सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन: चंडीनाथ महादेव से बड़े चौहटे तक गूंजी ढोल की थाप, हजारों की मौजूदगी में संपन्न हुआ सांस्कृतिक महाकुंभ
भीनमाल: रंगों के त्योहार होली के अगले दिन भीनमाल की गलियां परंपराओं और संस्कृति के रंगों से सराबोर हो गईं। शहर की गौरवशाली संस्कृति का प्रतीक ऐतिहासिक ‘घोटा गैर’ का आयोजन इस बार बेहद भव्य और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस आयोजन में राव समाज ने अपनी गौरवमयी परंपरा का निर्वहन करते हुए अगुवाई की और 36 कौम सहित पूरे शहर को सांस्कृतिक सूत्र में पिरो दिया।
राव समाज की अगुवाई में शुरू हुआ कारवां
शाम 4 बजे से 5 बजे के बीच, चंडीनाथ महादेव मंदिर परिसर में जैसे ही पारंपरिक ‘बाबैया ढोल’ की थाप गूंजी, शहर के युवाओं में उत्साह का ज्वार उमड़ पड़ा। परंपरा के अनुसार, राव समाज के लोगों ने गैर की शुरुआत की, जिसके बाद सभी जाति-वर्गों के लोग एक साथ मिलकर इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बने। ढोल की गूंज और नृत्य की थाप के साथ, खारी रोड से लेकर शहर के मुख्य मार्गों तक हर कोई झूमता नजर आया।

परंपराओं के मार्ग से गुजरी गैर
यह ऐतिहासिक गैर अपने तय पारंपरिक मार्ग से होते हुए आगे बढ़ी। सात निंबड़ी, खारी रोड, देतरियों का चौहटा और गणेश चौक होते हुए जब यह गैर बड़े चौहटे पर पहुंची, तो युवाओं का उत्साह देखने लायक था। इस दौरान पूरा वातावरण रंग-गुलाल और खुशी से सराबोर हो गया। सदियों से चली आ रही इस रस्म को आज भी शहरवासियों ने पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ निभाया, जो कि स्थानीय संस्कृति के प्रति लोगों के लगाव को दर्शाता है।

करबा पीने की रस्म और आस्था
मुख्य गैर से पहले, दिनभर शहर में ढोल के साथ विभिन्न जातियों, मौजिज व गणमान्य नागरिकों के घरों पर ‘करबा पीने’ की रस्म अदा की गई। यह परंपरा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और सामाजिक जुड़ाव का प्रतीक है, जिसे शहर के हर नागरिक ने बखूबी निभाया।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम
हजारों की संख्या में उमड़ी भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। आयोजन के दौरान शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस उप अधीक्षक शंकरलाल मसूरिया, सीआई राजेंद्रसिंह राजपुरोहित, एसआई गनी मोहम्मद और एएसआई नरेंद्र कुमार के नेतृत्व में भारी पुलिस बल तैनात रहा। अधिकारियों की पैनी नजर के बीच यह भव्य आयोजन बिना किसी बाधा के संपन्न हुआ।




