खेतों में लवणीय पानी का भराव, सोलर प्लांट के नाम पर बेदखली और नर्मदा नहर की बदहाली को लेकर आक्रोश; गांव-गांव बांटे पीले चावल
सर्कल न्यूज नेटवर्क डावल/सांचौर। क्षेत्र के डावल गांव के आम चौहटे में संयुक्त किसान मोर्चा की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई, जिसमें सैकड़ो की संख्या में क्षेत्र के किसानों ने भाग लिया। बैठक में किसानों की ज्वलंत समस्याओं पर गहन मंथन किया गया और आगामी 16 जून 2026 को सांचौर में होने वाले विशाल धरने को ऐतिहासिक बनाने के लिए रणनीति तैयार की गई। डावल गांव की इस बैठक से अकेले 300 किसानों के सांचौर कूच करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा चलाए जा रहे किसान जागृति अभियान के तहत आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता प्रताप चंद सियाक ने की। यह पूरी बैठक मोर्चा के जिला अध्यक्ष ईशराराम बिश्नोई, राजस्थान किसान सभा के जिला अध्यक्ष विरद सिंह चौहान, पूनमा राम बिश्नोई हेमागुड़ा, लादू राम साऊ और भाखराराम साऊ की देखरेख व मार्गदर्शन में संपन्न हुई।
गांव-गांव बांटे जा रहे पीले चावल, मिल रहा भारी समर्थन
मोर्चा के जिला अध्यक्ष ईशराराम बिश्नोई ने उपस्थित किसानों को संबोधित करते हुए बताया कि सांचौर और चितलवाना क्षेत्र के किसानों की लंबे समय से लंबित और ज्वलंत समस्याओं को लेकर अतिरिक्त जिला कलेक्टर कार्यालय सांचौर के सामने आगामी 16 जून को प्रस्तावित धरने की तैयारियां अब जोरों पर चल रही हैं। इसके लिए प्रत्येक गांव में किसान जन जागृति अभियान चलाया जा रहा है। मोर्चा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता गांव-गांव, ढाणी-ढाणी जाकर किसानों को इस विशाल धरने में भागीदारी निभाने के लिए पीले चावल बांटकर पारंपरिक रूप से निमंत्रण दे रहे हैं। इस अभियान के दौरान ग्रामीणों और किसानों का अभूतपूर्व और जोरदार समर्थन मिल रहा है।
आजादी के 78 वर्षों बाद भी अन्नदाता सड़कों पर
ईशराराम बिश्नोई ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश की आजादी के 78 वर्षों के बावजूद आज भी देश और क्षेत्र का अन्नदाता-किसान अपने बुनियादी अधिकारों जैसे पानी, बिजली, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को पूरी तरह लागू करने, कृषि उत्पाद के उचित भाव, आदान अनुदान राशि और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्लेम को लेकर सड़कों पर संघर्ष करने को मजबूर है। शासन और प्रशासन की इसी बेरुखी के कारण आज क्षेत्र के किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
नेहड़ में लवणीय पानी का कहर, कर्ज माफी की मांग
राजस्थान किसान सभा तहसील शाखा चितलवाना के अध्यक्ष लादूराम साहू ने बैठक में किसानों की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले दिनों अत्यधिक जल भराव और ‘विपरजोय’ चक्रवाती तूफान के कारण चितलवाना व आसपास के खेतों में लवणीय जल का भराव हो गया था। इस खारे पानी के लंबे समय तक टिके रहने के कारण हजारों बीघा उपजाऊ कृषि भूमि अब पूरी तरह से अनुपजाऊ और बंजर हो चुकी है। उन्होंने सरकार से पुरजोर मांग की है कि प्रभावित किसानों का पूरा कर्ज तत्काल माफ किया जाए और खेत खराबे का उचित मुआवजा सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर किया जाए।
