राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्वाचन के लिए राजस्थान से नाम तय, जानिए क्या होती है इन प्रस्तावक सदस्यों की जिम्मेदारी
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्वाचन की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरणों की ओर बढ़ रही है। राजस्थान से इस चुनाव के लिए 20 प्रमुख प्रस्तावक सदस्यों की सूची आधिकारिक रूप से जारी कर दी गई है। इस सूची में जहां जयपुर संभाग का दबदबा स्पष्ट दिखाई दे रहा है, वहीं जोधपुर संभाग से भी प्रमुख दिग्गजों को जगह मिली है।
सूची में शामिल सभी 20 प्रस्तावक:
- भजन लाल शर्मा – मुख्यमंत्री, राजस्थान सरकार
- मदन राठौड – प्रदेशाध्यक्ष, भाजपा राजस्थान
- वसुंधरा राजे – राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भाजपा, पूर्व मुख्यमंत्री
- दिया कुमारी – उप मुख्यमंत्री, राजस्थान सरकार
- प्रेम चंद बैरवा – उप मुख्यमंत्री, राजस्थान सरकार
- अलका सिंह गुर्जर – राष्ट्रीय मंत्री, भाजपा
- अरुण चतुर्वेदी – अध्यक्ष, वित्त आयोग, राजस्थान सरकार
- राजेंद्र राठौड – पूर्व नेता प्रतिपक्ष, राजस्थान विधानसभा
- अशोक परनामी – पूर्व प्रदेशाध्यक्ष, भाजपा राजस्थान
- सतीश पूनिया – पूर्व प्रदेशाध्यक्ष, भाजपा राजस्थान
- सी.पी. जोशी – सांसद चित्तौडगढ, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष
- घनश्याम तिवाडी – राज्य सभा सदस्य
- मंजू शर्मा – सांसद, जयपुर
- ओंकार सिंह लखावत – अध्यक्ष धरोहर संरक्षण बोर्ड, राजस्थान सरकार
- सी.आर. चौधरी – अध्यक्ष, किसान आयोग, राजस्थान सरकार
- जसवंत सिंह विश्नोई – अध्यक्ष, जीव जंतु कल्याण बोर्ड, राजस्थान सरकार
- कैलाश चौधरी – प्रदेशाध्यक्ष, किसान मोर्चा भाजपा
- प्रभु लाल सैनी – पूर्व मंत्री, राजस्थान सरकार
- नारायण पंचारिया – पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष, भाजपा राजस्थान
- अजय पाल सिंह – पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष, भाजपा राजस्थान
जोधपुर संभाग का प्रतिनिधित्व
इस सूची में जोधपुर क्षेत्र से जसवंत सिंह विश्नोई, कैलाश चौधरी और नारायण पंचारिया जैसे कद्दावर नेताओं को प्रस्तावक बनाकर संतुलन साधने का प्रयास किया गया है। हालांकि, पाली, जालौर और सिरोही जैसे जिलों की सीधी भागीदारी इस सूची में मदन राठौड के अलावा न के बराबर है।
क्या होती है प्रस्तावकों की ‘ड्यूटी’?
संगठनात्मक चुनावों में प्रस्तावक सदस्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है:
- नामांकन की वैधता: किसी भी उम्मीदवार के नाम को आगे बढ़ाने के लिए निर्धारित संख्या में प्रस्तावक होना अनिवार्य है। ये सदस्य आधिकारिक रूप से अध्यक्ष पद के उम्मीदवार के नाम का प्रस्ताव रखते हैं।
- समर्थन का आधार: ये सदस्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि संबंधित उम्मीदवार को उनके राज्य या इकाई का समर्थन प्राप्त है।
- चुनावी प्रक्रिया: नामांकन पत्र भरते समय इन सदस्यों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं, जिसके बिना नामांकन वैध नहीं माना जाता।
कब है चुनाव की संभावना?
पार्टी सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावक सदस्यों की सूची जारी होने के साथ ही चुनावी हलचल तेज हो गई है। संभावना जताई जा रही है कि जनवरी के अंत तक या फरवरी के शुरुआती सप्ताह में राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्वाचन की प्रक्रिया पूर्ण कर ली जाएगी। फिलहाल, यह सूची राजस्थान भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के विश्वास को दर्शाती है।
क्षेत्रीय असंतुलन पर उठते सवाल
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या भाजपा के आगामी संगठनात्मक ढांचे में भी इसी तरह का क्षेत्रीय असंतुलन देखने को मिलेगा? पाली-जालौर-सिरोही बेल्ट, जो हमेशा से भाजपा का गढ़ रहा है, वहां के नेताओं को राष्ट्रीय स्तर की इस प्रक्रिया में प्राथमिकता न मिलना स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। हैरानी की बात यह है कि जालौर और सिरोही जैसे क्षेत्रों से एक भी प्रतिनिधि को इस सूची में स्थान नहीं मिल सका है। वहीं, पाली जिले से केवल मदन राठौड का नाम शामिल है, लेकिन वह भी उनकी वर्तमान संगठनात्मक स्थिति (प्रदेशाध्यक्ष) के कारण अपरिहार्य माना जा रहा है।



