भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. महेन्द्र कुमावत ने जारी की 74 सदस्यीय भारी-भरकम सूची; राजनैतिक विश्लेषकों ने उठाए क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर सवाल — जानिए किस जिले का बढ़ा रसूख और कौन रहा अभागा
संगठन घोषणा और राजनैतिक हलचल
जयपुर। राजस्थान भाजपा संगठन में लंबे समय से प्रतीक्षित नियुक्तियों के तहत भारतीय जनता पार्टी अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) मोर्चा, राजस्थान की 74 सदस्यीय भारी-भरकम प्रदेश कार्यकारिणी की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. महेन्द्र कुमावत द्वारा जारी इस सूची में राष्ट्रीय व प्रांतीय नेतृत्व की सहमति की बात कही जा रही है। लेकिन इस सूची के आते ही राजनीतिक गलियारों में क्षेत्रीय असंतुलन को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। सर्किल न्यूज़ नेटवर्क द्वारा किए गए गहन विश्लेषण में यह साफ हुआ है कि इस नई टीम में जहां कुछ विशेष जिलों पर प्रभारियों और पदाधिकारियों की बरसात हुई है, वहीं राज्य के कई महत्वपूर्ण सीमावर्ती व केंद्रीय जिले इस बार पूरी तरह उपेक्षित और ‘वंचित’ छोड़ दिए गए हैं।

जोधपुर का एकछत्र राज (सर्वाधिक प्रतिनिधित्व वाले जिले)
आंकड़ों का गणित साफ गवाही दे रहा है कि भाजपा ओबीसी मोर्चा की इस सूची में ‘जोधपुर शहर’ का सिक्का सबसे मजबूती से चमका है। कुल 74 पदों में से अकेले जोधपुर शहर के खाते में 9 बड़े पद आए हैं। इनमें प्रदेश उपाध्यक्ष सुभाष गहलोत, प्रदेश मंत्री शिवदान सिंह भाटी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त प्रवक्ताओं की सूची में अकेले जोधपुर शहर से छह चेहरों (आनंद परिहार, रामस्वरूप प्रजापत, दिनेश जांगिड़, पदम सिंह, आनंद सिंह सोलंकी, दिनेश चौधरी) को जगह दी गई है। जोधपुर देहात उत्तर से महेश भादू को भी सोशल मीडिया सह-संयोजक का प्रभार मिला है। जोधपुर संभाग के इस दबदबे के बाद राजधानी जयपुर (शहर व देहात मिलाकर कुल 14 पद) और पाली जिले (4 पद) का नंबर आता है।
संगठन के नक्शे से गायब हुए ये 8 ‘वंचित’ जिले (शून्य प्रतिनिधित्व)
इस सूची का सबसे स्याह पहलू यह है कि राजस्थान के कई पारंपरिक और राजनैतिक रूप से सक्रिय जिले ओबीसी मोर्चा की दौड़ से पूरी तरह बाहर कर दिए गए हैं। विश्लेषकों के अनुसार, हाड़ौती संभाग के बारां व बूंदी जिले, पूर्वी राजस्थान के धौलपुर, करौली, दौसा और सवाई माधोपुर जिले, मेवाड़-मालवा सीमा से सटा झालावाड़, और उत्तरी राजस्थान का प्रमुख नहरी जिला श्री गंगानगर इस 74 सदस्यीय विशाल सूची में एक भी पद पाने में पूरी तरह ‘वंचित’ रहे हैं। इन आठ जिलों के स्थानीय पिछड़ा वर्ग कार्यकर्ताओं में इस उपेक्षा को लेकर अंदरूनी असंतोष पनप रहा है।

न्यूनतम प्रतिनिधित्व वाले जिले (महज एक-एक पद)
कार्यकारिणी में केवल नाम मात्र की क्षेत्रीय खानापूर्ति करने के लिए राज्य के कई जिलों को महज एक-एक पद सौंपकर शांत करने का प्रयास किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से जैसलमेर (खीमाराम सुथार – उपाध्यक्ष), टोंक (रामेश्वर प्रसाद गुर्जर – महामंत्री), बाड़मेर (चिमणाराम घतरवाल – आईटी संयोजक), डूंगरपुर (अनिल पटेल – नीति सह-प्रभारी), प्रतापगढ़ (श्रीमती किरण बत्रा – प्रशिक्षण सह-प्रभारी), भरतपुर (रमन धाकड़ – नमो ऐप संयोजक), हनुमानगढ़ (जसप्रित सिंह सिद्धू – प्रवक्ता), बांसवाड़ा (हरीश पटेल – प्रवक्ता) और सिरोही (सतीश सेठी – प्रवक्ता) शामिल हैं।