88 करोड़ का आदान अनुदान बकाया, अधिकारी बना रहे बहाने
राजस्थान किसान सभा के जिला अध्यक्ष विरद सिंह चौहान ने प्रशासनिक ढर्रे पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जिम्मेदार शासन और प्रशासन में बैठे उच्च अधिकारी किसानों की मौन पुकार को अनसुना कर रहे हैं। चितलवाना तहसील का फसल खराबे का लगभग 88 करोड़ रुपए का आदान अनुदान वर्ष 2022 से आज तक बकाया चल रहा है। जब भी किसान या संगठन इस बारे में बात करते हैं, तो अधिकारी कभी ऑनलाइन पोर्टल की खराबी, कभी बजट की अनुपलब्धता तो कभी ईसीएस (ECS) में बिल भेज दिए जाने का खोखला बहाना बनाकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। अधिकारियों की इस लापरवाही का सीधा आर्थिक नुकसान गरीब किसानों को उठाना पड़ रहा है।
स्वामीनाथन आयोग की ‘C2 + 50%’ सिफारिशों पर दी जानकारी
बैठक के दौरान पूनमा राम विश्नोई हेमागुड़ा ने सांचौर और चितलवाना क्षेत्र की स्थानीय मांगों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि नर्मदा नहर परियोजना के रिनोवेशन की डीपीआर (DPR) तैयार करने हेतु बजट में 2 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए हैं। किसानों की मांग है कि यह डीपीआर किसानों की राय और जमीनी जानकारी के आधार पर ही तैयार की जाए। इसके साथ ही नर्मदा नहर की साफ-सफाई और मरम्मत कार्य की उच्च स्तरीय जांच करवाने, बैंकों द्वारा किसानों के साथ सम्मानजनक व संतोषजनक व्यवहार करने और स्थानीय कृषि मंडी में फसलों की नियमित सरकारी खरीद की पुख्ता व्यवस्था करने की मांग की जा रही है।
पूनमा राम विश्नोई ने डावल के जागरूक किसानों से संवाद करते हुए देश के पहले और एकमात्र किसान आयोग—स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के संदर्भ में विशेष जानकारी साझा की। उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के निर्धारण के लिए ‘C2 प्लस 50% (भूमि के मूल्य और लागत का फार्मूला)’ के गणित को विस्तार से समझाया, जिससे क्षेत्र के कई किसान साथी अब तक अनभिज्ञ थे।
निजी कंपनियों द्वारा किसानों के आशियाने उजाड़ने की साजिश की निंदा
विराम सिंह चौहान ने एक और गंभीर मुद्दे की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए बताया कि नेहड़ क्षेत्र के कुकड़िया, आकोड़िया और खेजड़ियाली सहित कई गांवों में सोलर प्लांट लगाने के नाम पर बड़ी-बड़ी निजी कंपनियां गरीब किसानों के घर उजाड़ने की तैयारी में जुटी हैं। किसानों के पारंपरिक आवागमन के रास्ते अवरुद्ध किए जा रहे हैं, जबकि इन पीड़ित किसानों को राजस्थान सरकार द्वारा स्वयं वर्ष 2001 में वैध रूप से भूमि आवंटित की गई थी। इन जमीनों पर बाकायदा बिजली कनेक्शन चालू हैं और इंदिरा आवास योजना के तहत पक्के घर बने हुए हैं। इसके बावजूद उन्हें बेदखल किया जा रहा है, जिसकी संयुक्त किसान मोर्चा घोर निंदा करता है।
निजीकरण का विरोध और युवाओं की बेरोजगारी पर चिंता
चौहान ने आगे कहा कि वर्तमान पूंजीवादी व्यवस्था के तहत केवल किसान ही पीड़ित नहीं है, बल्कि हर वर्ग त्रस्त है। एक तरफ सरकारी कार्यालयों में लाखों पद खाली पड़े हैं, तो दूसरी तरफ किसान-मजदूरों के लाखों योग्यताधारी और शिक्षित पुत्र-पुत्रियां बेरोजगार खड़े होकर रोजगार का इंतजार कर रहे हैं। सरकार रोजगार देने के बजाय हर क्षेत्र में निजीकरण को बढ़ावा देने में लगी है, जिसका संयुक्त किसान मोर्चा पुरजोर विरोध करता है।
