विशेष सम्मान: मरुधरा के सेवा प्रणेता का देश ने माना लोहा
सर्किल न्यूज नेटवर्क
श्रीगंगानगर/जयपुर।
मरुधरा की पावन माटी के अध्यात्म और सेवा के प्रतीक, श्रीगंगानगर के श्रद्धेय संत स्वामी ब्रह्मदेव को समाज सेवा के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान के लिए देश के प्रतिष्ठित ‘पद्म श्री’ पुरस्कार से नवाजा गया है। देश की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित गरिमामय नागरिक अलंकरण समारोह-I में स्वामी ब्रह्मदेव को इस सर्वोच्च सम्मान से विभूषित किया। इस गौरवमयी क्षण के दौरान देश के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह सहित देश की कई बड़ी विभूतियां मौजूद रहीं। इस वर्ष राजस्थान से स्वामी ब्रह्मदेव के साथ-साथ श्री तगा राम भील और श्री गफरुद्दीन मेवाती जोगी को भी पद्म श्री से सम्मानित कर राज्य का मान बढ़ाया गया है।
१६ वर्ष की आयु में वैराग्य, नेत्रहीन बच्चों के आंसू पोंछने का लिया संकल्प
४ मई १९४४ को जन्मे स्वामी ब्रह्मदेव का जीवन मानवता के कल्याण की एक अनूठी गाथा है। मात्र १६ वर्ष की अल्पायु में अपनी प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद वे सतगुरु स्वामी करनैल दास जी के सानिध्य में अध्यात्म की राह पर चल पड़े।
उनकी सेवा यात्रा का टर्निंग पॉइंट तब आया जब वे अमृतसर के एक कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई कर रहे थे। कॉलेज के पास ही स्थित एक अंध विद्यालय के नेत्रहीन बच्चों की पीड़ा और संघर्ष को देखकर स्वामी जी का कोमल हृदय द्रवित हो उठा। बस, उसी पल उन्होंने अपनी दिव्य साधना के साथ-साथ इन विशेष रूप से सक्षम बच्चों के उत्थान को ही अपने जीवन का एकमात्र ध्येय बना लिया।
श्री जगदंबा संस्था: उम्मीदों का वो आशियाना, जहां मिलता है नया जीवन
स्वामी जी के इसी संकल्प का परिणाम था कि वर्ष १९८० में श्रीगंगानगर में ‘श्री जगदंबा अंध विद्यालय’ की आधारशिला रखी गई। पिछले ४५ वर्षों से यह संस्थान दृष्टिबाधित बच्चों को पूरी तरह मुफ्त शिक्षा, भोजन, छात्रावास और हर जरूरी सहायता मुहैया करा रहा है। स्वामी जी का मानना है कि हर मनुष्य को गरिमा और आत्मनिर्भर जीवन जीने का पूरा अधिकार है।
समय के साथ स्वामी जी के मार्गदर्शन में इस सेवा का दायरा बढ़ता ही गया:
- मूक-बधिरों का सहारा: बोल और सुन न पाने वाले बच्चों के लिए ‘श्री जगदम्बा बधिर और मूक स्कूल’ की शुरुआत की गई।
- रोशनी का तोहफा: मोतियाबिंद से पीड़ित गरीब मरीजों के लिए ‘श्री जगदम्बा चैरिटेबल आई हॉस्पिटल’ की स्थापना की गई, जिसका उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री पी.वी. नरसिम्हाराव ने किया था। यह अस्पताल आज पूरे बीकानेर मंडल और पड़ोसी राज्यों के गरीबों के लिए मुफ्त मोतियाबिंद सर्जरी का मसीहा बना हुआ है।
- पुनर्वास की राह: कृत्रिम अंग और व्यावसायिक प्रशिक्षण देने के लिए ‘श्री जगदम्बा विकलांग पुनर्वास संस्थान’ लगातार कार्यरत है।
पहले भी मिल चुके हैं कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय गौरव
स्वामी ब्रह्मदेव की प्रेरणा से समाज में आए इस बड़े बदलाव को सरकारें भी समय-समय पर सराहती रही हैं। वर्ष १९८९ में इस संस्था को सामाजिक कल्याण विभाग, जयपुर द्वारा राज्य स्तरीय पुरस्कार से नवाजा गया था। वहीं, साल १९९६ में विकलांग कल्याण के क्षेत्र में देश की ‘सर्वश्रेष्ठ स्वयंसेवी संस्था’ का राष्ट्रीय पुरस्कार तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा के हाथों इस संगठन को प्राप्त हुआ था।
आज जब स्वामी ब्रह्मदेव को पद्म श्री से अलंकृत किया गया है, तो यह न केवल श्रीगंगानगर बल्कि पूरे राजस्थान की उस सेवा भावना का सम्मान है जो नि:स्वार्थ भाव से पीड़ितों के आंसू पोंछने में विश्वास रखती है।



