जालोर। राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में वर्षों से अल्पवेतन पर सेवाएं दे रहे संविदा नर्सेज और महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (ANM) ने अब आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। जालोर कांग्रेस जिला अध्यक्ष रमीला मेघवाल के मार्फत प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर को ज्ञापन भेजकर नर्सिंग ऑफिसर के 12,000 और ANM के 7,000 रिक्त पदों पर नई सीधी भर्ती निकालने की पुरजोर मांग की गई है।
प्रमुख मांगें: मेरिट और बोनस अंकों के आधार पर हो भर्ती
नर्सेज प्रतिनिधियों ने मांग की है कि भर्ती प्रक्रिया को पूर्ववर्ती 2013, 2018 और 2023 की तर्ज पर चिकित्सा नियम 1965 के तहत आयोजित किया जाए। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- पदों का विवरण: नर्सिंग ऑफिसर के 12,000 एवं ANM के 7,000 पदों पर विज्ञप्ति जल्द जारी हो।
- चयन का आधार: भर्ती पूरी तरह से मेरिट और अनुभव के आधार पर मिलने वाले बोनस अंकों (10, 20, 30 अंक) के जरिए की जाए।
- अनुभव को प्राथमिकता: NHM, NRHM, UTB, 108, 104 और प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से 8-10 वर्षों से कार्यरत कार्मिकों को नियमित होने का अवसर मिले।
“बंधुआ मजदूर की तरह कर रहे काम”
ज्ञापन में संविदा कर्मियों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि वे वर्तमान में अत्यंत अल्प वेतन में ‘बंधुआ मजदूर’ की तरह कार्य करने को मजबूर हैं। वर्षों से अपनी सेवाएं देने के कारण कई कर्मचारी अब उम्र के आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुके हैं। आर्थिक, मानसिक और सामाजिक रूप से प्रताड़ित इन कर्मियों ने सरकार को संविदा नर्सेज को नियमित करने का वादा याद दिलाया है।
उम्र के आखिरी पड़ाव पर पहुंचे कार्मिक
नर्सेज का कहना है कि उन्होंने कोरोना काल से लेकर हर विपरीत परिस्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं का मोर्चा संभाला है। यदि सरकार 10, 20 और 30 बोनस अंकों के साथ मेरिट आधारित भर्ती नहीं निकालती है, तो हजारों अनुभवी नर्सेज का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।