इस दौरान भूपेश विश्नोई ने भी विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार कागजों में तो अनेक योजनाओं की घोषणाएं कर देती है, लेकिन धरातल पर उनकी क्रियान्विती शून्य रहती है। सूचना प्रौद्योगिकी के इस आधुनिक युग में भी समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने मोर्चा के इस जागृति आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की।
सांचौर और बाड़मेर के हक का पानी लूणी नदी में बहाया जा रहा
संयुक्त किसान मोर्चा सांचौर के जिला प्रवक्ता लादूराम भादू ने कृषि उपज मंडी सांचौर, नर्मदा नहर, बिजली विभाग, जलदाय विभाग और जल जीवन मिशन से जुड़ी जनसमस्याओं को रेखांकित करते हुए क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में 16 जून को अतिरिक्त जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने पहुंचने का आह्वान किया।
लादूराम भादू ने सरकारी तंत्र के विरोधाभास पर तीखा हमला बोलते हुए कहा: “एक तरफ तो सरकार पूरे राज्य में ‘वंदे गंगा जल’ नाम से जल संरक्षण का ढिंढोरा पीट रही है और अभियान चला रही है, वहीं दूसरी तरफ 22 मई से नहर का क्लोजर पूरा होने के बाद से लगातार सांचौर और बाड़मेर जिले के हिस्से का कीमती पानी अनावश्यक रूप से लूणी नदी में बहाकर बर्बाद किया जा रहा है। भीषण गर्मी के इस मौसम में नेहड़ क्षेत्र के गांवों में पीने के पानी की भयंकर किल्लत है, सांचौर शहर को शुद्ध पेयजल नहीं मिल पा रहा है, और प्रशासन पानी को नदी में बहा रहा है।”
प्रवक्ता ने मांग की कि जिस कृषि भूमि पर सोलर प्लांट और सौर ऊर्जा के प्रोजेक्ट लगाए जा रहे हैं, उस पूरे क्षेत्र का नए सिरे से आकलन किया जाए। साथ ही अतिरिक्त नर्मदा नहर परियोजना का पानी अनकमांड क्षेत्र जैसे हेमागुड़ा परिक्षेत्र और मेघावा-वीरावा परिक्षेत्र को कमांड एरिया से जोड़कर दिया जाए। मोर्चा ने मांग की कि किसानों के हर खेत को मुफ्त पानी व बिजली दी जाए और हर हाथ को रोजगार मिले।
बुलंद नारों से गूंजा चौहटा, डावल ग्राम इकाई यथावत रखने का निर्णय
बैठक के अंत में उपस्थित किसानों ने गगनभेदी नारों के साथ अपने जोश का प्रदर्शन किया:
- “हम हमारा हक मांगते – नहीं किसी से भीख मांगते”
- “खेत हमारा कानून तुम्हारा – नहीं चलेगा, नहीं चलेगा”
- “पानी हमारा कब्जा तुम्हारा – नहीं चलेगा, नहीं चलेगा”
- “माल हमारा भाव तुम्हारा – नहीं चलेगा, नहीं चलेगा”
- “किसान एकता – जिंदाबाद, लड़ेंगे – जीतेंगे, इंकलाब जिंदाबाद”
इसी बैठक के दौरान सांगठनिक निर्णय लेते हुए संयुक्त किसान मोर्चा सांचौर द्वारा ग्राम इकाई डावल की एक वर्ष पूर्व गठित कार्यकारिणी को आगामी एक और वर्ष के लिए यथावत रखते हुए पुनः सेवा का अवसर प्रदान किया गया।
इस पूरी बैठक में प्रताप चंद्र सियाग, लादूराम साहू, बुद्धाराम, मांगीलाल जानी, मांगीलाल दड़क, बाबूलाल पूनिया, मंगलाराम साहू, मोहनलाल गोदारा, बाबूलाल सेन, आसुराम सारण, पीराराम, राजू राम, मोहनलाल साहू, फ़गलू राम मेघवाल, दिनेश कुमार सहित बहुत बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।



