जालौर का गौरव: पिता की मजदूरी और सतीश व्यास के मार्गदर्शन से क्रिकेट के मैदान में चमकी बिटिया, चयनकर्ताओं ने जिसे नकारा था, आज उसने खेल कोटे से हासिल की सरकारी नौकरी
जालौर/मुंबई। संघर्ष जब जिद बन जाए, तो किस्मत को भी झुकना पड़ता है। कुछ ऐसी ही मिसाल पेश की है जालौर की होनहार क्रिकेटर कौशल्या चौधरी ने, जिनका चयन हाल ही में सेंट्रल रेलवे में खेल कोटे (स्पोर्ट्स कोटा) के तहत हुआ है। रेलवे भर्ती सेल (RRC) द्वारा जारी की गई नवीनतम मेरिट सूची में कौशल्या ने क्रिकेट अनुशासन में लेवल-1 के पद पर अपनी जगह पक्की की है। यह सफलता केवल एक खिलाड़ी की जीत नहीं, बल्कि एक पिता के पसीने, एक कोच के विश्वास और एक बेटी के कभी न हार मानने वाले जज्बे की कहानी है।

जब सलेक्शन ट्रायल से मिला था 'न' का दर्द
कौशल्या के करियर में एक मोड़ ऐसा आया था जब आरसीए (RCA) जयपुर में अंडर-19 ट्रायल के दौरान चयनकर्ताओं ने उन्हें पूरी तरह नकार दिया था। जालौर जैसे छोटे जिले से निकली इस प्रतिभा को 60 चयनित बच्चियों में भी जगह नहीं मिली। कौशल्या ने हारकर और रोते हुए अपने गुरु सतीश व्यास को फोन किया था। लेकिन सतीश व्यास ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी 'तपस्या' और बिटिया की मेहनत पर भरोसा रखा।
सतीश व्यास की मेहनत और सचिव का सहयोग
सतीश व्यास ने जयपुर में तत्कालीन सचिव महेंद्र शर्मा से पैरवी की और छोटे जिलों की प्रतिभाओं को मौका देने का आग्रह किया। उनके अटूट विश्वास के चलते कौशल्या को दोबारा मौका मिला। वह रातभर बस का सफर तय कर सुबह फिर जयपुर पहुंचीं और चैलेंजर मैच खेला। उस एक मौके ने कौशल्या की जिंदगी बदल दी—चैलेंजर से कैंप, कैंप से टीम और अब भारतीय रेलवे का हिस्सा बनने तक का सफर उन्होंने बखूबी तय किया।

मजदूर पिता का सपना बनीं कौशल्या
कौशल्या के पिता इंडियन गैस में मजदूरी करते हैं। आर्थिक तंगहाली के बावजूद उन्होंने बिटिया की सुविधाओं में कभी कमी नहीं आने दी। आज जब सेंट्रल रेलवे ने अपनी आधिकारिक सूची जारी की, तो जालौर क्रिकेट के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया।
चयन प्रक्रिया और आगामी चरण
सेंट्रल रेलवे भर्ती सेल (RRC/CR) द्वारा जारी अधिसूचना (संख़्या RRC/CR/01/2025) के अनुसार, 7 से 10 दिसंबर और 18 से 20 दिसंबर 2025 के बीच हुए ट्रायल के आधार पर यह मेरिट लिस्ट तैयार की गई है।
- मेडिकल परीक्षण: सूचीबद्ध उम्मीदवारों को अब रेलवे भर्ती सेल द्वारा मेडिकल जांच के लिए बुलाया जाएगा।
- नियुक्ति: मेडिकल फिटनेस और दस्तावेजों (खेल एवं शैक्षणिक प्रमाण पत्र) के सत्यापन के बाद ही अंतिम नियुक्ति दी जाएगी।
- यूनिट आवंटन: डिवीजन और यूनिट का आवंटन रिक्तियों की उपलब्धता के आधार पर किया जाएगा।
"यह केवल एक पैनल लिस्ट है। मेडिकल के लिए बुलाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि रेलवे सेवा में नियुक्ति का अधिकार मिल गया है, लेकिन योग्यता के दम पर कौशल्या ने अपना स्थान सुरक्षित कर लिया है।"
जालौर जिले के खेल प्रेमियों और सतीश व्यास के मार्गदर्शन ने यह साबित कर दिया कि यदि प्रतिभा को सही दिशा मिले, तो छोटे शहरों की बेटियां भी आसमान छू सकती हैं।







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