पर्दे के पीछे से सरकारें दोहराने वाले 'संगठन शिल्पी' पर दिल्ली का भरोसा; उत्तराखंड फतह के बाद अब मरुधरा की गुटबाजी थामने का चैलेंज
जयपुर (सर्कल न्यूज नेटवर्क)। राजस्थान भाजपा में पिछले करीब ढाई साल से खाली पड़े सबसे पावरफुल पद 'प्रदेश महामंत्री (संगठन)' पर आखिरकार दिल्ली आलाकमान ने मुहर लगा दी है। उत्तराखंड में लगातार सत्ता विरोधी लहर को मात देकर दोबारा कमल खिलाने वाले 'चुनावी चक्रव्यूह और सांगठनिक मैनेजमेंट' के बड़े एक्सपर्ट अजेय कुमार अब राजस्थान बीजेपी के नए संगठन सारथी होंगे। जनवरी 2024 में चंद्रशेखर के जाने के बाद से यह सीट खाली थी, जिससे सत्ता और संगठन के बीच की कड़ियाँ ढीली पड़ रही थीं। मूल रूप से बिहार के रहने वाले और RSS पृष्ठभूमि के अजेय कुमार लो-प्रोफाइल रहकर पर्दे के पीछे से सटीक बिसात बिछाने के लिए जाने जाते हैं।
क्यों कहलाते हैं 'मैनेजमेंट एक्सपर्ट'?
- एंटी-इन्कम्बेंसी को हराने का हुनर: उत्तराखंड में जहां हर 5 साल में सरकार बदलने का रिवाज था, वहां अजेय कुमार ने अपने सूक्ष्म सांगठनिक कौशल से उस मिथक को तोड़ा और बीजेपी की ऐतिहासिक वापसी कराई।
- गुटबाजी को शांत करने के उस्ताद: बड़े-बड़े क्षत्रपों और आंतरिक कलह को बिना किसी शोर-शराबे के शांत कर, सबको एक जाजम पर लाना इनकी सबसे बड़ी यूएसपी (USP) है।
मरुधरा में अजेय के सामने 3 बड़े टास्क:
- ढीले पड़े पेंच कसना: ढाई साल से मुखिया न होने के कारण बिखरे हुए जमीनी कैडर में नई ऊर्जा फूंकना।
- सत्ता और संगठन में तालमेल: सरकार और कार्यकर्ताओं के बीच की खाई को पाटकर आपसी समन्वय बनाना।
- आगामी स्थानीय निकाय चुनाव: प्रदेश में होने वाले आगामी पंचायत और निकाय चुनावों में टिकट वितरण के विवादों को संभालना और जीत की रणनीति तैयार करना।
ब्रीफ नोट: बीजेपी में संगठन महामंत्री का पद सीधे तौर पर संघ (RSS) का प्रतिनिधि होता है। राजस्थान जैसे बड़े राज्य में, जहां अंदरूनी खींचतान अक्सर चर्चा में रहती है, वहां अजेय कुमार की 'अजेय रणनीति' कितनी कारगर होती है, इस पर पूरे सियासी गलियारे की नजरें टिकी हैं।







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