मार्शल आर्ट की ब्लैक बेल्ट और वर्ल्ड कप किक बॉक्सर गुंजन ने अब सांस्कृतिक मंच पर फहराया परचम, जालोर जिला गौरवान्वित
सर्किल न्यूज़ नेटवर्क भीनमाल/जालोर। प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती, इसे एक बार फिर साबित कर दिखाया है भीनमाल की होनहार बेटी गुंजन सोढा ने। हरिद्वार के पावन तट पर आयोजित एक भव्य सांस्कृतिक महाकुंभ में गुंजन ने सहभागिता कर अपना नाम ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में दर्ज कराया है। इस उपलब्धि से न केवल भीनमाल नगर, बल्कि संपूर्ण जालोर जिला और राजस्थान हर्षित है।
686 कलाकारों के साथ बनाया विश्व कीर्तिमान
भारतीय संस्कृति और कला को समर्पित यह ऐतिहासिक आयोजन उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित सप्तसरोवर के परमार्थ घाट पर संपन्न हुआ। भारतीय संस्कृति फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में गुंजन सोढा ने “गंगा आरती पर सबसे बड़े परफॉर्मिंग आर्ट्स प्रदर्शन” (Largest Display of Performing Arts on Ganga Aarti) का हिस्सा बनकर इतिहास रच दिया। इस रिकॉर्ड में कुल 686 कलाकारों ने एक साथ शास्त्रीय नृत्य और संगीत की प्रस्तुति दी, जिसे हाई रेंज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा आधिकारिक मान्यता दी गई।
डॉ. रागिनी मक्कर के निर्देशन में बिखेरा कला का जादू
गंगा नृत्य कला महोत्सव के दौरान प्रसिद्ध कोरियोग्राफर डॉ. रागिनी मक्कर के निर्देशन में कथक, भरतनाट्यम और ओडिसी जैसे शास्त्रीय नृत्यों का संगम देखने को मिला। गंगा मैया की पावन आरती के बीच जब सैकड़ों कलाकारों ने एक साथ कदम मिलाए, तो पूरा घाट आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया।
बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं गुंजन
गुंजन सोढा की यह सफलता इसलिए भी विशेष है क्योंकि वह केवल कला तक सीमित नहीं हैं। वे ज्वाला मार्शल आर्ट से ब्लैक बेल्ट धारक हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किक बॉक्सिंग की विश्व कप प्रतिभागी भी रह चुकी हैं। खेल के मैदान से लेकर कला के मंच तक गुंजन का यह सफर उनके अनुशासन और कड़े परिश्रम की कहानी बयां करता है।
सर्किल न्यूज़ नेटवर्क – मोटिवेशनल कॉर्नर
“संस्कारों और संघर्ष का संगम: गुंजन सोढा”
आज के दौर में गुंजन सोढा उन हजारों बेटियों के लिए एक जीवंत प्रेरणा हैं जो छोटे शहरों से निकलकर बड़े सपने देखती हैं। गुंजन की सफलता हमें तीन बड़े सबक देती है:
- बहुआयामी व्यक्तित्व: आप एक साथ बेहतरीन खिलाड़ी और कुशल कलाकार दोनों हो सकते हैं।
- जड़ों से जुड़ाव: आधुनिकता के इस युग में भारतीय शास्त्रीय परंपराओं और संस्कारों को थामे रखना ही असली पहचान है।
- निरंतरता: मार्शल आर्ट की ब्लैक बेल्ट से लेकर वर्ल्ड रिकॉर्ड तक का सफर रातों-रात तय नहीं होता, इसके पीछे वर्षों का पसीना और त्याग होता है।
सर्किल न्यूज़ नेटवर्क गुंजन सोढा के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है।



