रानीवाड़ा। क्षत्रिय युवक संघ के संरक्षक एवं चतुर्थ संघ प्रमुख भगवान सिंह रोलसाहबसर का 5 जून 2025 को जयपुर में निधन हो गया। उनके निधन से संघ परिवार, सामाजिक नेतृत्व और आदर्श मूल्यों की धरोहर को अपूरणीय क्षति पहुंची है।
प्रांत प्रमुख प्रवीण सिंह सुरावा ने जानकारी दी कि भगवान सिंह के सम्मान में प्रदेश के प्रत्येक जिले में श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया गया। इसी क्रम में रानीवाड़ा कस्बे के हिंगलाज माता मंदिर प्रांगण में बुधवार को श्रद्धांजलि सभा संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में गणमान्यजनों, संघ पदाधिकारियों व स्वयंसेवकों ने भाग लिया।
सभा में जालोर संभाग के संभाग प्रमुख अर्जुन सिंह देलदरी ने भगवान सिंह के जीवन का परिचय प्रस्तुत करते हुए कहा कि उन्होंने युवाओं को अनुशासन, त्याग और आत्मबल के पथ पर चलने की प्रेरणा दी। उनका जीवन राष्ट्र और समाज के प्रति समर्पित साधना की मिसाल रहा।
इस मौके पर पूर्व मंत्री अर्जुन सिंह देवड़ा ने अपने संस्मरण साझा करते हुए कहा कि भगवान सिंह ने सामाजिक उत्थान और सद्भाव की दिशा में जो योगदान दिया, वह पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। उनके विचारों में स्पष्टता, कर्म में निष्ठा और जीवन में आदर्शों के प्रति अडिगता सदैव बनी रही।
सभा में मसरू राम देवासी, पुरुष पटेल, किशन जोशी, रविन्द्र सिंह उमट, छैल सिंह रतनपुर सहित कई वक्ताओं ने भगवान सिंह के संयम, सादगी, निर्भीकता और संगठन क्षमता पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि वे केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि विचारधारा और संस्कार की परंपरा थे, जो आज के समय में दुर्लभ है।
श्रद्धांजलि सभा में रावत मानवेंद्र देव सिंह देवड़ा, प्रधान राघवेंद्र सिंह देवड़ा, मोहबत सिंह, विकास अधिकारी हेमलता विश्नोई, पुलिस उपाधीक्षक भवानी सिंह इंदा, विकास अधिकारी आवड दान चारण, थानाधिकारी दीप सिंह, मुकेश जोशी, चंदन सिंह डाभी, हड़मत सिंह रानीवाड़ा, फतेह सिंह रानीवाड़ा खुर्द, तन सिंह तेजावास, फूल सिंह जाखड़ी, गणपत सिंह रतनपुर, रेवंत सिंह जाखड़ी, वीर बहादुर सिंह रानीवाड़ा खुर्द, भवानी सिंह सुरावा, भरत सिंह सेवाड़ा, रविन्द्र सिंह सेवाड़ा, अर्जुन सिंह सेवाड़ा, छगन देवासी, वीरम सिंह सुरावा, हड़मत सिंह सुरावा सहित संघ के सैकड़ों स्वयंसेवक, स्वयंसेविकाएं एवं क्षेत्र के नागरिकगण उपस्थित रहे।
श्रद्धांजलि सभा का वातावरण भावुकता और सम्मान से परिपूर्ण था। उपस्थितजनों ने भगवान सिंह रोलसाहबसर की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर उन्हें अंतिम नमन अर्पित किया।







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