विज्ञान भवन में NCORD की 10वीं बैठक; अमित शाह ने जारी किया ‘विज़न डॉक्यूमेंट 2026-2029’ और शुरू किया महा-अभियान
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की 10वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में देश को ड्रग्स से पूरी तरह मुक्त करने के लिए एक अभूतपूर्व और आक्रामक रणनीति का खाका खींचा गया। अमित शाह ने इस मौके पर “मादक पदार्थ नियंत्रण पर विज़न डॉक्यूमेंट (2026-2029)” और “एनसीबी वार्षिक रिपोर्ट-2025” का विमोचन किया। इसके साथ ही जम्मू और गुवाहाटी में एनसीबी के नए ज़ोनल कार्यालयों का ई-उद्घाटन भी संपन्न हुआ।
इस अवसर पर एक विशाल ‘ऑनलाइन ड्रग्स डिस्पोज़ल फोर्टनाइट कैंपेन’ की शुरुआत की गई, जिसके तहत देश भर में 6,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 2,09,500 किलोग्राम नशीले पदार्थों को नष्ट करने का लक्ष्य रखा गया है।
‘डिटेक्ट, डिसरप्ट और डिस्ट्रॉय’ की नीति से टूटेगी तस्करों की कमर
अमित शाह ने साफ शब्दों में कहा कि देश इस समय ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई के एक बेहद निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। अगले 3 साल यह तय करेंगे कि हम नशे पर विजय प्राप्त करते हैं या नहीं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का लक्ष्य 2047 तक ‘नशामुक्त भारत’ बनाना है। गृह मंत्री ने नार्को टेररिज्म के उभरते इकोसिस्टम से निपटने के लिए 3D फॉर्मूला दिया:
- Detect (पहचान): ड्रोन ड्रॉप्स, डार्कनेट, क्रिप्टो पेमेंट और समुद्री मार्गों जैसे नए खतरों को आधुनिक टेक्नोलॉजी और ह्यूमन इंटेलिजेंस (HUMINT) के जरिए ट्रैक करना।
- Disrupt (छिन्न-भिन्न करना): ड्रग तस्करों के सोर्स, ट्रांजिट, फाइनेंस और उनकी लीडरशिप पर सीधा प्रहार करना। अवैध प्रयोगशालाओं और फसलों को पूरी तरह तबाह करना।
- Destroy (नष्ट करना): पकड़ा गया किंगपिन किसी भी हाल में न छूटे, ऐसी सख्त पैरवी करना और वित्तीय जांच (ED) के जरिए उनकी संपत्तियों को सीज कर नेटवर्क को दोबारा खड़ा न होने देना।
“अपराधियों के प्रति ‘रूथलेस’ (कठोर) और शिकार हुए युवाओं के प्रति ‘सिम्पैथेटिक’ (सहानुभूतिपूर्ण) दृष्टिकोण रखना होगा। पीड़ित बच्चों को उंगली पकड़कर सही रास्ते पर लाना समाज और सरकार की साझा जिम्मेदारी है।”
— अमित शाह, गृह मंत्री
चार मजबूत स्तंभों पर टिकी है नई रणनीति
आगामी तीन वर्षों (2026-2029) का नया रोडमैप ‘होले ऑफ गवर्नमेंट’ (Whole of Government) और ‘होले ऑफ सोसाइटी’ (Whole of Society) अप्रोच के तहत इन चार स्तंभों पर काम करेगा:
- एनफोर्समेंट, इंटेलिजेंस और ऑपरेशंस: लक्षित और खुफिया जानकारी आधारित सटीक कार्रवाई।
- प्रीकर्सर एवं सिंथेटिक ड्रग कंट्रोल: उत्पादन के स्तर पर ही नशीली दवाओं की रोकथाम।
- डिमांड और हार्म रिडक्शन: समाज, शिक्षा संस्थानों और पुनर्वास केंद्रों के माध्यम से मांग को घटाना।
- कैपेसिटी बिल्डिंग और कोऑर्डिनेशन: सभी राज्यों की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) को मजबूत और जवाबदेह बनाना।
आंकड़े दे रहे हैं गवाही: बढ़ रही है कार्रवाई की रफ्तार
बैठक में पिछले सालों के तुलनात्मक आंकड़े भी सामने रखे गए, जो यह दर्शाते हैं कि नार्को नेटवर्क के खिलाफ शिकंजा लगातार कसता जा रहा है:
| कार्य विवरण | संप्रग शासन (2004-2014) | मोदी शासन (2014-2026) |
| जब्त ड्रग्स की मात्रा | 26 लाख किलोग्राम | 1 करोड़ 18 लाख किलोग्राम |
| जब्त ड्रग्स की कीमत | 40,000 करोड़ रुपये | 1 लाख 84 हजार करोड़ रुपये |
| नष्ट की गई ड्रग्स | 3,26,000 किलोग्राम (मूल्य 8,000 करोड़) | 42,47,000 किलोग्राम (मूल्य 89,896 करोड़) |
| पंजीकृत मामले (केस) | 1,73,000 | 8,75,000 |
| कुल गिरफ्तारियां | 1,95,000 | 10,97,000 |
| नष्ट की गई अफीम खेती | 10,000 एकड़ (साल 2020) | 42,282 एकड़ (साल 2025) |
राज्यों को सख्त निर्देश: गठित करें एक्सक्लूसिव NDPS कोर्ट
गृह मंत्री ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस प्रमुखों को निर्देश दिए कि वे जिला और राज्य स्तर की NCORD बैठकों को केवल रस्म न बनाकर परिणाम-उन्मुख (Output-oriented) बनाएं।
- फास्ट ट्रैक कोर्ट: बड़े मामलों में जल्द सजा सुनिश्चित करने के लिए गृह मंत्रालय देश में ‘एक्सक्लूसिव NDPS कोर्ट’ के गठन की दिशा में काम कर रहा है। राज्यों को भी अपने हाई कोर्ट के माध्यम से विशेष अदालतें बनानी चाहिए।
- विदेशी तस्करों पर नकेल: विदेश में छिपे ड्रग माफियाओं और गैंगस्टरों को वापस लाने के लिए सीबीआई (CBI) के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस और प्रत्यर्पण की कार्रवाई तेज की जाए।
- ड्रग-फ्री कैंपस: शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से स्कूलों और कॉलेजों में ‘ड्रग-फ्री कैंपस’ का फ्रेमवर्क लागू किया जाएगा, जिसमें शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका तय होगी।



