वीर प्रसूता धरा जालोर का बढ़ता गौरव: स्वर्गीय रणबांकुरे की विरासत को बेटों ने दी नई उड़ान, SC वर्ग की इस अनूठी प्रतिभा की सफलता से हर आंख में गर्व के आंसू
सर्किल न्यूज नेटवर्क जालोर/रानीवाड़ा।
कहावत है कि शूरवीरों के आंगन में केवल शौर्य ही नहीं, बल्कि सफलता की अद्भुत गाथाएं भी जन्म लेती हैं। इसे सच कर दिखाया है रानीवाड़ा तहसील के सीमावर्ती गांव पंसेरी के एक जांबाज सैनिक परिवार ने। देश की सुरक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले एक अमर सेनानी के संस्कारों ने शिक्षा के कुरुक्षेत्र में वो इतिहास रच दिया है, जिसकी गूंज पूरे मारवाड़ में सुनाई दे रही है। पूर्व NSG (ब्लैक कैट कमांडो) एवं केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में निरीक्षक/जीडी रहे स्वर्गीय श्री रमनभाई पिराजी परमार (मेघवाल) के छोटे पुत्र ललित कुमार (कुश) परमार ने NEET-UG परीक्षा में अपनी मेधा का लोहा मनवाया है। ललित ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में 533 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक (SC) में 1574वां स्थान हासिल किया है और देश के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में अपना एमबीबीएस का टिकट पक्का कर लिया है।

बंदूक से जो देश बचाया, अब कलम से वही सेवा होगी ललित कुमार की यह सफलता केवल एक परीक्षा पास करना नहीं है, बल्कि यह उस अनुशासित और राष्ट्रसेवा से ओत-प्रोत माहौल की जीत है, जो उन्हें विरासत में मिला है। पिता ने देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा के लिए ब्लैक कैट कमांडो बनकर दुश्मनों का मुकाबला किया, तो अब उनका बेटा हाथों में स्टेथोस्कोप थामकर देश के बीमार और जरूरतमंद लोगों के जीवन की रक्षा करेगा। जैसे ही ललित की सफलता के समाचार पंसेरी गांव पहुंचे, समूचे क्षेत्र में आतिशबाजी और मिठाइयों का दौर शुरू हो गया। हर ग्रामीण इस बात पर गौरवान्वित था कि अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से निकलकर इस युवा प्रतिभा ने अभावों और चुनौतियों को मात देकर यह मुकाम हासिल किया है।
एक ही आंगन के दो लाल, दोनों बनेंगे देश के रखवाले परमार परिवार के लिए यह क्षण केवल दोहरी खुशी का नहीं, बल्कि युगों-युगों तक याद रखे जाने वाले गौरव का है। स्वर्गीय रमनभाई का एक बेटा पहले से ही चिकित्सा क्षेत्र में देश की सेवा की तैयारी कर रहा है। ललित के बड़े भाई लक्ष्मण रमनभाई परमार वर्तमान में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के छात्र हैं। अब छोटा भाई भी उसी राह पर चल पड़ा है। एक ही परिवार के दोनों सगे भाइयों का डॉक्टर बनना इस पिछड़े और ग्रामीण अंचल के लिए किसी चमत्कार और सबसे बड़ी प्रेरणा से कम नहीं है। यह सफलता साबित करती है कि यदि इरादे फौलादी हों, तो परिस्थितियां कभी भी रास्ता नहीं रोक सकतीं।
बधाइयों का तांता, उज्ज्वल भविष्य की हुंकार इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर ललित कुमार को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। परिजनों, रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने ललित को मालाओं से लाद दिया और नम आंखों से उनके स्वर्गीय पिता के बलिदान को याद किया। ग्रामीणों ने अटूट विश्वास जताते हुए कहा कि सैनिक के ये दोनों बेटे आने वाले समय में देश के सबसे योग्य, संवेदनशील और सेवाभावी चिकित्सक बनेंगे। ललित की यह हुंकार आज क्षेत्र के हजारों युवाओं के लिए एक मशाल बन गई है, जो यह संदेश दे रही है कि मेहनत के दम पर किस्मत की लकीरें खुद खींची जा सकती हैं।



