रेवदर। जहां आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और महंगी तकनीकों से निराश हुए निसंतान दंपतियों के लिए लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी निराशा ही हाथ लगी, वहीं रेवदर के डॉ. एस.एस. भाटी ने अपनी विशेषज्ञता और कम खर्च में ऐसे कई परिवारों के जीवन में खुशियों की सौगात दी है। डॉ. भाटी की सफल चिकित्सा पद्धति ने संतान सुख की आस छोड़ चुके दंपतियों के लिए एक नई उम्मीद जगाई है।
ऐसा ही एक मामला हरजी निवासी दिलशाद पत्नी अनवर खान का है। शादी के 10 साल बाद भी संतान सुख से वंचित इस दंपति ने रेवदर, सिरोही, डीसा, पालनपुर और उदयपुर के बड़े-बड़े अस्पतालों में लाखों रुपए खर्च किए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। सभी रिपोर्ट सामान्य होने के बावजूद कोई सफलता नहीं मिल रही थी। निराशा के इस दौर में, एक रिश्तेदार की सलाह पर वे डॉ. भाटी के पास पहुंचे। डॉ. भाटी ने पुरानी रिपोर्ट्स देखकर उन्हें पूरा भरोसा दिलाया। हैरान करने वाली बात यह है कि जहां लाखों खर्च करने के बाद भी सफलता नहीं मिली, वहीं डॉ. भाटी की मात्र 700 रुपए की दवा से ही दिलशाद का गर्भ ठहर गया। सोनोग्राफी रिपोर्ट में बच्चे की सामान्य स्थिति की खबर मिलते ही इस मुस्लिम परिवार की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा।
इसी तरह, थलवाड़ (सायला) की सकना कुंवर पत्नी नैन सिंह राजपूत की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। शादी के 9 साल बाद भी संतान सुख से वंचित इस दंपति ने भी राजस्थान और गुजरात के कई आईवीएफ सेंटरों में लाखों रुपए खर्च किए थे। अंततः भोपाजी की सलाह पर उन्होंने डॉ. भाटी से इलाज करवाया। उनका इलाज भी सफल रहा और हाल ही में सकना कुंवर ने एक पुत्र और एक पुत्री (जुड़वां) को जन्म दिया है, जिससे उनके घर में खुशियों का माहौल है।
डॉ. एस.एस. भाटी की यह सफलता उन निसंतान दंपतियों के लिए एक नई आशा की किरण है, जो महंगी चिकित्सा और विफल इलाज से थक चुके हैं। उनकी यह उपलब्धि चिकित्सा जगत में एक मिसाल बन रही है।







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