- निरीक्षण: जिला न्यायाधीश बन्नालाल जाट ने मंगलवार को भीनमाल और सांचौर उप कारागृहों का जायजा लिया।
- सुविधाएं: अधिकारियों को निर्देश दिए कि बंदियों को मिलने वाली सुविधाओं में किसी प्रकार की कोताही न बरती जाए।
- कानूनी सहायता: बंदियों को निशुल्क विधिक सहायता और अधिवक्ता उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई।
जालोर, 11 अगस्त: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला न्यायाधीश बन्नालाल जाट ने मंगलवार को उप कारागृह भीनमाल व सांचौर का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जेल की व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया और वहां बंद कैदियों से सीधा संवाद कर मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की।
निरीक्षण के दौरान जिला न्यायाधीश ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कारागृह में बंद बंदियों को नियमानुसार मिलने वाली सभी सुविधाएं समय पर और उचित गुणवत्ता के साथ उपलब्ध कराई जाएं। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने विशेष रूप से यह भी निर्देश दिए कि जेल में बाहर से खरीदे जाने वाला सामान अच्छी गुणवत्ता का होना चाहिए।
निशुल्क विधिक सहायता की दी जानकारी
संवाद के दौरान जिला न्यायाधीश ने बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि जिन बंदियों के मामलों में पैरवी के लिए कोई अधिवक्ता नियुक्त नहीं है, वे तालुका विधिक सेवा समिति के माध्यम से निशुल्क अधिवक्ता प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने बंदियों से उनके मुकदमों में जमानत, अपील और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं की भी जानकारी ली।
सुधार और अच्छे नागरिक बनने की अपील
बंदियों को समझाइश देते हुए जिला न्यायाधीश ने नशा न करने का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि अतीत में जो भी परिस्थितियां रहीं, उनके कारण यहां पहुंचना पड़ा, लेकिन जब भी वे यहां से बाहर जाएं, तो समाज में एक अच्छा व्यवहार रखें और देश के जिम्मेदार नागरिक बनकर जीवन जिएं।
इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश उमेश वीर ने भी बंदियों को उनके अधिकारों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने निशुल्क विधिक सहायता योजना के तहत अपने मामलों में मुफ्त पैरवी के लिए वकील पाने हेतु आवेदन करने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी।









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