राजस्थान उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को चार सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यह मामला 55 नगरपालिकाओं के चुनाव न करवाने से जुड़ा है, जिनका कार्यकाल नवंबर 2024 में समाप्त हो चुका था। याचिकाकर्ता संयम लोढ़ा ने आरोप लगाया है कि सरकार ने संवैधानिक बाध्यता का उल्लंघन करते हुए प्रशासक नियुक्त कर दिए, जबकि संविधान और नगरपालिका अधिनियम के तहत चुनाव करवाना अनिवार्य था।
याचिका में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 243(u) और नगरपालिका अधिनियम की धारा 11 के तहत नगरपालिकाओं का कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव करवाना आवश्यक है। याचिकाकर्ता ने सर्वोच्च न्यायालय के कई निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदाओं को छोड़कर स्थानीय निकायों के चुनाव टाले नहीं जा सकते।
याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया है और प्रशासकों की नियुक्ति को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है। न्यायालय ने इस मामले में संवैधानिक प्रावधानों की पालना सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
यह मामला स्थानीय निकायों की स्वायत्तता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। चुनाव प्रक्रिया में देरी को लेकर न्यायालय ने सरकार को फटकार लगाई है। याचिका में मांग की गई है कि प्रशासकों की नियुक्ति को रद्द कर तत्काल चुनाव करवाए जाएं।



