संघर्ष से शिखर तक: छोटे से गांव ‘परासिया’ से निकलकर लोढ़ा ग्रुप के डायरेक्टर बनने की अद्भुत दास्तान
शिवगंज। मिट्टी की सोंधी महक, अपनों का साथ और कुछ कर गुजरने का अटूट हौसला हो, तो इंसान बड़े से बड़े महानगर में भी अपनी कामयाबी का परचम लहरा सकता है। कुछ ऐसा ही उदाहरण पेश किया है पाली जिले के सुमेरपुर के पास स्थित छोटे से गांव परासिया के मूल निवासी और देश की प्रतिष्ठित रियल एस्टेट कंपनी ‘लोढ़ा ग्रुप’ मुंबई के डायरेक्टर श्री बाबूसिंह राजगुरु ने। अपनी जड़ों से गहरे जुड़े सुप्रसिद्ध समाजसेवी और बिज़नेस लीडर बाबूसिंह राजगुरु का आज पंचायत समिति शिवगंज आगमन पर भव्य और ऐतिहासिक स्वागत किया गया।

साफा, माला और तलवार भेंट कर हुआ ऐतिहासिक स्वागत
शिवगंज पंचायत समिति में आयोजित इस विशेष गरिमामयी समारोह में प्रधान प्रतिनिधि श्री विशन सिंह देवड़ा ने मारवाड़ी परंपरा और आन-बान-शान के प्रतीक साफा, माला और शौर्य की प्रतीक तलवार भेंट कर श्री राजगुरु का आत्मीय अभिनंदन किया। इस मौके पर पंचायत समिति के तमाम आला अधिकारी, कर्मचारी और क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे, जिन्होंने करतल ध्वनि से इस प्रेरणादायक व्यक्तित्व का स्वागत किया।
शून्य से शिखर का सफर: युवाओं के लिए रोल मॉडल
इस अवसर पर प्रधान प्रतिनिधि विशन सिंह देवड़ा ने श्री बाबूसिंह राजगुरु के जीवन सफर पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व आज की युवा पीढ़ी के लिए एक खुली किताब और सबसे बड़ा मोटिवेशन है। देवड़ा ने कहा, “यह हमारे पूरे क्षेत्र के लिए गर्व और अत्यंत हर्ष की बात है कि हमारे पड़ोस के एक छोटे से गांव से निकले व्यक्ति ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में जाकर कॉर्पोरेट जगत के सर्वोच्च मुकाम को हासिल किया। देश के सबसे बड़े और विश्वप्रसिद्ध बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन ग्रुप्स में से एक ‘लोढ़ा ग्रुप’ के डायरेक्टर पद तक पहुंचना कोई साधारण बात नहीं है। यह उनकी कड़ी मेहनत, दूरदर्शिता और अटूट संकल्प का परिणाम है।”
सफलता के बाद भी माटी से जुड़ाव: समाजसेवा में अग्रणी
एक सफल उद्यमी और डायरेक्टर होने के साथ-साथ श्री बाबूसिंह राजगुरु की पहचान एक बेहद संवेदनशील और सक्रिय समाजसेवी के रूप में भी है। मुंबई की चकाचौंध में रहने के बावजूद वे राजस्थान और अपने गृह क्षेत्र के विकास, सामाजिक सरोकारों और जनकल्याण के कार्यों में हमेशा अग्रणी रहते हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि श्री राजगुरु की यही सादगी और अपनी मातृभूमि के प्रति उनका प्रेम उन्हें दूसरों से अलग और बेहद खास बनाता है।
गरमामयी उपस्थिति और आभार
स्वागत समारोह के दौरान क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं, जिनमें मानेंद्र सिंह भाटी और महीपालसिंह श्रेसेला सहित कई गणमान्य लोगों ने भी श्री राजगुरु का बहुमान किया। कार्यक्रम के अंत में श्री बाबूसिंह राजगुरु ने शिवगंज पंचायत समिति और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अपनी मातृभूमि और अपनों के बीच आकर जो स्नेह और सम्मान उन्हें मिला है, वह उनके लिए अमूल्य है।
जो इस कहानी से हमें सीख मिलती है
“सफलता इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आपकी शुरुआत कितनी छोटी थी, बल्कि इस बात पर निर्भर करती है कि आपके सपनों का आकार कितना बड़ा था और उन्हें पूरा करने के लिए आपके प्रयास कितने ईमानदार थे।” परासिया जैसे छोटे से गांव से निकलकर लोढ़ा ग्रुप की बोर्ड रूम तक पहुंचने वाले बाबूसिंह राजगुरु की यह कहानी हर उस युवा के लिए मिसाल है जो संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं।



