जब तक नहीं होगा तबादला, तब तक जारी रहेगा गतिरोध; रानीवाड़ा बार एसोसिएशन ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर तहसीलदार को अवकाश पर भेजने की रखी मांग, प्रशासन मौन
रानीवाड़ा। उपखंड मुख्यालय सहित ग्रामीण इलाकों में इन दिनों राजस्व और वकीलों के बीच छिड़ी जंग अब पूरी तरह से आर-पार के मोड़ पर आ चुकी है। रानीवाड़ा बार एसोसिएशन ने गुरुवार को क्षेत्र के तहसीलदार हनुमत सिंह देवड़ा के खिलाफ जो मोर्चा खोला था, उसकी धधक आज शुक्रवार को भी शांत नहीं हुई, बल्कि और ज्यादा उग्र हो गई। आज शुक्रवार से शुरू हुए ग्रामीण पंचायत शिविर रामपुरा में उस समय भारी अफरा-तफरी और हंगामा मच गया, जब बार एसोसिएशन के तमाम सदस्य और वरिष्ठ अधिवक्ता एकजुट होकर सीधे शिविर स्थल पर जा धमके। वकीलों ने शिविर परिसर में ही तहसीलदार के खिलाफ “तहसीलदार चोर है” के गगनभेदी नारे लगाने शुरू कर दिए, जिससे पूरा सरकारी अमला और शिविर में आए ग्रामीण सन्न रह गए।
एसडीएम को घेरा, सौंपा तीखा ज्ञापन
शिविर स्थल पर भारी नारेबाजी और हंगामे के बीच अधिवक्ताओं ने उपखंड अधिकारी सुनील कुमार को मौके पर ही एक तीखा ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में साफ शब्दों में चेतावनी दी गई है कि जब तक विवादित तहसीलदार हनुमत सिंह देवड़ा का रानीवाड़ा से तबादला नहीं हो जाता, तब तक उन्हें खुद ही तुरंत प्रभाव से अवकाश पर चले जाना चाहिए। वकीलों ने दो टूक लहजे में कहा कि अगर प्रशासन ने इस पर तुरंत अमल नहीं किया, तो वकीलों का यह रोष और विरोध प्रदर्शन अनवरत जारी रहेगा तथा हर स्तर पर सरकारी कामकाज का बहिष्कार किया जाएगा।

कुंभकर्णी नींद में सोया है शासन-प्रशासन
हैरानी की बात यह है कि इस पूरे गंभीर घटनाक्रम और राजस्व कार्यप्रणाली ठप होने के कगार पर पहुंचने के बावजूद स्थानीय शासन और जिला प्रशासन पूरी तरह से कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ नजर आ रहा है। वकीलों के इतने बड़े आक्रोश और तीखे आरोपों के बाद भी उच्च अधिकारियों द्वारा धरातल पर अब तक कोई ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया है, जिससे क्षेत्र के आमजन और दूर-दराज से आए काश्तकारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कल के उस ‘विवादित’ वाकये से भड़का वकीलों का गुस्सा
दरअसल, इस पूरे उग्र आंदोलन की नींव कल गुरुवार, 11 जून 2026 को ही पड़ गई थी। कल बार एसोसिएशन रानीवाड़ा द्वारा राजस्व मंडल अजमेर के माननीय अध्यक्ष महोदय को उपखंड अधिकारी के मार्फत एक आधिकारिक शिकायत पत्र भेजा गया था।
उस शिकायत में एडवोकेट प्रवीण विश्नोई ने आरोप लगाया था कि 10 जून को जब वे एक पुनर्विलोकन प्रार्थना पत्र पेश करने रानीवाड़ा तहसील कार्यालय की उप-पंजीयक कार्यालय शाखा में बैठे थे, तब तहसीलदार हनुमत सिंह देवड़ा ने न केवल उनका प्रार्थना पत्र लेने से साफ मना कर दिया, बल्कि बदतमीजी की हदें पार कर दीं।
शिकायत के मुताबिक तहसीलदार ने वकीलों को धमकाते हुए कहा था: > “मेरी राजनीतिक पहुंच बहुत ऊपर तक है। मैं इसी गृह जिले (जालोर) का होकर भी यहीं पदस्थापित हूं। तुम यहां से भाग जाओ, नहीं तो तुम्हें ऐसे मुकदमे में फंसाकर जेल भिजवा दूंगा कि वकालत भूल जाओगे।”
बार एसोसिएशन की दो टूक मांग
कल के इस दुर्व्यवहार के बाद बार एसोसिएशन की आवश्यक बैठक बुलाई गई, जिसमें सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर तहसीलदार के इस उद्दंड कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा की। जिला कलेक्टर जालोर और राजस्व मंडल अजमेर को भेजी गई प्रतियों में वकीलों ने स्पष्ट लिखा है कि “चूंकि जालोर गृह जिला होने के कारण तहसीलदार कानून को ताक पर रखकर अपनी ऊंची राजनीतिक पहुंच का धौंस जमा रहे हैं, इसलिए उन्हें अविलंब इस गृह जिले से हटाया जाए।” आज रामपुरा शिविर में हुआ प्रदर्शन इसी गुस्से का विस्तार है, और वकीलों ने साफ कर दिया है कि जब तक देवड़ा की यहां से रवानगी नहीं होगी, रानीवाड़ा का न्यायालय और राजस्व गलियारा शांत नहीं बैठने वाला।



