क्रॉप डैमेज मुआवजे और नए गोदाम निर्माण को लेकर समिति ने पास किए कड़े प्रस्ताव, डिफाल्टरों के नाम अखबार में छपेंगे
सर्कल न्यूज नेटवर्क रानीवाड़ा। सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की जमीनी समस्याओं के समाधान के लिए शुक्रवार, 3 जुलाई को ग्राम सेवा सहकारी समिति (जीएसएस) रानीवाड़ा शहर के मुख्यालय पर एक विशेष आमसभा का आयोजन किया गया। यह आमसभा समिति के अध्यक्ष गुमान सिंह राव की देखरेख में एवं उपाध्यक्ष उम्मेद सिंह देवड़ा की गरिमामय मौजूदगी में संपन्न हुई। सहकार सप्ताह के अंतर्गत आयोजित इस 'सहकार संवाद दिवस' में किसानों के हितों को लेकर कई ऐतिहासिक और कड़े प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए।

बैठक की शुरुआत में समिति के सचिव जोराराम मेघवाल ने सहकारिता आंदोलन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन 'सहकार से समृद्धि' को धरातल पर उतारने के लिए यह संवाद दिवस आयोजित किया गया है। इस अवसर पर समिति द्वारा "सहकार से समृद्धि: हमारा संकल्प, हमारा विकास" का नया नारा भी लॉन्च किया गया। कार्यक्रम और बैठक की पूरी कार्यप्रवाह का संचालन सुरेश मेघवाल द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया।
नैनो यूरिया पर फूटा किसानों का गुस्सा, डीएपी-यूरिया की अनिवार्य आपूर्ति का प्रस्ताव
आमसभा में खाद की किल्लत और नैनो यूरिया की जबरन टैगिंग को लेकर किसानों ने तीखा आक्रोश व्यक्त किया। किसानों की मांग पर समिति ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया कि रानीवाड़ा मुख्यालय की इस समिति में पारंपरिक यूरिया और डीएपी खाद की उपलब्धता अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए।
इसके साथ ही एक बड़ा फैसला लेते हुए यह प्रस्ताव भी लिया गया कि समिति परिसर से नैनो यूरिया का वितरण पूरी तरह बंद किया जाए। किसानों का स्पष्ट कहना था कि नैनो यूरिया उनके खेतों और फसलों के लिए व्यावहारिक रूप से उपयोगी साबित नहीं हो रहा है, इसलिए इसे किसानों पर न थोपा जाए।
बीमा नियमों के सरलीकरण और 2025 के मुआवजे की मांग
फसली बीमा क्लेम में आ रही तकनीकी दिक्कतों और कंपनियों की मनमानी को लेकर भी आमसभा में गहन मंथन हुआ। समिति ने प्रस्ताव पारित कर सरकार से मांग की है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के नियमों का सरलीकरण किया जाए ताकि अनपढ़ और सीधे-साधे किसानों को क्लेम के लिए भटकना न पड़े। इसके साथ ही, वर्ष 2025 के खरीफ और रबी सीजन में हुए फसल खराबे का बकाया मुआवजा जल्द से जल्द किसानों के खातों में हस्तांतरित करवाने के लिए विभाग को पत्र भेजने का निर्णय लिया गया।

अवधिपार ऋणी डिफाल्टरों पर कसेगा शिकंजा, अखबारों में छपेंगे नाम
समिति की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ बनाए रखने और ऋण चक्र को नियमित करने के लिए बैठक में कड़ा रुख अपनाया गया। जिन सदस्यों ने ऋण लेने के बाद समयावधि पार होने पर भी लोन चुकता नहीं किया है, उन्हें तुरंत कानूनी नोटिस जारी किए जाएंगे। प्रस्ताव में यह भी तय किया गया कि यदि नोटिस के बाद भी अवधिपार ऋण की वसूली नहीं होती है, तो ऐसे डिफाल्टरों के नाम व फोटो अखबारों में प्रकाशित (छाया चित्र सहित) करवाए जाएंगे, ताकि समिति के वित्तीय हितों की रक्षा हो सके।
जीर्ण-शीर्ण गोदाम होगा डिस्मेंटल, बनेगा नया हाईटेक परिसर
समिति के बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को आधुनिक बनाने के लिए भी कई महत्वपूर्ण निर्माण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई:
- मुख्यालय पर स्थित पुराने और क्षतिग्रस्त (जीर्ण-शीर्ण) गोदाम को डिस्मेंटल (ध्वस्त) कर वहां एक नवीन आधुनिक गोदाम निर्माण की स्वीकृति हेतु सहकारिता विभाग को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
- सुरक्षा के लिहाज से समिति परिसर की चारदीवारी (दीवार) की ऊंचाई बढ़ाने, नया मुख्य गेट लगाने और पूरे परिसर का रंग-रोगन करने का निर्णय लिया गया।
- किसानों की सुविधा के लिए पूरे परिसर में पेवर ब्लॉक (इंटरलॉकिंग टाइल्स) लगाए जाएंगे ताकि बारिश के दिनों में कीचड़ की समस्या न हो।
समसामयिक मुद्दों पर जुड़े कुछ अन्य महत्वपूर्ण अनुपूरक प्रस्ताव
- सोलर प्लांट की स्थापना: बिजली संकट से निपटने और समिति के खर्चों को कम करने के लिए जीएसएस कार्यालय व गोदाम की छत पर सौर ऊर्जा (सोलर पैनल) स्थापित करने का एक अतिरिक्त प्रस्ताव विचारार्थ शामिल किया गया।
- डिजिटल सेवा केंद्र: किसानों को खाद-बीज के साथ-साथ गिरदावरी, जमाबंदी और सरकारी योजनाओं के फॉर्म भरने के लिए समिति परिसर में ही एक 'सहकार ई-मित्र केंद्र' शुरू करने का प्रस्ताव भी रखा गया।
वित्तीय लेखा-जोखा पेश, ऑडिट रिपोर्ट का वाचन
पारदर्शिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सचिव जोराराम मेघवाल द्वारा समिति की नवीनतम ऑडिट रिपोर्ट का सदन के सामने वाचन किया गया। सदस्यों को समिति की आय-व्यय, कुल ऋण वितरण और रिकवरी की स्थिति से अवगत कराया गया, जिसे सदन ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी।
इनकी रही गरिमामय उपस्थिति
इस विशेष आमसभा में क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों, समिति सदस्यों और उनके प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस मौके पर मुख्य रूप से समिति उपाध्यक्ष उम्मेद सिंह देवड़ा, फतेह सिंह देवड़ा, गणेशाराम प्रजापत, कृष्ण कुमार मेघवाल, कांतिलाल मेघवाल, पोपटलाल श्रीमाली, चंदूलाल बोहरा, भीखाराम मेघवाल, वाघाराम मेघवाल, गणपत सिंह, गलबा राम वाघेला सहित भारी संख्या में ग्रामीण व काश्तकार उपस्थित रहे। सभी ने सहकारिता के माध्यम से रानीवाड़ा के विकास का संकल्प दोहराया।







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