मथुरा-कोटा खंड पर स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली की शुरुआत; रेल मंत्री ने बताया ‘आत्मनिर्भर भारत’ का विजन
नई दिल्ली, 30 जुलाई (सर्कल न्यूज नेटवर्क)। भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ट्रेन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उच्च-घनत्व वाले दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग के मथुरा-कोटा खंड पर स्वदेशी रेलवे सुरक्षा प्रणाली ‘कवच 4.0’ का सफलतापूर्वक संचालन शुरू कर दिया गया है। यह देश में रेलवे सुरक्षा प्रणालियों के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को साकार करता है।

रेल मंत्री ने सराहा ‘कवच’ की उपलब्धि
रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने इस अवसर पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन से प्रेरणा लेते हुए, रेलवे ने कवच स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली का स्वदेश में ही डिज़ाइन, विकास और निर्माण किया है। कवच 4.0 एक प्रौद्योगिकी-प्रधान प्रणाली है, जिसे अनुसंधान डिज़ाइन एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) द्वारा जुलाई 2024 में अनुमोदित किया गया था। कई विकसित देशों को ट्रेन सुरक्षा प्रणाली विकसित करने और स्थापित करने में 20-30 साल लग गए, जबकि कोटा-मथुरा खंड पर कवच 4.0 का निर्माण बहुत ही कम समय में पूरा किया गया है। यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।”
मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि आज़ादी के बाद पिछले 60 वर्षों में देश में अंतरराष्ट्रीय स्तर की उन्नत रेल सुरक्षा प्रणालियाँ स्थापित नहीं की गई थीं। कवच प्रणाली की हालिया शुरुआत रेल और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

कवच: क्या है और कैसे काम करता है?
‘कवच’ एक स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली है, जिसे ट्रेन की गति की निगरानी और नियंत्रण करके दुर्घटनाओं को रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह सुरक्षा अखंडता स्तर 4 (SIL 4) पर डिज़ाइन किया गया है, जो सुरक्षा डिज़ाइन का उच्चतम स्तर है।
इसकी कार्यप्रणाली में कई जटिल उप-प्रणालियाँ शामिल हैं:
- आरएफआईडी टैग: ट्रैक की पूरी लंबाई में हर 1 किमी और प्रत्येक सिग्नल पर लगाए जाते हैं, जो ट्रेनों की सटीक स्थिति बताते हैं।
- दूरसंचार टावर: ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी और बिजली आपूर्ति सहित हर कुछ किलोमीटर पर स्थापित, ये टावर लोको कवच और स्टेशन कवच के बीच लगातार संचार सुनिश्चित करते हैं।
- लोको कवच: इंजन में स्थापित, यह ट्रैकसाइड टैग से जुड़ता है, दूरसंचार टावरों से सूचना प्राप्त करता है और आपातकालीन स्थिति में ब्रेक लगाने के लिए इंजन की ब्रेकिंग प्रणाली के साथ एकीकृत होता है।
- स्टेशन कवच: प्रत्येक स्टेशन और ब्लॉक सेक्शन पर स्थापित, यह लोको कवच और सिग्नलिंग प्रणाली से सूचना प्राप्त करता है और लोको कवच को सुरक्षित गति के लिए मार्गदर्शन करता है।
- ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC): उच्च गति डेटा संचार के लिए पटरियों के साथ बिछाया जाता है, जो इन सभी प्रणालियों को जोड़ता है।
- सिग्नलिंग प्रणाली: इसे लोको कवच, स्टेशन कवच और दूरसंचार टावरों के साथ एकीकृत किया जाता है।
कवच लोको पायलटों को प्रभावी ब्रेक लगाकर ट्रेन की गति बनाए रखने में मदद करेगा। कोहरे जैसी कम दृश्यता की स्थिति में भी, पायलट केबिन के अंदर लगे डैशबोर्ड पर सिग्नल और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी देख सकते हैं, जिससे केबिन से बाहर देखने की ज़रूरत नहीं होगी।
विकास और भविष्य की योजनाएं
कवच का विकास 2015 में शुरू हुआ और तीन वर्षों से अधिक समय तक इसका व्यापक परीक्षण किया गया। तकनीकी सुधारों के बाद, इसे दक्षिण मध्य रेलवे (SCR) में स्थापित किया गया, जहाँ 2018 में पहला परिचालन प्रमाणपत्र प्रदान किया गया। SCR में प्राप्त अनुभवों के आधार पर, एक उन्नत संस्करण ‘कवच 4.0’ विकसित किया गया, जिसे मई 2025 में 160 किमी प्रति घंटे तक की गति के लिए अनुमोदित किया गया। इसके सभी पुर्जे स्वदेश में ही निर्मित किए जा रहे हैं।
भारतीय रेल छह वर्षों की छोटी सी अवधि में देश भर के विभिन्न मार्गों पर कवच 4.0 को लागू करने की तैयारी कर रही है। अब तक, 5,856 किमी ऑप्टिकल फाइबर बिछाया गया है, 619 दूरसंचार टावर स्थापित किए गए हैं, 708 स्टेशनों पर कवच स्थापित किया गया है, 1,107 इंजनों पर कवच लगाया गया है, और 4,001 आरकेएम पर ट्रैकसाइड उपकरण स्थापित किए गए हैं। इस प्रणाली के संचालन के लिए 30,000 से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। आईआरआईएसईटी (भारतीय रेल सिग्नल इंजीनियरिंग एवं दूरसंचार संस्थान) ने 17 एआईसीटीई-अनुमोदित इंजीनियरिंग कॉलेजों, संस्थानों और विश्वविद्यालयों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, ताकि कवच को उनके बी.टेक पाठ्यक्रम में शामिल किया जा सके, जिससे भविष्य के लिए विशेषज्ञ तैयार हो सकें।
भारतीय रेलवे सुरक्षा संबंधी गतिविधियों पर प्रति वर्ष 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करता है। कवच, यात्रियों और ट्रेनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए शुरू की गई कई पहलों में से एक है। कवच की प्रगति और इसकी तैनाती की गति, रेलवे सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति भारतीय रेलवे की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है।



