इंसानों को जहर परोसने वाला खुद को पाक-साफ दिखाने के लिए गौशाला में खिला रहा था गायों को चारा; मोबाइल से दूरी बना ई-मित्र से भेजता था घर पैसे, पर एक अदद पुरानी रेल टिकट ने खोल दी किस्मत की खिड़की
विशेष संवाददाता जयपुर/श्रीगंगानगर। नशे के सौदागरों और उनके आकाओं के खिलाफ राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) का कहर लगातार जारी है। झारखंड और मध्य प्रदेश में ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद एएनटीएफ की नजरें इस बार पंजाब के बॉर्डर पर टिकी थीं। एएनटीएफ के जांबाजों ने लगातार पांचवें दिन पंजाब की धरती पर तगड़ी चोट करते हुए, पिछले एक साल से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहे 25 हजार रुपये के इनामी कुख्यात तस्कर सुनील कुमार उर्फ सुनील को फिरोजपुर जिले की एक गौशाला से धर दबोचा। इंसानों की नसों में जहर घोलने वाला यह शातिर अपराधी पुलिस से बचने के लिए पिछले एक साल से गौशाला में गायों की सेवा कर अपने पाप धोने का ढोंग कर रहा था।
एएनटीएफ के पुलिस महानिरीक्षक (IG) श्री विकास कुमार ने बताया कि अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) श्री दिनेश एम.एन. के सटीक मार्गदर्शन और दिशा-निर्देशों में चलाए जा रहे 'ऑपरेशन मदाग्नि' के तहत यह एक और बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। गिरफ्तार आरोपी सुनील कुमार (पुत्र नक्षत्र सिंह, जाति मजहबी सिख) निवासी 10 सरकारी, तहसील विजयनगर, थाना जैतसर (श्रीगंगानगर) का रहने वाला है, जिसकी गिरफ्तारी पर श्रीगंगानगर पुलिस अधीक्षक द्वारा 25,000 रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
तस्करी की दुनिया का पूरा कच्चा चिट्ठा: जमीन के फर्जीवाड़े से पहुंचा हेरोइन के धंधे तक
पकड़े गए शातिर आरोपी सुनील की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। उसकी इस दलदल में एंट्री और सलाखों तक पहुंचने के सफर की पूरी क्रोनोलॉजी बेहद दिलचस्प है:
- पढ़ाई से भंग हुआ मोह: सुनील ने केवल आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की। इसके बाद उसका पढ़ाई से मन उचट गया और वह आवारा दोस्तों की संगत में पड़ गया।
- लत ने बनाया चोर: बुरी सोहबत के कारण सुनील को नशे की लत लग गई। नशे की लत को पूरा करने और पैसों का इंतजाम करने के लिए उसने पहले छोटी-मोटी चोरियां शुरू कीं।
- जमीनों का फर्जीवाड़ा: साल 2020 के आसपास उसने प्रॉपर्टी के काम में पैर आजमाया। कम समय में ज्यादा पैसा कमाने के लालच में उसने लोगों को फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीनों की रजिस्ट्रियां करवानी शुरू कर दीं।
- कर्ज का दलदल और पुलिस का शिकंजा: जमीनों के फर्जीवाड़े और नशे की लत के कारण उस पर भारी कर्ज हो गया। इस दौरान उसके खिलाफ श्रीगंगानगर जिले के घड़साना, विजयनगर, छत्तरगढ़ और जैतसर थानों में धोखाधड़ी और चोरी के कई मुकदमे दर्ज हुए।
'प्रथम ग्रासे मक्षिका पातः'— पहली ही खेप में डूबी लुटिया साल 2021 से 2024 के बीच लगातार मुकदमे दर्ज होने के बाद सुनील को लगा कि चोरी और जमीनों के धंधे से कोई मोटी कमाई नहीं हो रही है। उसने रातों-रात अमीर बनने के लिए सीधे नशे की बड़ी तस्करी में हाथ डालने की सोची। उसने अवैध मादक पदार्थों (हेरोइन) की तस्करी का धंधा शुरू किया।
लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया; अपनी पहली ही बड़ी खेप में उसने 280 ग्राम हेरोइन अपने एक गुर्गे को देकर सूरतगढ़ पहुंचाने के लिए रवाना की। मगर इससे पहले कि खेप पहुंचती, सूरतगढ़ पुलिस ने उसके सप्लायर को रंगे हाथों दबोच लिया और एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के इस मामले में सुनील का नाम मुख्य सूत्रधार के रूप में सामने आ गया। इसे कहते हैं— 'प्रथम ग्रासे मक्षिका पातः' यानी पहला निवाला मुंह में डालते ही मक्खी गिर जाना। नशे के धंधे में पहली ही चाल में सुनील की पूरी खेप बरामद हो गई और वह फरार हो गया।
