा।



