दो चेहरों की अनूठी कहानी; दिन में बहादुरी का मुखौटा, रात में रमेश बनकर तस्करी; भाई का आधार कार्ड दिखाकर दो बार पुलिस को दे चुका था गच्चा
सर्कल न्यूज नेटवर्क
जयपुर/नीमच। राजस्थान पुलिस के मादक पदार्थ विरोधी कार्यबल (ANTF) ने ‘ऑपरेशन मदाविकाढ़त’ के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए पिछले 7 साल से फरार 25 हजार रुपए के इनामी मादक पदार्थ तस्कर रमेश बंजारा को मध्य प्रदेश के नीमच से गिरफ्तार किया है। आरोपी राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में मोटरसाइकिल पर घूम-घूमकर कंबल बेचने की आड़ में डोडा-चूरा की तस्करी का बड़ा नेटवर्क चला रहा था। महानिरीक्षक पुलिस विकास कुमार के निर्देशन और महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में ANTF की यह फरार तस्करों के खिलाफ 66वीं बड़ी कार्रवाई है।
डॉ. जैकाल और मिस्टर हाइड जैसी दोहरी जिंदगी
पकड़ा गया आरोपी रमेश बंजारा पढ़ा-लिखा नहीं है, लेकिन बेहद शातिर है। वह दिन में खुद को ‘बहादुर’ बताकर घूम-घूमकर कंबल बेचने का नाटक करता था और रात होते ही ‘रमेश’ बनकर अवैध मादक पदार्थों की बड़ी खेप सप्लाई करता था। बाहरी राज्यों में कंबल बेचने के बहाने वह भोले-भाले लोगों को चिन्हित करता और मोटे पैसे का लालच देकर उन्हें अपना एजेंट बना लेता था। धीरे-धीरे उसने घर बैठे ही डोडा-चूरा की खरीद-फरोख्त का एक मजबूत साम्राज्य खड़ा कर लिया था।
भाई की हमशक्ल का फायदा और ‘आधार’ का खेल
रमेश का चेहरा उसके भाई बहादुर से काफी मिलता-जुलता है। इस हमशक्ल होने का फायदा उठाकर उसने अपने भाई की पहचान का नकाब ओढ़ रखा था। जब भी पुलिस या ANTF की टीम उसे पकड़ने उसके घर दबिश देती, वह बड़ी चतुराई से अपने भाई का पहचान पत्र दिखाकर खुद को बहादुर साबित कर देता था। इस झांसे में आकर टीमें वापस लौट जाती थीं और वह दो बार ANTF को गच्चा देने में कामयाब रहा था।
ससुराल में बुना जाल, मृत्युभोज से लौटते ही दबोचा
आरोपी को पकड़ने के लिए ANTF की टीम ने उसके ससुराल ‘गुंदा रेत’ गांव में अपने सूत्र सक्रिय किए। वहां गहन जांच-पड़ताल और पूरी रिश्तेदारी की कुंडली खंगालने के बाद टीम को रमेश और बहादुर के बीच का असली अंतर समझ में आया। इसी दौरान टीम को इनपुट मिला कि रमेश की पत्नी के एक करीबी रिश्तेदार की मौत हो गई है और वह मृत्युभोज में शामिल होने अपनी पत्नी के साथ जरूर आएगा।
ANTF ने दो अलग-अलग टीमें बनाकर एक को बहादुर और दूसरी को रमेश के पीछे लगाया। रमेश अपनी मोटरसाइकिल पर पत्नी को बिठाकर ससुराल पहुंचा। राजस्थान की सीमा में वह कच्चे-पक्के रास्तों से छिपते-छिपाते निकला, लेकिन जैसे ही वह मृत्युभोज के बाद वापस मध्य प्रदेश की सीमा में दाखिल हुआ, वह बेखौफ होकर मुख्य मार्ग पर चलने लगा। इसी दौरान घेराबंदी कर बैठी ANTF की टीम ने उसे रोक लिया।
पत्नी देती रही जेठ का हवाला
मोटरसाइकिल रोकने पर भी आरोपी खुद को बहादुर बताता रहा और पीछे बैठी उसकी पत्नी भी पुलिस को गुमराह करने के लिए उसे अपना ‘जेठ’ बताती रही। लेकिन सतर्क टीम ने जब देखा कि महिला ने उसके कंधे पर हाथ रख रखा है, तो पुलिस का शक यकीन में बदल गया। पुलिस ने जब तीखा सवाल किया कि “अगर यह जेठ है तो तुम्हारा पति ससुराल क्यों नहीं आया?” तो आरोपी और उसकी पत्नी लाजवाब हो गए और पुलिस ने रमेश को धर-दबोचा।
क्या है ‘मदाविकाढ़त’ का मतलब? ANTF द्वारा चलाए गए इस विशेष ऑपरेशन का नाम तीन शब्दों को मिलाकर रखा गया है:
- मद – नशा
- आविक – कंबल
- आढ़त – थोक बिक्री का काम यानी कंबल ओढ़कर नशे का थोक व्यापार करने वाले के खिलाफ कार्रवाई।
पूरी टीम होगी सम्मानित
विकास कुमार, महानिरीक्षक पुलिस, ANTF ने बताया कि इस बेहद पेचीदा और सफल ऑपरेशन को अंजाम देने वाली पूरी टीम को ANTF मुख्यालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने आमजन से अपील की है कि किसी भी नशा तस्कर या अपराधी की सूचना ANTF के नियंत्रण कक्ष नंबर 0141-2502877 या व्हाट्सएप नंबर 9261225056 पर दें, सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी।



