मुख्य बिंदु:
- प्रांत उपाध्यक्ष सोमाराम चौधरी की हुंकार: अब आश्वासन नहीं, समाधान चाहिए
- मंगलवार सुबह 11 बजे से उपखंड कार्यालय के सामने शुरू होगा महापड़ाव
- बिजली, पानी, बीमा और समर्थन मूल्य पर प्रशासन को सीधी चेतावनी
रानीवाड़ा। रानीवाड़ा में किसानों के सब्र का बांध अब टूट चुका है। सरकारी सिस्टम की लेतलाली, झूठे वादों और प्रशासनिक अनदेखी से नाराज भारतीय किसान संघ ने अब सरकार के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। मूंगफली खरीद में धांधली, दिन में बिजली के अधूरे वादे और फसल बीमा में हुए भारी गोलमाल को लेकर संघ ने प्रशासन को 'करो या मरो' की चेतावनी दे दी है। संघ ने साफ कर दिया है कि अगर मांगों पर तुरंत सुनवाई नहीं हुई, तो कल यानी मंगलवार (09.12.2025) से उपखंड कार्यालय के सामने ऐसा धरना शुरू होगा जो समाधान होने तक जारी रहेगा.
सोमाराम चौधरी ने संभाली कमान, प्रशासन को घेरा भारतीय किसान संघ के जोधपुर प्रांत उपाध्यक्ष सोमाराम चौधरी ने सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि "सिस्टम में बैठे लोग किसानों को गुमराह कर रहे हैं। मूंगफली खरीद केंद्र पर किसानों को परेशान किया जा रहा है और बीमा कंपनियां प्रीमियम लेकर गायब हैं।" सोमाराम चौधरी ने क्षेत्र के सभी किसानों से आह्वान किया है कि वे अपनी हकों की लड़ाई के लिए मंगलवार सुबह 11 बजे तहसील कार्यालय रानीवाड़ा पहुंचे.
सरकार के खिलाफ 9 सूत्रीय 'चार्जशीट' (प्रमुख मांगें) किसान संघ ने मुख्यमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर निम्नलिखित ज्वलंत मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है:
- मूंगफली खरीद में मनमानी बंद हो: खरीद केंद्रों पर 'क्वालिटी' के नाम पर किसानों को बैरंग लौटाना बंद किया जाए। बारिश से छिलका काला हुआ है लेकिन दाना सही है, इसलिए बिना शर्त तुलाई हो.
- तुलाई उसी दिन हो: किसानों को तुलाई के लिए दिनों-दिन इंतजार न करवाया जाए। जिस दिन किसान आए, उसी दिन उसकी फसल तुली जाए.
- दिन में बिजली का वादा पूरा करो: मुख्यमंत्री के वादे के बावजूद किसानों को दिन में बिजली नहीं मिल रही। 33/11 KV जीएसएस की क्षमता बढ़ाकर 2 पारियों में बिजली सप्लाई सुनिश्चित की जाए.
- ट्रांसफार्मर 72 घंटे में बदलें: जले हुए ट्रांसफार्मर बदलने में 5-10 दिन लगाए जा रहे हैं, इसे घटाकर 72 घंटे किया जाए.
- बैंकों की मनमानी पर रोक: जिन किसानों के खाते से फसल बीमा का प्रीमियम (KCC) काटा गया लेकिन पॉलिसी नहीं दी गई, उनके नुकसान की भरपाई अब बैंक करे.
- बीमा सर्वे में पारदर्शिता: फसल खराबे का सर्वे कृषि पर्यवेक्षक की उपस्थिति में ही हो, बीमा कंपनी के कर्मचारी अकेले खेत में जाकर खानापूर्ति न करें.
- खराबा रिपोर्ट में धांधली: पटवारियों को 33% से कम खराबा लिखने का दबाव बनाना बंद हो। जब हकीकत में 50% से ज्यादा फसल खराब है, तो रिपोर्ट सही क्यों नहीं बन रही?.
- जल जीवन मिशन का सच: 'हर घर नल' योजना मजाक बन गई है। लोगों से पैसे लिए गए, नल लगाए, लेकिन पानी नदारद है। यह योजना सरकार को बदनाम कर रही है.
- यूरिया की किल्लत: क्षेत्र में यूरिया की भारी कमी है, इसे तत्काल उपलब्ध करवाया जाए.
चेतावनी: ज्ञापन में स्पष्ट लिखा गया है कि यदि उपरोक्त समस्याओं का समाधान नहीं होता है, तो दिनांक 09.12.2025 (मंगलवार) से किसान अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी.







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