पदों के अनुसार विस्तृत विवरण (Detailing)
- शीर्ष नेतृत्व (उपाध्यक्ष एवं महामंत्री): कार्यकारिणी के शीर्ष पायदान पर 8 प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं, जिनमें खीमाराम सुथार (जैसलमेर), रमेश राखेचा (पाली), चेतन कुमावत (जयपुर शहर), सुभाष गहलोत (जोधपुर शहर), शिव देशवाल (नागौर शहर), पुष्पराज यादव (अलवर दक्षिण), ओबाराम देवासी (जालोर) और सम्पत सांखला (अजमेर शहर) शामिल हैं। संगठन की रीढ़ माने जाने वाले प्रदेश महामंत्री पद पर टोंक के रामेश्वर प्रसाद गुर्जर, जयपुर शहर के संजय जायसवाल और बीकानेर देहात के भंवरलाल जांगिड़ को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
- मंत्री व वित्तीय प्रभारी: प्रदेश मंत्रियों की सूची में अजमेर शहर से सुभाष चौधरी, उदयपुर देहात से प्रेम लौहार, जालोर से प्रकाश जागु (विश्नोई), जोधपुर शहर से शिवदान सिंह भाटी, पाली से श्रीमती Nवरतन चौधरी व दीपक भाटी, चुरू से विष्णु सोनी, झुंझुनू से महेन्द्र प्रजापत और कोटा शहर से सीयाराम वैष्णव शामिल हैं। वहीं प्रदेश कोषाध्यक्ष का पद बीकानेर देहात के विनोद गिरी गोस्वामी को मिला है, जबकि सह-कोषाध्यक्ष भीलवाड़ा के देवीलाल साहु और सीकर के सुरेश सेनी बने हैं।
- प्रकोष्ठ, आई.टी. व मीडिया प्रभाग: आईटी विभाग में बाड़मेर के चिमणाराम घतरवाल, चुरू के नेमीचन्द जांगिड़ और जयपुर की श्रीमती वर्तीका सैन को रखा गया है। सोशल मीडिया में चित्तौड़गढ़ के नन्द किशोर लौहार, जोधपुर के तरुण साहू व महेश भादू हैं। मीडिया प्रभारी के रूप में अजमेर देहात के बद्री सामरिया और सह-प्रभारी पद पर उदयपुर शहर के योगेश कुमावत व जयपुर देहात उत्तर के कैलाश भडाना मोर्चा संभालेंगे।

(नोट: क्रमानुसार 1 से 74 तक के सभी नाम, उनके आधिकारिक पद और गृह जिलों की पूरी विवरणात्मक सूची नीचे दी गई डाउनलोड की जाने वाली PDF फाइल में संकलित है)
राजनैतिक विश्लेषण और निहितार्थ
विश्लेषण: सर्किल न्यूज़ नेटवर्क के इस बारीक सांगठनिक विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि वर्तमान भाजपा ओबीसी मोर्चा के विस्तार में ‘जमीनी संतुलन’ से अधिक ‘क्षेत्रीय रसूख और गुटीय लॉबिंग’ को तरजीह मिली है। जोधपुर शहर को अकेले 9 पद सौंप देना और इसके विपरीत बारां, बूंदी, झालावाड़ जैसे पूरे के पूरे हाड़ौती बेल्ट तथा धौलपुर, करौली जैसे पूर्वी राजस्थान के जिलों को पूरी तरह शून्य पर छोड़ देना, सांगठनिक और चुनावी दृष्टि से एक बड़ा रणनीतिक दोष माना जा सकता है।
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि आगामी चुनावों और सांगठनिक सक्रियता के लिहाज से यह असंतुलन मोर्चा के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। जिन जिलों को ‘वंचित’ रखा गया है, वहां विपक्ष को पिछड़ा वर्ग के बीच भाजपा के खिलाफ माहौल बनाने का सीधा मौका मिल सकता है। जब तक मोर्चा और मुख्य संगठन में ‘एक जिला, समान प्रतिनिधित्व’ के सिद्धांत को कड़ाई से लागू नहीं किया जाता, तब तक इस तरह की सूचियां आंतरिक कलह और असंतोष को जन्म देती रहेंगी। अब देखना यह है कि इस भारी क्षेत्रीय असंतुलन के बाद क्या भाजपा का केंद्रीय या प्रांतीय नेतृत्व इसमें कोई सुधारात्मक (डैमेज कंट्रोल) कदम उठाता है या इसी असंतुलित टीम के भरोसे आगे बढ़ा जाएगा।
आधिकारिक PDF फाइल यहाँ से डाउनलोड करें:
संशोधित और पूर्ण विवरण के साथ तैयार की गई आधिकारिक PDF फाइल नीचे दी गई है। इसे डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:
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