रूपल, एक साधारण पशुपालक परिवार की बेटी, ने रेबारी देवासी समाज में एक नया इतिहास रच दिया है। उसने एमबीबीएस की परीक्षा उत्तीर्ण कर डॉक्टर बनने का अपने पिताजी और नानाजी का सपना साकार किया है। रूपल की यह उपलब्धि न केवल उसके परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि देवासी समाज के लिए भी एक प्रेरणा स्रोत है।

बता देते है कि रूपल देवासी का सफर आसान नहीं था। अपने पिताजी रानीवाड़ा तहसील के मारूवाडा गांव में गरीब हालातों में पले और स्कूल छोडकर नौकरी करनी पडी। उन्होंने अपनी होनहार बेटी को डॉक्टर बनाने का सपना देखा। कठिनाइयों का सामना करते हुए अपने सपनों को पूरा किया। रूपल ने अपनी मेहनत और लगन से यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मुश्किल रास्ता आसान हो सकता है।
रूपल की सफलता की कहानी हमें यह सिखाती है कि हमें अपने सपनों को पूरा करने के लिए कठिन परिश्रम और समर्पण की आवश्यकता होती है। उसकी कहानी उन सभी लड़कियों के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को साकार करना चाहती हैं, लेकिन समाज की बंदिशों और आर्थिक कठिनाइयों के कारण पीछे हट जाती हैं। देवासी समाज में शिक्षा की कमी होने के बावजूद रूपल के पिता रमेश देवासी ने उसको विदेश में जार्जिया भेजा और डिग्री हासिल कर भारत में एफएमजी परीक्षा पर क्लियर करके नाम रोशन किया है।
रूपल की यह उपलब्धि हमें यह भी याद दिलाती है कि शिक्षा और ज्ञान ही वह ताकत है जो हमें समाज में बदलाव लाने की शक्ति देती है। हमें रूपल की तरह ही अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत करनी चाहिए और समाज में एक सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए। साथ ही, हमें अपने परिवार और समाज का समर्थन करना चाहिए, ताकि और भी लड़कियां अपने सपनों को साकार कर सकें। समाज में एक सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए।

बता देते है कि डॉक्टर रूपल देवासी का गांव मारूवाडा तहसील रानीवाड़ा जिला जालोर है। यह गांव पशुपालक बहुल गांव है। इसी गांव में रमेश देवासी निकले जिन्होंने महाराष्ट्र के पूणे के पास शिरूर कस्बे में व्यवसायरत है। रूपल का ननिहाल दुदवट में प्रसिद्ध देवीभक्त भुवाजी स्वर्गीय त्रिकमाजी देवासी के वहा है। त्रिकमाजी का भी सपना था कि रूपल डॉक्टर बने और अब यह सपना साकार हो गया है। देवासी समाज सहित रानीवाड़ा के लिए गौरव की बात है।



