ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज के मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव में रक्षा मंत्री और योगी सहित दिग्गजों ने बढ़ाया मान
हरिद्वार।
धर्मनगरी हरिद्वार के पावन तट पर सेवा, संस्कार और राष्ट्रभक्ति की एक नई इबारत लिखी गई। भारत माता मंदिर के संस्थापक, निवृत्त शंकराचार्य ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज के समाधि मंदिर मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव (4-6 फरवरी 2026) के दौरान रानीवाड़ा का गौरव वैश्विक पटल पर चमका। भारत माता संस्कार सेवा ट्रस्ट, रानीवाड़ा के प्रमुख संचालक ऋषि ज्ञानात्मानंद जी महाराज को उनकी उत्कृष्ट निस्वार्थ सेवा और व्यवस्था प्रबंधन के लिए जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज द्वारा विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

प्रतिष्ठित विभूतियों और राष्ट्रीय नेतृत्व की उपस्थिति
इस भव्य आयोजन में देश की राजनीति और अध्यात्म जगत की शीर्ष हस्तियों ने सहभागिता कर इसे ऐतिहासिक गरिमा प्रदान की, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे:
- श्री रामनाथ कोविंद जी (भारत के चौदहवें राष्ट्रपति)
- श्री राजनाथ सिंह जी (केंद्रीय रक्षा मंत्री)
- श्री योगी आदित्यनाथ जी (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश)
- श्री पुष्कर सिंह धामी जी (मुख्यमंत्री, उत्तराखंड)
- श्री देवेंद्र फडणवीस जी (मुख्यमंत्री, महाराष्ट्र)
- श्री मनोहर लाल खट्टर जी (आवास मंत्री, भारत सरकार)
- श्री ब्रजेश पाठक जी (उपमुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश)
- स्वामी गोविंद देव गिरि जी (कोषाध्यक्ष, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास)
- योगऋषि स्वामी बाबा रामदेव जी (संस्थापक, पतंजलि योगपीठ)
- श्री कृष्ण मोहन जी (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ)
- बड़े दिनेश जी (संरक्षक, विश्व हिंदू परिषद)
इस गरिमामयी मंच पर संतों ने ऋषि ज्ञानात्मानंद जी के गुरु पूज्य ब्रह्मलीन स्वामी स्वयंआत्मानंद गिरि जी महाराज का भी श्रद्धापूर्वक स्मरण किया।

प्रोग्राम की महत्ता: अध्यात्म से राष्ट्र निर्माण
यह आयोजन मात्र एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि राष्ट्र की सांस्कृतिक एकता का उद्घोष था। समाधि मंदिर में मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा उस महान चेतना को जीवंत रखने का प्रयास है, जिसने जीवनभर ‘भारत माता’ को आराध्य मानकर समाज की सेवा की। इस महोत्सव ने सिद्ध किया कि सेवा भाव और समर्पण ही एक राष्ट्रसेवक की असली पहचान है।
स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि: एक महान राष्ट्रसंत का परिचय
स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज केवल एक सन्यासी नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के सांस्कृतिक पुरोधा थे।
- भारत माता मंदिर की स्थापना: उन्होंने हरिद्वार में प्रसिद्ध ‘भारत माता मंदिर’ की स्थापना की, जो किसी देवी-देवता को नहीं, बल्कि अखंड भारत के मानचित्र और मातृभूमि को समर्पित है। यह मंदिर जाति-पाति से ऊपर उठकर राष्ट्रभक्ति का पाठ पढ़ाता है।
- राम मंदिर आंदोलन और RSS: स्वामी जी का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद के साथ गहरा जुड़ाव रहा। राम मंदिर आंदोलन में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी; उन्होंने अपनी ओजस्वी वाणी से जन-जागरण किया और राम जन्मभूमि की मुक्ति के संकल्प को धार दी।
- समाज सेवा: उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में ग्रामीण भारत के लिए अभूतपूर्व कार्य किए।
मारवाड़ के सेवाभावी भक्तों का समर्पण
आयोजन की सफलता में राजस्थान के जालोर, सिरोही, पाली और बाड़मेर से आए 300 से अधिक श्रद्धालुओं का विशेष योगदान रहा। इन श्रद्धालुओं ने भोजन-प्रसादी से लेकर समस्त व्यवस्थाओं में दिन-रात सेवा की, जिसकी सभी संतों और अतिथियों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।
”यह सम्मान ऋषि ज्ञानात्मानंद जी के माध्यम से पूरे राजस्थान की सेवा भावना का सम्मान है, जो ऋषि परंपरा को जीवंत रखे हुए हैं।”
— स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज



