निर्वाचन आयुक्त का बड़ा खुलासा: 15 अप्रैल तक पूरी होगी चुनावी प्रक्रिया; ओबीसी रिपोर्ट आए या न आए, समय पर ही डलेंगे वोट।
लोकतंत्र के महाकुंभ की तैयारी
जयपुर। राजस्थान की राजनीति में सरगर्मी अपने चरम पर है। प्रदेश के गांव-गलियारों से लेकर सत्ता के गलियारों तक, बस एक ही चर्चा है—’गांव की सरकार’ कब चुनी जाएगी? सर्किल न्यूज़ नेटवर्क आपको बता रहा है कि वह घड़ी अब आ चुकी है। राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश की ग्राम पंचायतों और उन जिला परिषदों में, जहाँ प्रशासक लगे हुए हैं, चुनाव कराने का पूरा ‘ब्लूप्रिंट’ तैयार कर लिया है। यह केवल एक चुनाव नहीं, बल्कि राजस्थान के ग्रामीण अंचलों में लोकतंत्र का वह महाकुंभ होगा, जिसकी गूंज मार्च के तपते मौसम में और भी तेज सुनाई देगी।
निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह के बड़े संकेत
राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने खास बातचीत में स्पष्ट कर दिया है कि आयोग मार्च के पहले सप्ताह में चुनाव की अधिसूचना जारी करने की योजना बना रहा है। कार्यक्रम की घोषणा होते ही प्रदेश भर में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी। आयोग का लक्ष्य 31 मार्च तक पंचायत चुनाव के तीनों चरणों को संपन्न कराना है, जबकि अप्रैल के महीने में नगर निकायों की चुनावी बिसात बिछाई जाएगी।
ओबीसी आरक्षण और सुप्रीम कोर्ट का ‘हंटर’ चुनावों को लेकर सबसे बड़ा पेंच ओबीसी सीटों के निर्धारण को लेकर फंसा हुआ था। हालांकि, राजेश्वर सिंह ने साफ किया कि अगर ओबीसी आयोग समय पर रिपोर्ट नहीं भी देता है, तब भी संवैधानिक प्रावधानों के तहत चुनाव समय पर ही कराए जाएंगे। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने भी 5 जनवरी को सख्त निर्देश दिए थे कि 15 अप्रैल 2026 तक हर हाल में चुनावी प्रक्रिया पूरी की जाए।

प्रत्याशियों के मन में सवाल: संतान और शिक्षा का पेंच इस ‘मंडे स्पेशल स्टोरी’ में सबसे ज्यादा चर्चा उन सवालों की है जो संभावित उम्मीदवारों की धड़कनें बढ़ा रहे हैं। क्या दो से अधिक संतान वाले लोग चुनाव लड़ पाएंगे? और पंच-सरपंच के लिए शैक्षणिक योग्यता क्या रहेगी? इन सवालों पर आयुक्त ने गेंद सरकार के पाले में डालते हुए कहा कि योग्यता और कानून में संशोधन करना राज्य सरकार और विधानसभा का कार्य है। सरकार जो भी प्लेटफॉर्म तैयार करके देगी, आयोग उसी आधार पर मैदान सजाएगा।
तैयारियां अंतिम दौर में आयोग ने 29 जनवरी को ही वार्डवार मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया है। अब केवल दावों और आपत्तियों का इंतजार है। संवेदनशील और अति संवेदनशील मतदान केंद्रों को चिन्हित करने के निर्देश भी जिला निर्वाचन अधिकारियों को भेज दिए गए हैं। साफ़ है कि राजस्थान अब एक बड़े चुनावी दंगल के लिए तैयार है, जहाँ मार्च की छुट्टियाँ और त्योहारों के बीच लोकतंत्र का भविष्य तय होगा।



