सांचौर, 13 अगस्त 2026 — राजस्थान के सांचौर जिले में ओबीसी सर्वेक्षण को लेकर सुगबुगाहट अब तेज विरोध में बदल चुकी है। सर्वेक्षण रिपोर्ट में सामने आई विसंगतियों और आंकड़ों की कमियों से खफा रावणा राजपूत समाज सेवा संस्था (सांचौर-चितलवाना) के बैनर तले समाज के प्रबुद्ध जनों और पदाधिकारियों ने मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को समाज के प्रतिनिधिमंडल ने एकजुट होकर राजस्थान सरकार के माननीय मुख्यमंत्री के नाम एक गंभीर ज्ञापन अतिरिक्त जिला कलेक्टर, सांचौर को सौंपा।
सर्वेक्षण के आंकड़ों पर उठे गंभीर सवाल
ज्ञापन सौंपने के दौरान समाज के प्रमुख पदाधिकारियों ने प्रशासन के सामने दो टूक शब्दों में अपनी आपत्तियां रखीं और सर्वेक्षण की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जताई।
- अपूर्ण और भ्रमित करने वाले आंकड़े: संस्था के अध्यक्ष चमन सिंह भाटी ने मुखर होकर कहा कि आयोग द्वारा प्रस्तुत किए गए आंकड़े पूरी तरह से अपूर्ण, अविश्वसनीय और भ्रमित करने वाले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन त्रुटिपूर्ण आंकड़ों को बिना किसी ठोस आधार के जातिगत जनगणना के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, जिससे समाज में भारी रोष व्याप्त है।
- वास्तविक आबादी को कम दिखाने की साजिश: वहीं, महामंत्री गजेसिंह वमल ने इस पूरे सर्वे की कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इसमें गंभीर अनियमितताएं बरती गई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस त्रुटिपूर्ण सर्वे के कारण रावणा राजपूत समाज सहित प्रदेश की कई अन्य ओबीसी जातियों की वास्तविक आबादी को कागजों में काफी कमतर करके दिखाया गया है।
पारदर्शिता की मांग और भविष्य की चेतावनी
समाज के प्रतिनिधियों ने दो टूक शब्दों में मांग की है कि इस प्रकार के भ्रामक आंकड़ों को तुरंत खारिज किया जाए। साथ ही, समाज की वास्तविक और पुख्ता आबादी के आंकड़ों को पारदर्शी तरीके से नए सिरे से जुटाकर सार्वजनिक किया जाए, ताकि समाज के अधिकारों के साथ कोई खिलवाड़ न हो। इस दौरान बड़ी संख्या में समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।



