बकरा ईद से पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुए बकरे, खरीदारों की लगी कतार, 'Allah' and '786' embossed on two goats,
रानीवाड़ा/जालोर। जालोर जिले के रानीवाड़ा उपखंड के छोटे से गांव करड़ा में इन दिनों एक ‘करामात’ चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां के एक गरीब पशुपालक चमनाराम रेबारी के घर दो ऐसे बकरे पैदा हुए हैं, जिन्होंने उसकी तक़दीर ही बदल दी है। बकरों के जिस्म पर प्राकृतिक तौर पर ‘अल्लाह’ और ‘786’ की शक्ल उभर आई है। यह महज इत्तेफाक नहीं, बल्कि लोगों के मुताबिक मालिक की इनायत है।
कभी मुंबई के कारोबारी थे चमनाराम, अब गांव में फकीरी जिंदगी
चमनाराम का कभी मुंबई में कारोबार करता था। करोड़ों में खेलते थे, लेकिन वक्त ने ऐसी करवट ली कि सब कुछ डूब गया। कर्ज़ के बोझ ने उन्हें वापस गांव ला पटका। अब मामूली सी आमदनी में बकरियों का पालन कर जैसे-तैसे गुजर-बसर हो रहा है। लेकिन अब क़ुदरत की ऐसी रहमत बरसी है कि पूरे गांव की नजरें उनके घर की ओर टिक गई हैं।

दो बकरे, जिनमें बसा है ‘इलाही नूर’
इन दो नवजात बकरों में से एक के कान पर साफ तौर पर ‘अल्लाह’ लिखा हुआ दिखाई देता है, वहीं दूसरे के पेट पर उभरा है ‘786’ – जो इस्लाम धर्म में मुबारक माना जाता है। परिवार का कहना है कि यह सब फितरी तौर पर हुआ है, इनमें किसी भी इंसानी दखल की गुंजाइश नहीं।
बकरा ईद नजदीक, मंडियों से आ रहे हैं लाखों के ऑफर
इन बकरों की चर्चा जैसे ही फैली, गुजरात और राजस्थान की मंडियों से व्यापारियों के फोन घनघनाने लगे। ‘अल्लाह’ लिखे बकरे के लिए 7 लाख रुपये तक की पेशकश की गई है। माना जाता है कि इस तरह के बकरे की कुर्बानी नहीं की जाती, बल्कि उसे महफूज़ रखा जाता है – कुछ अमीर लोग इसे सावक की तरह पालते हैं। वहीं दूसरे बकरे, जिसके जिस्म पर ‘786’ उभरा है, के लिए 3 लाख रुपये तक की बोली लगी है।
सोशल मीडिया पर तहलका
दोनों बकरों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से वायरल हो रही हैं। इंस्टाग्राम से लेकर व्हाट्सएप स्टेटस तक, हर जगह यही बकरे ट्रेंड कर रहे हैं। लोग इसे ख़ुदा की निशानी मान रहे हैं। बकरा ईद से पहले इनकी कीमत और भी चढ़ने की उम्मीद है।
हमारी टीम जब करड़ा पहुंची...
हमने जब करड़ा गांव में चमनाराम के घर पहुंचकर दोनों बकरों को देखा, तो वाकई यह मंजर किसी रूहानी तजुर्बे से कम नहीं लगा। ‘अल्लाह’ और ‘786’ की आकृतियां बिल्कुल साफ और प्राकृतिक रूप से उभरी हुई दिखीं। चमनाराम की आंखों में उम्मीद थी और दिल में शुक्र – शायद यही है मालिक का करम, जो अंधेरे में रोशनी की किरन बनकर आया।
कभी-कभी एक चमत्कार पूरी तकदीर बदल देता है, और यही करड़ा में हुआ – जहां दो मासूम बकरों ने एक गरीब घराने को शोहरत और उम्मीद की नई राह दिखा दी।







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