सांसद लुंबाराम चौधरी के प्रयासों से ₹2.40 करोड़ स्वीकृत, जिला मुख्यालय जल्द जुड़ेगा रेल नेटवर्क से
सिरोही। सिरोही जिला मुख्यालय को रेल नेटवर्क से जोड़ने की भारत सरकार की मुद्दत से चल रही ख्वाहिश अब हकीकत बनने की राह पर है। रेलवे बोर्ड ने स्वरूपगंज से बागरा वाया सिरोही तक 96 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन बिछाने के लिए सर्वे को ₹2 करोड़ 40 लाख की वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी है। यह खबर सिरोही जिले की तरक्की के लिए एक अहम पड़ाव मानी जा रही है।
सांसद चौधरी की मुस्तैदी लाई रंग
क्षेत्रीय सांसद लुंबाराम चौधरी ने इस अहम परियोजना को ज़मीन पर उतारने के लिए खासी मशक्कत की। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने 9 जून 2025 को इस रेल लाइन को बिछाने का फैसला लिया था। इस फैसले को जल्द अमलीजामा पहनाने के लिए सांसद चौधरी ने हाल ही में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार से मुलाकात की। इस मुलाकात में उन्होंने चेयरमैन को एक ख़त सौंपकर सर्वे के लिए फौरी तौर पर बजट जारी करने की मांग की। सांसद के इस ‘बालहट’ और खास अनुरोध पर चेयरमैन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ट्रैक सर्वे की पत्रावली मंगवाई और हाथों-हाथ ₹2 करोड़ 40 लाख की राशि स्वीकृत कर दी, जिसकी वित्तीय स्वीकृति का पत्र भी जारी कर दिया गया।
अब होगा प्रारंभिक सर्वे
सांसद चौधरी ने आगे बताया कि इस बजट की उपलब्धता के साथ ही अब बागरा से स्वरूपगंज वाया सिरोही रेल लाइन का प्रारंभिक सर्वे कार्य शुरू हो सकेगा। इस सर्वे के बाद ही यह मुमकिन हो पाएगा कि इस लाइन को बिछाने में कितनी लागत आएगी, यह किन-किन गांवों से होकर गुजरेगी, और कहां-कहां नए रेलवे स्टेशन बनाए जा सकते हैं।
क्षेत्र को मिलेगा आर्थिक बूस्ट
इस नई रेल लाइन के बिछने से सिर्फ आवाजाही ही नहीं, बल्कि आर्थिक तरक्की को भी पर लगेंगे। यह जहां जनता को रेल से सफर करने की सहूलियत देगी, वहीं इस इलाके के खनिज उद्योगों को भी बड़ा फ़ायदा होगा। ग्रेनाइट और मार्बल जैसे खनिजों के परिवहन में आसानी होगी, जिससे इन उद्योगों को बूस्ट मिलेगा। इसके अलावा, अन्य उद्योगों को भी इसका सीधा लाभ पहुंचने की उम्मीद है।
भारत सरकार की यह नीति रही है कि वह देश के सभी जिला मुख्यालयों को रेल लाइन से जोड़े। इस नीति के तहत, सिरोही भी अब रेल नेटवर्क से जुड़ने जा रहा है। राजस्थान में सिरोही के अलावा टोंक और बांसवाड़ा ही ऐसे जिला मुख्यालय हैं जो अभी तक रेलवे से नहीं जुड़े हैं। सिरोही जिले का भारत सरकार की ओर से पिछड़े जिलों की सूची में शामिल होना भी एक वजह है कि सरकार इसे विकसित करने के लिए नियमों में कई तरह की रियायतें दे रही है। यही वजह है कि इस छोटे से जिले में 325 करोड़ की लागत से मेडिकल कॉलेज भी बन सका है।



