भील समाज की एकजुटता का बड़ा संदेश: राणा पूंजा की विरासत के साथ सांसद राजकुमार रोत का पहला रानीवाड़ा दौरा, हलचल तेज
रानीवाड़ा | राजस्थान की सियासत में 'आदिवासी अस्मिता' की नई लहर पैदा करने वाले डूंगरपुर-बांसवाड़ा सांसद राजकुमार रोत आगामी 30 अप्रैल को रानीवाड़ा के दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरे को लेकर रानीवाड़ा के सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है, क्योंकि सांसद का यह दौरा महज एक पारिवारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं दिख रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सांसद रोत खारा गांव में शिक्षक जयकिशन भील के पारिवारिक समारोह में शिरकत करेंगे। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 9 बजे रानीवाड़ा स्थित ऐतिहासिक राणा पूंजा भील स्मारक पर माल्यार्पण के साथ होगी, जो सीधे तौर पर समाज की गौरवशाली विरासत से जुड़ने का एक सशक्त संदेश माना जा रहा है।

शादी की बारात और सियासी बिसात
कहने को तो यह एक वैवाहिक आयोजन है—रानीवाड़ा थाने के सह-प्रभारी पारसाराम राणा के यहां खारा से मार साब के पुत्र की बारात आ रही है यानी अध्यापक जयकिशन के पुत्र महेंद्र राणा की बारात सांचौर के लिए रवाना होगी। लेकिन, इस 'बारात' के बहाने जुटने वाला हुजूम रानीवाड़ा की तस्वीर बदलने का संकेत दे रहा है।

भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा जालोर के स्थानीय संयोजक जयेश भील का कहना है कि भील समाज अब जागरूक हो चुका है और अपने 'सिरमौर' सांसद का स्वागत करने के लिए समूचा समाज आतुर है। सांसद बनने के बाद इस क्षेत्र की यह उनकी पहली यात्रा है, जिसने स्थानीय राजनीतिक दिग्गजों की पेशानी पर बल ला दिए हैं।
बदलने जा रही है तस्वीर!
सर्कल न्यूज़ नेटवर्क के सूत्रों की मानें तो रोत का यह दौरा आने वाले समय में रानीवाड़ा और सांचौर क्षेत्र में एक नए सामाजिक-राजनैतिक ध्रुवीकरण की शुरुआत हो सकता है। जयेश भील बताते हैं कि सांसद का राणा पूंजा भील स्मारक पर माल्यार्पण करना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि समाज की एकजुटता का आह्वान है।

इस एक दिवसीय दौरे में जिस तरह से भीड़ जुटने की संभावना है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यहां की जमीनी राजनीति की तस्वीर पूरी तरह बदलने जा रही है। क्या यह बारात केवल सांचौर जाएगी या फिर रानीवाड़ा में किसी नई 'सियासी बारात' की नींव रखेगी, यह तो वक्त ही बताएगा।







पाठक टिप्पणियां (Comments)
0 टिप्पणियां