सांतरु (रानीवाड़ा)। शिक्षा के अधिकार और ग्रामीण छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले प्रशासनिक निर्णयों के खिलाफ मंगलवार को सांतरु ग्रामवासियों का धैर्य जवाब दे गया। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में कार्यरत अध्यापक मेघाराम के अनुचित डेपुटेशन (प्रतिनियुक्ति) के आदेश ने पूरे गांव में उबाल पैदा कर दिया है। शिक्षा विभाग की इस “तुगलकी कार्रवाई” के विरोध में न केवल अभिभावक, बल्कि ३६ कौम के लोग एकजुट होकर विद्यालय के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए। प्रशासन और शिक्षा विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और इस निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग उठाई गई।
व्यवस्थाओं का दम निकाल रहा ‘डेपुटेशन’ का खेल
ग्रामीण कृष्ण देवासी का स्पष्ट आरोप है कि विद्यालय पहले से ही शिक्षकों की कमी के संकट से जूझ रहा है। ऐसे में अनुभवी शिक्षक मेघाराम को बिना किसी ठोस जनहित या प्रशासनिक आवश्यकता के डेपुटेशन पर भेजना, सांतरु के बच्चों के भविष्य पर सीधा प्रहार है।
- प्रभावित होती पढ़ाई: बोर्ड परीक्षाओं के ऐन वक्त पर इस तरह के स्थानांतरण या प्रतिनियुक्ति से नियमित कक्षाएं बाधित हो रही हैं।
- स्टाफ पर बोझ: एक शिक्षक के जाने से शेष स्टाफ पर अतिरिक्त कार्यभार आ गया है, जिससे पूरे विद्यालय की शैक्षणिक लय बिगड़ गई है।
३६ कौम की एकजुटता: सांतरु में दिखा ‘खिलाफत’ का माहौल
इस विरोध प्रदर्शन की खास बात यह रही कि इसमें किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि गांव की ३६ कौम के मौजीज लोगों ने हिस्सा लिया। ग्रामीणों ने दो-टूक शब्दों में कहा कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के आला अधिकारी एसी कमरों में बैठकर आदेश जारी कर देते हैं, लेकिन धरातल पर गरीब किसानों और मजदूरों के बच्चों की शिक्षा का नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों ने विभाग की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे ‘शिक्षा विरोधी’ कदम करार दिया।
रानीवाड़ा CBO को सौंपा अल्टीमेटम: बड़े आंदोलन की दी चेतावनी
दिनभर चले भारी विरोध प्रदर्शन के बाद ग्राम प्रतिनिधियों का एक शिष्टमंडल रानीवाड़ा पहुँचा और मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (CBO) को ज्ञापन सौंपा।
- ज्ञापन की मुख्य मांग: अध्यापक मेघाराम के डेपुटेशन आदेश को अविलंब निरस्त कर उन्हें वापस मूल विद्यालय (सांतरु) में लगाया जाए।
- अधिकारियों का आश्वासन: CBO ने ग्रामीणों की भावनाओं और बच्चों की पढ़ाई के नुकसान को देखते हुए मामले की समीक्षा करने और उच्चाधिकारियों तक रिपोर्ट भेजने का आश्वासन दिया है।
- विरोध का ऐलान: ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले ४८ घंटों के भीतर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई और आदेश रद्द नहीं किया गया, तो विद्यालय पर अनिश्चितकालीन तालाबंदी की जाएगी और रानीवाड़ा मुख्यालय पर बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।
उपस्थिति: इस दौरान बड़ी संख्या में ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि, अभिभावक, युवा संघर्ष समिति के सदस्य और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे, जो अपने हक की आवाज बुलंद कर रहे थे।