कैसे पहुंची पुलिस? घर में मिली एक पुरानी रेल टिकट ने पलटी बाजी
जब श्रीगंगानगर पुलिस और एएनटीएफ की संयुक्त टीम तस्कर सुनील को पकड़ने के लिए उसके पैतृक घर पहुंची, तो वह वहां से गायब मिला। लेकिन एएनटीएफ के अनुभवी अफसरों ने जब घर की बारीकी से तलाशी ली, तो वहां से फिरोजपुर (पंजाब) की एक पुरानी रेल टिकट हाथ लगी।
बस, इसी एक अदद टिकट ने पुलिस को बड़ा सुराग दे दिया। टीम को शक हुआ तो उन्होंने सुनील की तमाम रिश्तेदारियों और जान-पहचान वालों का पूरा बैकग्राउंड खंगाला, लेकिन फिरोजपुर में उसका दूर-दूर तक कोई रिश्तेदार नहीं था। एएनटीएफ की टीम का शक यकीन में बदल गया कि आरोपी पुलिस से छिपने के लिए फिरोजपुर या उसके आस-पास ही कहीं शरण लिए हुए है।
एएनटीएफ की टीम तुरंत उस ट्रेन टिकट को आधार बनाकर हुलिए और पुरानी तस्वीरों के साथ फिरोजपुर पहुंची। स्थानीय स्तर पर खुफिया जाल बिछाया गया और तसल्ली से छानबीन की गई। आखिरकार मुखबिरों से पक्का इनपुट मिला कि आरोपी ने पहचान छुपाकर एक स्कूल के पास बनी गौशाला में पनाह ले रखी है।
शातिर तस्कर की चालाकी: न मोबाइल, न संपर्क; ई-मित्र से भेजता था घर पैसे
पुलिस को चकमा देने के लिए सुनील बेहद शातिर तरीके अपना रहा था:
- गायों की सेवा की आड़: वह पिछले करीब 1 साल से इस गौशाला में रह रहा था और दिन-भर गायों की सेवा करता था ताकि किसी को उस पर रत्ती भर भी शक न हो। इसके बदले गौशाला प्रबंधन उसे गुजारे लायक कुछ पैसे भी देता था।
- डिजिटल दुनिया से तौबा: तकनीकी सर्विलांस (लोकेशन ट्रेसिंग) से बचने के लिए सुनील अपने पास कोई मोबाइल फोन या सिम कार्ड नहीं रखता था।
- ई-मित्र का सहारा: गौशाला से होने वाली अपनी कमाई को वह खुद सीधे घर भेजने के बजाय, स्थानीय ई-मित्र केंद्र के माध्यम से अपने परिवार तक पहुंचाता था।
आधे घंटे तक चला 'चूहे-बिल्ली' का खेल, स्कूल की दीवार फांदते ही दबोचा
गौशाला की पक्की लोकेशन मिलते ही एएनटीएफ की टीम ने बिना वक्त गंवाए पूरी गौशाला को चारों तरफ से घेर लिया और अचानक धावा बोल दिया। अचानक सामने पुलिस को देखकर सुनील के पैरों तले जमीन खिसक गई। वह हक्का-बक्का रह गया।
खुद को घिरता देख उसने भागने की कोशिश की और गौशाला से दौड़कर पास ही बनी एक स्कूल की ऊंची दीवार को फांद गया। लेकिन एएनटीएफ के जवान भी पूरी तैयारी के साथ आए थे। टीम के जांबाजों ने फुर्ती दिखाते हुए दीवार पर छलांग लगाई। दीवार के पार जाकर देखा तो सुनील एक ओट में छिपा हुआ सांसें रोके बैठा था। करीब आधे घंटे तक चले इस चूहे-बिल्ली के रोमांचक खेल का अंत करते हुए एएनटीएफ ने झपट्टा मारकर सुनील को धर दबोचा।
टीम को मिलेगी विशेष शाबाशी, आईजी ने की जनता से अपील
एएनटीएफ के आईजी श्री विकास कुमार ने बताया कि इस पूरी शानदार और सूझबूझ भरी कार्रवाई में शामिल टीम के सभी अधिकारियों और जवानों की भूमिका बेहद सराहनीय रही है। इस सफलता के लिए पूरी टीम को जल्द ही एएनटीएफ मुख्यालय पर आयोजित होने वाले एक विशेष कार्यक्रम में सम्मानित और पुरस्कृत किया जाएगा।
एएनटीएफ की जनता से अपील: आपकी पहचान रहेगी पूरी तरह गुप्त पुलिस महानिरीक्षक श्री विकास कुमार ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी भी नागरिक को किसी भी नशा तस्कर, अपराधी या संदिग्ध गतिविधि के बारे में कोई भी जानकारी मिले, तो वे तुरंत एएनटीएफ कंट्रोल रूम नंबर: 0141-2502877 अथवा व्हाट्सएप नंबर: 9261225056 पर सूचना दे सकते हैं। सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम, पता और पहचान पूरी तरह से गोपनीय (Secret) रखी जाएगी।







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